‘काशी में मोदी को 10 लाख वोट से जिताने की योजना अमित शाह ने बनाई थी। लेकिन सारी योजना विधायक, महापौर और मेयर ने विफल कर दिया। सब कुछ तय था कि 5 विधानसभाएं हैं, दो-दो लाख वोट मिलेंगे। विधायक से लेकर जमसी और मेयर सभी घमंड में थे।
.
ऐसा लग रहा था कि बनारस की जनता इन्हें वोट तो देगी ही। ऐसा लगता था कि बनारस के लोग इनके बंधुआ मजदूर हैं। लेकिन इनमें से किसी ने मेहनत ही नहीं की। आम नेता आये वे सब केवल सड़क पर घूमे, होटल में खाए। लेकिन जनता से मिलने पर ध्यान ही नहीं दिया। यही वजह रही कि जनता ने वोट नहीं दिया।’
यह कहते हुए गोदौलिया में विकास यादव गुस्से में दिखे। हमने पूछा- क्या काशी में इतनी भी प्रगति नहीं हुई कि लोग वोट दें। विकास भोजपुरी में कहते हैं- काशी में विकास तो भइल, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर देखला, नमो घाट, बतौरपुर देखला। मंडुवाडीह में बनारस स्टेशन भव्य बन गया। अब विकास ना रुकल, एमपी तो बनिए देवल गईल।’
विकास के इन शब्दों में काशी में हुए परिवर्तन की वजह से समझ में आता है। काशी को पूरे देश में गंगा नदी और काशी विश्वनाथ धाम से लोग जानते हैं। इसकी लोकप्रियता के साथ पीएम नरेंद्र मोदी की पहचान भी है। बाबा विश्वनाथ मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद 2019 में पीएम मोदी ने बाबा काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन किया। चुनाव में लोगों ने उन्हें रिकॉर्ड 45.22% वोट मार्जिन से जीता था।

पीएम मोदी ने विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी, पूरे काशी का स्वरूप बदलने के लिए 10 साल में 60 हजार करोड़ की परियोजना दी। बाबा काशी विश्वनाथ का मंदिर बनने के बाद पूरे देश से वीआईपी आंदोलन काशी की तरफ होने लगा। काशी का पूरा वातावरण बदला, मगर लोग अंदर ही अंदर उठा-पटक का मन बना चुके थे। पीएम मोदी भी जनमत के संकेत को भांप चुके थे, इसलिए उन्होंने कहा था- जीत को लेकर ज्यादा विश्वास न दिखाएं, मेहनत करें। 2 हजार लोगों को पीएम मोदी ने खुद पत्र भी लिखा।
भाजपा के 3 मंत्री, 8 विधायक, 3 विधायक, महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव अभियान में जुटे रहे। ‘स्पेशल 100’ भी महंगा सेट करते रहे। मगर लोगों ने बदलाव के लिए वोट किया। 40.74% वोट इंडी गठबंधन के अजय राय को मिले। काशी के लोगों के इस अचंभित करने वाले मनोभाव को आश्चर्यचकित करने के लिए दैनिक भास्कर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। पढिए रिपोर्ट…

लोग बोले- स्टार प्रचारक शहर घूमकर चले गए, सड़कों पर आए ही नहीं
मणिकर्णिका घाट के पास हमारी मुलाकात मदन कुमार यादव से हुई। वह मूल्यांकन सामग्री युक्त हैं। लोगों ने मोदी को वोट इतना कम क्यों दिया? वह कहते हैं- देखिए, पीएम मोदी के लिए जीत की कोई कामयाबी नहीं थी। जनता के बीच 2019 के चुनाव में जितना उत्साह था, उतना 2024 के चुनाव में नहीं दिखा।
इसके अलावा भाजपा के स्टार प्रचारक बनारस घूमकर चले गए। वह तो बस में ही नहीं है। काशी के स्थानीय मुद्दों पर बात ही नहीं की गई। 10 साल में कोई नई फैक्ट्री बस एक गलियारा नहीं बनी। बेरोजगारी एक अहम मुद्दा था, जिस पर लोगों ने कम वोट दिया। चुनाव में संविधान और बेरोजगारी पर एक संदेश देने में सफलता मिली।

