
इंडिया टीवी के टाइम्स एवं प्रोडक्शन हाउस के चीफ रजत शर्मा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज एनडीए संसदीय दल का नेता चुना गया। पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में एनडीए के सभी सहयोगियों की बैठक होगी, जिसमें सभी सहयोगी दलों ने एक स्वर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। इस प्रस्ताव का समर्थन गृह मंत्री अमित शाह, सहयोगी दलों के नेता चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार, एचडी कुमारस्वामी और अन्य ने किया। नीतीश कुमार ने यहां तक कहा कि वो चाहते थे कि मोदी आज ही प्रधानमंत्री पद की शपथ लें। अपने धन्यवाद भाषण में नरेंद्र मोदी ने एनडीए की चुनावी जीत को ‘महाविजय’ बताया और कहा कि जनता ने इंडियन एलायंस को उसके भ्रष्टाचार के इतिहास का कारण बताया। मोदी ने एनडीए सांसदों से अपील की कि वे मंत्रालयों के अभियानों के बारे में चल रही अटकलबाजियों पर भरोसा न करें।
उधर, राष्ट्रपति भवन में मोदी के तीसरे शपथ ग्रहण की तैयारियां तेजी से हो गई हैं। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में पक्षियों के लिए कुर्सियां लग गई हैं। मोदी रविवार नौ जून को शपथ लेंगे, जिसमें कई पड़ोसी देशों के राजनेता शामिल होंगे। इनमें बंगलादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान जैसे देश शामिल हैं। जहां तक मंत्रालयों को लेकर अटकलों का सवाल है, मुझे 2014 के चुनाव के बाद हुई एनडीए के नेताओं की पहली मुलाकात में कही गई नरेंद्र मोदी की बात याद आ रही है। केंद्रीय हॉल में हुई उस मुलाकात में मोदी ने कहा था कि अब ‘काबुल’ को लेकर चर्चा शुरू होगी, सभी दावे किए जाएंगे, लेकिन ऐसी किसी अफवाह के चक्कर में मत पड़ना, अगर कोई कहे कि वो आपको मंत्री बना सकता है, तो भरोसा नहीं करना । अगर कोई फोन आए कि प्रधानमंत्री कार्यालय से बोल रहा हूं, आपको मंत्री बनाया जा रहा है तो भी यकीन मत करना, एक बार प्रधानमंत्री कार्यालय फोन करके पूछना, क्योंकि फैसला मुझे करना है, और किसी को नहीं। उसके बाद इस तरह की अटकलबाजी बंद हो गई, सत्ता के गलियारों में घूमने वाले बिचौलियों की दुकानें बंद हो गईं। लेकिन इस बार परिस्थितियां बदलती हैं। भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। गठबंधन की सरकार बन रही है इसलिए फिर उसी दौर की बातें शुरू हो गई हैं। लेकिन शायद लोग ये भूल रहे हैं कि सिर्फ आंकड़े बदलते हैं, परिस्थितियां बदलती हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी वही हैं, जो समझौता नहीं करते, दबाव में नहीं आते।
यह सही है कि नरेंद्र मोदी की यह सरकार चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के समर्थन पर टिकी होगी, इसलिए उनका ख्याल रखना होगा। लेकिन मेरी जानकारी ये है कि चंद्रबाबू नायडू ने किसी तरह की कोई शर्त नहीं रखी है। चन्द्रबाबू नायडू ने नरेन्द्र मोदी से सिर्फ इतना कहा है कि आप देश की सरकार जैसे चल रहे थे, वैसे ही चले, वह बिना शर्त पूर्ण समर्थन देंगे और बदले में आंध्र प्रदेश के लोगों की सुरक्षा के लिए उन्हें केन्द्र से जो सहयोग चाहिए, वह केन्द्रित है। सरकार से मिले. बस यही शर्त है। इसके अलावा किसी पद को लेकर, मंत्रियों की संख्या को लेकर या मंत्रियों को लेकर न तो नीतीश कुमार के साथ कोई बात हुई है, न ही चंद्रबाबू नायडू के साथ, और न ही इन दोनों ने अपनी तरफ से कोई मांग अभी तक रखी है। सरकार में एकजुटता के अलावा कुछ मुद्दे हैं जिन्हें लेकर भाजपा टीडीपी, जेडीयू के बीच दुश्मनी है। इसलिए अब उन मुद्दों को हवा दी जा रही है। पूछा जा रहा है कि कॉमन सिविल कोड पर जेडीयू और टीडीपी का रुख क्या होगा। क्या ये दोनों बिहार और आंध्र को स्पेशल स्टेटस की मांग करते हैं? क्या मोदी पर अग्निवीर स्कीम को वापस लेने के लिए दबाव बनाएगी। जेडीयू की तरफ से इन सवालों का भी साफ जवाब दिया गया। नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ मुलाकात की। सारे नतीजों को अपनी प्राथमिकता समझा दी। यह भी साफ कर दिया कि एनडीए के साथ थे और एनडीए के साथ ही रहेंगे।
यह सही है कि विरोधी दलों के नेता समान नागरिक संहिता, राज्यों को विशेष दर्जा, जातिगत जनगणना और अग्निवीर योजना जैसे मुद्दों पर विवाद पैदा करने की कोशिश करेंगे, लेकिन भाजपा के नेताओं का कहना है कि इन सभी मुद्दों पर सहमति बनाना मुश्किल नहीं होगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पहले ही कह चुके हैं कि अनुभव के आधार पर अग्निवीर योजना में जो कमियां सामने आएंगी, उन्हें सरकारी दूरियां, इस योजना पर पुनर्विचार करने में भी कोई हिचक नहीं होगी। इसलिए अगर इस मामले में सहयोगी दल मांगेंगे तो अग्निवीर योजना पर सरकार अड़गी नहीं। जहां तक जातिवाद का सवाल है तो भाजपा ने कभी इसका विरोध नहीं किया। इसलिए हो सकता है कि सरकारी जातिगत जनगणना के लिए तैयार हो जाए।
भाजपा के नेताओं का कहना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने यूसीसी के सवालों पर सफाई दी है कि वे भाजपा के एजेंडे में हैं लेकिन इसे लागू करना है या नहीं, ये राज्य पर निर्भर होंगे। इसलिए इसमें भी कोई लाभ नहीं होगा। थोड़ा बहुत मुश्किल विशेष श्रेणी को लेकर होगी क्योंकि नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू दोनों अपने राज्य के लिए विशेष श्रेणी की मांग कर रहे हैं। केन्द्र सरकार की यह मुश्किल है कि अगर बिहार और आंध्र प्रदेश को एक विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है तो दूसरे राज्य भी इसकी मांग करेंगे। नीति आयोग भी इस पैकेज को खत्म कर चुका है। इसलिए विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए नरेंद्र मोदी बिहार और आंध्र प्रदेश के विकास के लिए अतिरिक्त मदद दे सकते हैं। कुल मिलाकर नरेंद्र मोदी को भी जाना जाता है, सरकार गठबंधन की है और नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू भी राजनीति में नए नहीं हैं। उन्हें भी केन्द्र सरकार की गतिविधियाँ पता है। इसलिए इस तरह के मुद्दे पर चर्चा होगी, इसकी संभावना कम है। (राजेश शर्मा)
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