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गर्मी की छुट्टियों के लिए बेतला नेशनल पार्क बेहतरीन विकल्प है. यहां अब जंगल सफारी का समय बढ़ाकर 1.5 घंटा कर दिया गया है. पर्यटकों के लिए ट्री हाउस और एसी कॉटेज की सुविधा उपलब्ध है. मई-जून में बाइसन, हाथी और चीतल जैसे जानवर आसानी से दिखते हैं. बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क भी बनाया गया है.
पलामूः अगर आप शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून चाहते हैं, तो बेतला नेशनल पार्क की यात्रा आपके लिए यादगार साबित हो सकती है. तो लातेहार जिले का बेतला जंगल, जानवर और आरामदायक ठहराव यहां की खास पहचान है. गर्मी की छुट्टियों में अगर आप प्रकृति और वन्यजीवों के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो बेतला नेशनल पार्क बेहतरीन विकल्प बन सकता है. पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थित यह पार्क मई-जून के मौसम में पर्यटकों को खास आकर्षित कर रहा है. यहां हरियाली, जंगल सफारी और आरामदायक ठहरने की सुविधा एक साथ मिलती है. ऐसे में आप यहां गर्मी छुटी मनाने पहुंच सकते है.
आरामदायक ठहरने की पूरी व्यवस्था
बेतला नेशनल पार्क परिसर में पर्यटकों के लिए कॉटेज और ट्री हाउस बनाए गए हैं. गर्मी के मौसम को देखते हुए कमरों में एसी की सुविधा उपलब्ध है, जिससे परिवार के साथ ठहरना आसान और आरामदायक हो जाता है. यहां बेसिक से लेकर बेहतर सुविधाओं वाले कमरे उपलब्ध हैं. ट्री हाउस का किराया करीब 2500 रुपये और कॉटेज का किराया करीब 3000 रुपये रखा गया है.
खाने-पीने और बच्चों के मनोरंजन की सुविधा
टूरिज्म ऑफिसर विवेक तिवारी ने लोकल18 को बताया कि पार्क परिसर में कैंटीन की व्यवस्था है, जहां पर्यटकों को खाने-पीने की सुविधा मिलती है. बच्चों के मनोरंजन के लिए चिल्ड्रेन पार्क भी बनाया गया है, जिससे परिवार के साथ आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिलता है. वहीं खाने पीने के लिए कैंटीन की सुविधा है.
अब 1.5 घंटे की होगी जंगल सफारी
आगे कहा कि बेतला घूमने आने वालों के लिए सबसे खास आकर्षण जंगल सफारी है. पहले सफारी का समय एक घंटे का था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर डेढ़ घंटा कर दिया गया है. सफारी का शुल्क करीब 2450 रुपये है. इस दौरान पर्यटकों को जंगल के भीतर प्राकृतिक माहौल में वन्यजीवों को करीब से देखने का मौका मिलता है. वहीं आपको गाइड भी मिलता है. जो कि जंगलों की खूबी और कहानी से आपकी यात्रा यादगार बना देगा.
सफारी में दिखेंगे कई जंगली जानवर
जंगल सफारी के दौरान सड़क किनारे बने पियाउ पर अक्सर जंगली जानवर पानी पीने आते नजर आते हैं. यहां बाइसन, हाथी, चीतल, बुल, मोर समेत कई वन्यजीव देखे जा सकते हैं. गर्मी के मौसम में जलस्रोतों के आसपास जानवरों की गतिविधि बढ़ जाती है, इसलिए मई-जून का समय वन्यजीव देखने के लिए बेहतर माना जाता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.