अस्सी घाट पर नाव बोले- माझी समाज में कुछ लोगों ने वोट दिया, कुछ ने नहीं दिया
अब हम अस्सी घाट पहुँचे। यहां हमारी मुलाकात नव विनोद साहनी से हुई। वह कहते हैं- गंगाजी से हमारी रोजी-रोटी है। सरकार ने क्रूज चलाया। हमें यह नहीं करना चाहिए। हम जैसे हैं, अच्छे हैं। इसलिए कुछ माज़ी समाज ने वोट दिया, कुछ ने नहीं दिया। 2014 में यहां बहुत सारे काम हुए। मुझे भी सीएनजी बोट मिली थी। मगर रोजगार और क्रूज को लेकर उन्हें पहुंचना ही होगा।

बुनकर हुसैन बोले- 1 लाख बुनकर काशी छोड़कर चले गए
बड़े बाजार के बुनकर मोहम्मद हुसैन कहते हैं- मोदी जीते हैं, उन्हें बधाई। मोदी 10 साल से सांसद और प्रधानमंत्री हैं, आज तक बुनकरों का ख्याल नहीं रखा। 1 लाख से ज्यादा बुनकर काशी आधे हो गए हैं। मगर इसका ख्याल तक नहीं रखा गया है। ऐसे में क्या उम्मीद रखी जाए। यहां बुनकर भुखमरी की कड़ियों पर हैं।

पॉलिटिकल एक्सपोर्ट्स
काशी में इतने विकास के बाद भी वोटर भाजपा से छिटक गया, क्या कारण हो सकते हैं?
बीएचयू के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर तेज प्रताप सिंह कहते हैं- पीएम मोदी की जीत का मार्जिन क्यों कम हुआ? इसके 3 कारण हैं। पहला कारण है- एंटी इनकंबेंसी। सबको पता है कि जनता एक ही उम्मीदवार को बार-बार वोट देना पसंद नहीं करती है। बार-बार एक ही उम्मीदवार आने पर वोट कम होता है।
दूसरा- जाति और धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण हुआ है। इस बार के चुनाव में जाति और धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण बहुत हुआ। 2014, 2019 के चुनाव में इतना ज्यादा नहीं हुआ था। तीसरा कारण- भाजपा के विज्ञापनों का घर से बाहर न निकलना। यही कारण रहा कि उम्मीद थी मोदी 5 लाख वोट से जीतेंगे लेकिन सिर्फ लांड लाख से जीत सके।

अजय राय को इतने वोट मिलने के पीछे क्या कारण रहे?
पॉलिटिकल एक्सपोर्ट्स असद कमल लारी ने कहा- इस बार चुनाव में भाजपा के रणनीतिकार विफल हो गए। जमीन वास्तविकता को पढ़ पाए बिना। प्रधानमंत्री मोदी को ऐतिहासिक जीत का दावा सही साबित नहीं हुआ। अजय राय जिन मुद्दों को लेकर चल रहे थे। भाजपा ठीक उसके उलट चल रही थी। बेरोजगारी और छोटे-छोटे मुद्दों पर अजय राय ने जनता को फोकस किया।
बेरोजगारी, नाव, युवा, गंगा इन सभी छोटे-छोटे मुद्दों पर कांग्रेस और सपा ने ध्यान दिया। अजय राय का बाहरी और बनारसी का मुद्दा यूथ को हिट कर दिया गया। अजय राय ने कहा था- गुजरात के लोग यहां आते हैं और कमाते हैं। वाराणसी के लोगों को धोखा देते हैं। वे मजदूर हैं।
असद कमाल की लारी कहते हैं- 2014 उम्मीदों का साल था। जब मोदी पहली बार यहां गर्मियों में आए तो यहां के युवाओं ने उनके साथ दिया। 2019 चुनाव में लोगों ने सोचा कि 5 साल में लग गए। एक बार फिर मौका देते हैं। वह समय जो युवा 18 वर्ष से 21 वर्ष का था। 10 साल में वो 28 से 31 साल का हो गया। लेकिन उसे कोई स्थान नहीं मिला। बनारस व्यापार पर आधारित हो गया। विश्वनाथ धाम बनने के बाद पर्यटकों से जुड़े लोगों का रोजगार बढ़ेगा। लेकिन बनारस जाम नगरी बन गई। बनारस क्योटो नगरी तो नहीं, टोटो नगरी जरूर बन गयी।

