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- विधानसभा चुनाव परिणाम 2024 लाइव अपडेट; आंध्र प्रदेश ओडिशा नवीन पटनायक जगन मोहन रेड्डी | बीजेडी वाईएसआरसीपी उम्मीदवार
भुवनेश्वर/अमरावती13 मिनट पहले
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कांग्रेस चुनाव के साथ ही ओडिशा और आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आज यानी 4 जून को आने वाले हैं। आंध्र के 5 एग्जिट पोल में एनडीए तो दो में उदार वाईएसआरसीपी की सरकार बनती दिख रही है। ओडिशा में नवीन पटनायक की बीजद और भाजपा में बराबर की टक्कर है।
आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के जगन मोहन रेड्डी 2019 से सत्ता में हैं। जगन मोहन ने पिछली बार 175 में से 151 सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज की थी। राज्य में भाजपा ने चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) के साथ गठबंधन किया है।
वहीं, ओडिशा में नवीन पटनायक 24 वर्ष (मार्च 2000) से लगातार मुख्यमंत्री हैं। ओडिशा में भाजपा ने किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही चुनावी लड़ाई लड़ी।
आंध्र प्रदेश: सत्ता परिवर्तन का अनुमान
एग्जित पोल में इस बार जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी सरकार गिरने का अनुमान लगाया गया है। पांच अगस्त को हुए चुनाव में भाजपा, टीडीपी और जनसेना पार्टी के गठबंधन को बहुमत मिलने का अनुमान है।
सिर्फ दो एग्जिट पोल में वाईएसआरसीपी को बहुमत मिलता दिख रहा है। 6 अगस्त को कांग्रेस का खाता भी नहीं दिख रहा है। सिर्फ एक पोल में कांग्रेस को 0-2 सीट मिलती दिख रही है।



आंध्र प्रदेश विधानसभा में 175 मौतें हुई हैं। सरकार बनाने के लिए 88 विधायक चाहिए। राज्य में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में युवा श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की सरकार है। 2019 में जगन मोहन रेड्डी पहली बार राज्य के सीएम बने थे।
मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ एक तरफ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), जन सेना पार्टी (जेएसपी) और भाजपा गठबंधन है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस है। जगन के लिए पहली चुनौती टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू एम.डी.एम. हैं, जो तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
इस चुनाव में टीडीपी ने 175 सीटों से 144 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जन सेना 21 और भाजपा 10 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
जगन रेड्डी की दूसरी चुनौती उनकी बहन वैएस शर्मिला हैं। वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। आंध्र प्रदेश में दशकों तक कांग्रेस की सरकार रही है। 1956 से 1983, 1989 से 1994 और 2004 से 2014 तक पार्टी सत्ता में रही।

जगन मोहन रेड्डी के पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी आंध्र कांग्रेस में बड़े नेता थे। 2004 और 2009 में वे लगातार दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। जगन मोहन ने भी अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस से ही शुरू किया था। वे 2009 में कांग्रेस से पहली बार सांसद चुने गए।
हालांकि, 2009 में हेलीकॉप्टर हादसे में पिता की मौत के बाद जगन ने 2010 में कांग्रेस सेरेस दे दिया। उन्होंने 2011 में अपनी अलग पार्टी वाईएसआरसीपी बनाई। 2014 में उनकी पार्टी ने 67 जान गंवाईं। 2019 में वाईएसआरसीपी ने 151 दलितों को चंका दिया था।
हालाँकि, इस बार उनकी बहन कांग्रेस राज्य में अगुआई कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस के परंपरागत मतदाता भाई-बहन की पार्टी में हिस्सा ले सकते हैं। कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन वाईएसआरसीपी के वोट कटने से इसका सीधा फायदा टीडीपी को होगा।


ओडिशा: बीजेडी और भाजपा में कांटे की टक्कर
एग्जित पोल के अनुसार, ओडिशा में भाजपा सरकार 24 साल से चल रही है और नवीन पटनायक की बीजद को कांटे की टक्कर देती नजर आ रही है। इसमें भाजपा और बीजद को कुल 147 में से लगभग बराबर सीटें मिल रही हैं। दोनों पागलों की 62 से 80 साइड जीतने का परीक्षण किया गया है। वहीं, कांग्रेस को 5-8 मुद्दे मिलने की बात कही गई है।



बीजेडी सत्ता में आएगी तो नवीन पटनायक सीएम बनने का रिकॉर्ड तोड़ेंगे
ओडिशा विधानसभा में 147 मौतें हुई हैं। बहुमत के लिए 74 बीज चाहिए। राज्य में बीजू जनता दल (बीजद), भाजपा और कांग्रेस तीन प्रमुख हैं।
बीजेडी वर्ष 2000 से लगातार सत्ता में है। बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक 24 साल से मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 5 मार्च 2000 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। तब से 2019 तक वे 5 बार से ओडिशा के सीएम हैं।
सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग (24 वर्ष और 165 दिन) के बाद नवीन पटनायक (24 वर्ष और 83 दिन) सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले देश के दूसरे नेता हैं।
ओडिशा विधानसभा का कार्यकाल जून के पहले हफ्ते में खत्म हो रहा है। अगर बीजद की सरकार बनती है और नवीन पटनायक मुख्यमंत्री बनते हैं तो वे सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेता बन सकते हैं।

बीजद-भाजपा ने दो बार गठबंधन में सरकार बनाई
भाजपा और बीजद ने दो विधानसभा चुनावों (2000 और 2004) में गठबंधन लड़ा था। उस समय बीजद, एनडीए की सबसे भरोसेमंद पार्टी मानी जाती थी। वर्ष 2000 में बीजद ने 68 और भाजपा ने 38 मौतें हुईं।
147 में से 106 सीटों के साथ दोनों दलों ने पहली बार गठबंधन की सरकार बनाई और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया। 2004 के चुनाव में भाजपा और बीजद ने कुल 93 मौतें हुईं। बहु सत्ता में आई।

बीजद ने 2009 में 11 साल का गठबंधन तोड़ा
2009 विधानसभा चुनाव से पहले बीजद ने भाजपा से 11 साल पुराने गठबंधन को तोड़ दिया। बीजद चाहती थी कि भाजपा विधानसभा चुनाव में 163 सीटों पर से 40 पर चुनाव लड़े, जबकि भाजपा 63 सीटों पर लडऩा चाहती थी।
2019 में BJD ने 112 लोगों की जान ले ली। भाजपा 23, कांग्रेस 9 और अन्य के खाते में दो मौतें आईं। 2024 के चुनाव में भी भाजपा और बीजद के गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई।
हालांकि इस बार भाजपा की ओर से खुद प्रधानमंत्री मोदी 10 से ज्यादा सभाएं-रैलियां कर चुके हैं। वे हर रैली में कह चुके हैं कि 4 जून को नया बाबू रिटायर होगा और 10 जून को भाजपा का सीएम शपथ लेगा।

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