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CJI Said Elections are basis of constitutional democracy in India | CJI बोले-चुनाव भारत के संवैधानिक लोकतंत्र का मूल आधार: ​​​​​​​जजों को उनके फैसलों से राजनीति पर पड़ने वाले असर से परिचित होना चाहिए

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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सीजेआई ने ऑक्सफोर्ड में समाज में लेखकों की मानवीय भूमिका विषय पर अपनी बात रखी।  - दैनिक भास्कर

सीजेआई ने ऑक्सफोर्ड में समाज में लेखकों की मानवीय भूमिका विषय पर अपनी बात रखी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीव चंद्रचूड़ ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान कहा- चुनाव भारत के संवैधानिक लोकतंत्र का मूल आधार है। भारत में जज किसी चुनाव में निर्वाचित नहीं होते हैं। वहां जज सिस्टम की रक्षा करने वाले संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की भावना पर नजर रखी जाती है।

कार्यक्रम में सीजेआई से पूछा गया कि फैसला सुनाते समय उन पर कितना राजनीतिक और सामाजिक दबाव होता है। इसके जवाब में उन्होंने कहा- न्यायाधीश के रूप में मेरे 24 सालों के कार्यकाल में मुझे कभी भी पॉलिटिकल दबाव का सामना नहीं करना पड़ा।

हमारा जीवन सरकार की पॉलिटिकल शाखा से बिल्कुल अलग है। हम नेताओं से अलग जीवन जीते हैं, लेकिन किसी भी जज को अपने राजनीति के प्रभाव से परिचित होना चाहिए। इसे पॉलिटिकल प्रेशर नहीं कहा जाता है। यह किसी निर्णय के प्रभावशाली अर्थ में कहा जाता है।

सेम सेक्स मैरिज के फैसले पर कहा- मैं अल्पमत में था
सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को सेक्स विवाह को कानूनी मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव न करने के फैसले को लेकर CJI ने कहा- मैं यहां फैसले का बचाव करने के लिए नहीं आया हूं। मेरा मानना ​​है कि न्यायाधीशों द्वारा की गई टिप्पणियों के कारण वैश्विक मानवता की संपत्ति बन जाती है।

विशेष विवाह अधिनियम संसद से पारित किया गया एक कानून था। 5 जजों की संवैधानिक बेंच थी। मैं अल्पमत में था, लेकिन बेंच के 3 जज मुझसे सहमत नहीं थे, क्योंकि उनका मानना ​​था कि सेम-सेक्स विवाह को मान्य देना न्यायिक क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र के बाहर है।

कोर्ट लगातार संवाद की प्रक्रिया में विश्वास रखता है। अदालती मुकदमा करने वाले पक्ष और नागरिकों और समाज के साथ लगातार संवाद किया जाता है। अहम संवैधानिक मामलों को लाइव करने के अपने फैसले पर देवी चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें न्याय की प्रक्रिया और कानून के प्रशासन को लोगों के घरों और दिलों तक ले जाने की जरूरत है।

CJI बोले- हमें टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को नजरअंदाज करना चाहिए
CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि टोकनोलोजी और AI पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह अहम है कि हम न्याय के मानवीय तंत्र को सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकियों के उपयोग को समझें। हमें इसके सकारात्मक और स्वस्थ्य अंक भी चाहिए होंगे।

भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत उपयोगी हो सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम AI को नैतिक तरीके से नियंत्रित कर सकें। हमें ध्यान रखना होगा कि हम संचार प्रक्रिया को जज से रोबोट में शिफ्ट न करें।

CJI बोले- हमें तय करना होगा कि हमारे अधिकार क्षेत्र में क्या है
आधुनिक लोकतंत्र में लोगों को और समाज को अपनाना ही बहुत संभव है। किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए लोग कोर्ट की तरफ नहीं देख सकते। जजों के रूप में हम एक लाइन तय करना होगा। हमें तय करना होगा कि नैतिक रूप से हमारे अधिकार क्षेत्र में क्या आता है।

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CJI बोले- नए क्रिमिनल लॉ समाज के लिए ऐतिहासिक, ये तभी सफल होंगे, ​​​​​​​​​​​​​​

​​​​​​​चीफ जस्टिस दीवाई चंद्रचूड़ ने तीन नए क्रिमिनल डिफेंस को ऐतिहासिक बताया। सीजेआई ने यह भी कहा कि भारत में अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में अहम बदलाव के लिए तैयार है। ये बदलाव तभी सफल होंगे, जब जिन पर लागू करने का जिम्मा है, वे खुद ही अपनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…

CJI बोले- बिना फैसले के मामलों को रिजर्व रखना गलत, महीनों बाद सुनवाई पर मौखिक फायदे नहीं

​​​​​​​सीजेआई दीवाई चंद्रचूड़ ने न्यायिक मामलों को दीर्घकालिक रिजर्व रखने के न्यायाधीशों के नेतृत्व पर प्रतिकूल निगरानी रखी है। उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जज बिना फैसला सुनाए किसी मामले को 10 महीनों से ज्यादा समय तक सुरक्षित रखते हैं। यह चिंता का विषय है। पूरी खबर पढ़ें….

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