काशी के देहात क्षेत्रों में अग्निवीर और पेपर लीक के मुद्दे चले
लोगों से बात करके समझ में आया कि काशी के देहात क्षेत्रों के युवाओं में अग्निवीर और पेपर लीक का मुद्दा भी हावी हो रहा है। सपा-कांग्रेस के संविधान परिवर्तन के बयानों का प्रकाशन और गैर यादव पिछड़ा वर्ग पर असर दिखा। निर्यात मानते हैं कि कुर्मी, वुश, राजभर, निषाद, जाटव, पासी, प्रजापति, बींद, केवट, मल्लाह और राजपूत बहुल क्षेत्रों में लोगों ने इंडी को वोट दिया।
अजय राय का ये चौथा चुनाव था। उन्होंने गुजरात के श्रमिकों को टेंडर देने के बयान से श्रमिक वर्ग के लोगों के जख्म कुरेद दिए। भाजपा मंदिर-मस्जिद और राष्ट्रवाद पर वोट मांगती रही। लोगों के व्यापार प्रभावित होने की वजह से काशी विश्वनाथ परिष्कार में सबसे कम वोट मिले।

भाजपाइयों में जीत का जोश नहीं, सवालों पर सन्नाटा
वाराणसी लोकसभा चुनाव के चमत्कारिक पहलुओं पर आधारित काशी में सन्नाटा है। मंत्री से लेकर आंदोलन तक, राहुल गांधी साधे हुए हैं, इसलिए संगठन में भी खामोशी है। किसी भी सवाल पर कोई नेता प्रतिक्रिया देने से बच रहा है। पीएम को मिले वोट ने भाजपा संगठन और रणनीतिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शाह के भरोसेमंद नेता ‘बेअसर’ साबित हुए
पीएम नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत के लिए अमित शाह ने सुनील बंसल, अश्विनी त्यागी, पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी, आमसी अरुण पाठक, कांग्रेस महासचिव सुरेंद्र नारायण सिंह, आमसी हंसराज विश्वकर्मा, काशी क्षेत्र अध्यक्ष दिलीप पटेल, महानगर अध्यक्ष विद्यासागर राय, राज्यमंत्री रविंद्र विश्वकर्मा, राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी को जिम्मेदारी दी थी।
इनके अलावा महापौर अशोक तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, डा. अवधेश सिंह, सुनील पटेल, सुशील सिंह, रमेश वासस, नमसी अशोक, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, पलमसी धर्मेंद्र राय, राजेश त्रिवेदी, पूर्व मेयर राम गोपाल मोहले और मृदुला गेस्ट, कौशलेंद्र सिंह पटेल, चेत नारायण सिंह, राजेश त्रिवेदी, कांग्रेस सह संयोजक राहुल सिंह, संजय सिंह, नवीन कपूर, संजय सोनकर और प्रवीण सिंह गौतम पर भी वोट बढ़ाने का जिम्मा था। मगर इसका असर ज़मीन पर कहीं नहीं दिखता।
ताश ने खोली इलाके की कली
काशी के चुनाव नतीजों ने मेयरों के लिए कई उतार-चढ़ाव भरे नतीजे पेश किए। पीएम मोदी को बड़े-बड़े वादे करने वाले पीएम मोदी जनता तक अपनी बात नहीं पहुंचा सके। सरकार की योजनाएं आमजन तक नहीं पहुंचतीं और न ही पीएम के सिपहसालार में कामयाब होतीं।
वर्ष 2014 और 2019 के आम चुनाव में ऐसा नहीं था। पीएम को कम वोट मिला साफ कहता है कि विधायक अपना काम नहीं कर सकते। काशी के चुनावों को भी जनता ने नकार दिया है।
- ये खबरें भी पढ़ें
यूपी में नोटा ने 570 उम्मीदवारों को हराया: बीजेपी, सपा-कांग्रेस को 3-3 सीटों का नुकसान, वाराणसी में 4 अफसोस हुए; 681 की जमानत जब्त

यूपी में कांग्रेस चुनाव 2024 का रिजल्ट चौंकाने वाला रहा। इन सबके बीच नोटा का वोट बैंक भी पीछे नहीं रहा। यूपी में नोटा ने 570 उम्मीदवारों को हरा दिया। इसके अलावा, नोटा की वजह से भाजपा, सपा और कांग्रेस को 6 सीटों का नुकसान हुआ। इन नतीजों पर जीत का अंतर नोटा को मिले वोट से बहुत कम है। पढ़ें पूरी खबर…
यूपी चुनाव में सबसे दिलचस्प-चौंकाने वाली बातें: सबसे छोटे हार, जहां हुड़दंग, संघमित्रा रोईं के नतीजे, भाजपा के 5 बड़े चेहरे जो हारे

लोकसभा चुनाव में यूपी में सपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। देश में अखिलेश यादव की पार्टी तीसरे नंबर पर है। यूपी में भाजपा को 29 फीसदी का बड़ा नुकसान हुआ है। पार्टी 62 से 33 सीटें जीतकर आई है। वोट शेयर भी 8.63% 41.37% हो गया है। पढ़ें पूरी खबर…
