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Assembly Election Exit Poll Result 2024 Update; Arunachal Pradesh Sikkim Andhra Pradesh Odisha | 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव का पोल ऑफ पोल्स: अरुणाचल और सिक्किम में कल काउंटिंग, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 4 जून को रिजल्ट

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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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कांग्रेस की 542 सीटों के साथ चार राज्यों- आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम विधानसभा के लिए मतदान खत्म हो चुका है।

175 सीटों वाले आंध्र प्रदेश में 13 मई, 147 सीटों वाले ओडिशा में चार चरणों- 13, 20, 25 और 1 जून को मतदान हुआ था। दोनों राज्यों में 4 जून को मतगणना होगी।

पूर्वोत्तर के दो राज्य-अफ्रीका प्रदेश की 60 में से 50 सीटों और सिक्किम की 32 विधानसभा सीटों के लिए 19 अप्रैल को मतदान हुआ था। दोनों राज्यों के नतीजे 2 जून को आएंगे।

आज शाम 7 बजे के बाद इन आसपास के राज्यों के एग्जिट पोल आएंगे। वह पहले यहां के राजनीतिक आधारों को समझ लेते हैं।

1. आंध्र प्रदेश विधानसभा

आंध्र प्रदेश विधानसभा में 175 मौतें हुई हैं। सरकार बनाने के लिए 88 विधायक चाहिए। राज्य में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में युवा श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की सरकार है। 2019 में जगन मोहन रेड्डी पहली बार राज्य के सीएम बने थे।

सीएम जगन मोहन के खिलाफ उनकी बहनें और उप राष्ट्रपति
मुख्यमंत्री जगन रेड्डी के खिलाफ एक तरफ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), जन सेना पार्टी (जेएसपी) और भाजपा गठबंधन है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस है। जगन रेड्डी के लिए पहली चुनौती टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू एम.डी.एम. हैं, जो तीन बार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

इस चुनाव में टीडीपी ने 175 सीटों से 144 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जन सेना 21 और भाजपा 10 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पीठापुरम सीट पर सबकी नजरें टिकी हैं। यहां से साउथ एक्टर और जेएसपी प्रमुख पवन कल्याण और फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा सामने आए हैं।

जगन रेड्डी की दूसरी चुनौती उनकी बहन वाई एस शर्मिला हैं, जो राज्य में कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। आंध्र प्रदेश में दशकों तक कांग्रेस की सरकार रही है। 1956 से 1983, 1989 से 1994 और 2004 से 2014 तक पार्टी सत्ता में रही।

भाई-बहन में बंटवारे हो सकते हैं कांग्रेस के पारंपरिक मतदाता ​​​​​
जगन मोहन रेड्डी के पिता वाई एस राजशेखर रेड्डी आंध्र कांग्रेस में बड़े नेता थे। 2004 और 2009 में वे लगातार दो बार राज्य के मुख्यमंत्री भी बने। जगन मोहन ने भी अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस से ही शुरू किया था। वे 2009 में कांग्रेस से पहली बार सांसद चुने गए।

हालांकि, 2009 में हेलीकाप्टर हादसे में पिता की मौत के बाद जगन रेड्डी ने 2010 में कांग्रेस सेरेस दे दिया। उन्होंने 2011 में अपनी अलग पार्टी वाईएसआरसीपी बनाई। 2014 में उनकी पार्टी ने 67 जान गंवाईं। 2019 में वाईएसआरसीपी ने 151 दलितों को चंका दिया था।

हालांकि, इस बार उनकी बहन कांग्रेस का नेतृत्व कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस के परंपरागत मतदाता भाई-बहन की पार्टी में हिस्सा ले सकते हैं। कांग्रेस के पास खतरे के लिए कुछ नहीं है। लेकिन, वाईएसआरसीपी के वोट कटने से इसका सीधा फायदा टीडीपी को होगा।

2. राधिकापुर विधानसभा

बीजेडी सत्ता में आएगी, तो नवीन पटनायक सीएम बनने का रिकॉर्ड तोड़ेंगे
ओडिशा विधानसभा में 147 मौतें हुई हैं। बहुमत के लिए 74 बीज चाहिए। राज्य में बीजू जनता दल (बीजद), भाजपा और कांग्रेस तीन प्रमुख हैं।

बीजेडी वर्ष 2000 से लगातार सत्ता में है। बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक 24 साल से मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 5 मार्च 2000 को पहली बार शपथ ली थी। तब से 2019 तक वे 5 बार से ओडिशा के सीएम हैं।

सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग (24 वर्ष और 165 दिन) के बाद नवीन पटनायक (24 वर्ष और 83 दिन) सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले देश के दूसरे नेता हैं।

ओडिशा विधानसभा का कार्यकाल जून के पहले सप्ताह में खत्म हो रहा है। अगर बीजद की सरकार बनती है और नवीन पटनायक मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वे सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेता बन सकते हैं।

बीजद-भाजपा ने दो बार गठबंधन में सरकार बनाई
भाजपा और बीजद दो विधानसभा चुनाव- 2000 और 2004 में एक साथ उतरे थे। उस समय बीजद, एनडीए की सबसे भरोसेमंद पार्टी मानी जाती थी। वर्ष 2000 में बीजद ने 68 और भाजपा ने 38 मौतें हुईं।

147 में से 106 सीटों के साथ दोनों दलों ने पहली बार गठबंधन की सरकार बनाई और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया। 2004 के चुनाव में भाजपा और बीजद ने कुल 93 मौतें हुईं। बहु सत्ता में आई।

बीजद ने 2009 में 11 साल का गठबंधन तोड़ा
2009 विधानसभा चुनाव से पहले बीजद ने भाजपा से 11 साल पुराने गठबंधन को तोड़ दिया। बीजद चाहती थी कि भाजपा विधानसभा चुनाव में 163 सीटों पर से 40 पर चुनाव लड़े, जबकि भाजपा 63 सीटों पर लडऩा चाहती थी।

2019 में BJD ने 112 लोगों की जान ले ली। भाजपा 23, कांग्रेस 9 और अन्य के खाते में दो मौतें आईं। 2024 के चुनाव में भी भाजपा और बीजद के गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई।

हालांकि इस बार भाजपा की ओर से खुद प्रधानमंत्री मोदी 10 से ज्यादा सभाएं-रैलियां कर चुके हैं। वे हर रैली में कह चुके हैं कि 4 जून को नया बाबू रिटायर होगा और 10 जून को भाजपा का सीएम शपथ लेगा।

3.अरण्य प्रदेश विधानसभा

भाजपा चुनाव से पहले ही 10 सीटें जीत चुकी
अरुणाचल प्रदेश में कुल 60 विधानसभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 31 सीटें चाहिए। राज्य में भाजपा, कांग्रेस, जनता दल-यूनाइटेड (जेडी-यू), पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) प्रमुख हैं। वे पीपीए और भाजपा गठबंधन में हैं।

राज्य में इस बार 60 में से 50 सीटों पर ही चुनाव हुए हैं। 10 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इसलिए इन रास्तों पर चुनाव नहीं हुए।

2019 में भाजपा ने 41 सीट वाले मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार बनाई थी। तब भाजपा राज्य में न सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी उभरी, बल्कि पहली बार बहुमत का आंकड़ा पार किया।

बाकी 19 नतीजों में जनता दल-यूनाइटेड (जेडी-यू) को 7, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) को 5, कांग्रेस को 4 और अन्य को 3 नतीजे मिले थे। 2024 विधानसभा चुनाव से पहले फरवरी में कांग्रेस और एनपीपी के 2-2 सीटों पर भाजपा शामिल हो गई थी।

2014 चुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक संकट आया
2014 के चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटों पर भारी बहुमत हासिल किया था। भाजपा को 11, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) को 5 और दो विधायक बीमार पड़े।

हालांकि, 2016 में अरुणाचल प्रदेश में लंबे समय के लिए सियासी संकट देखने को मिला। राज्य में एक वर्ष के भीतर चार बार मुख्यमंत्री बदले गए।

सबसे पहले दिसंबर 2015 में कांग्रेस के 42 में से 21 सांसदों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ बगावत की। इसके आधार पर राज्यपाल ने सीएम तुकी को बर्खास्त कर दिया। जनवरी 2016 के दौरान राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा।

भाजपा ने एक महीने के अंदर फरवरी में पीपुल्स पार्टी ऑफ चाइना (पीपीए) को समर्थन देकर कांग्रेस के बागी इलाकों के साथ सरकार बना ली। कांग्रेस के बागी गुट के नेता कालिखो पुल सीएम बने।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने नबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को फिर से बहाल कर दिया। 13 जुलाई को कांग्रेस सरकार बहाल हुई, लेकिन 16 जुलाई को कांग्रेस ने तुकी की जगह पेमा खांडू को विधायक दल का नेता चुन लिया।

पेमा खांडू को 44 एकड़ का समर्थन मिला। वे कांग्रेस की सरकार में राज्य के नए मुख्यमंत्री बनेंगे। हालांकि, 16 सितंबर 2016 को सीएम पेमा खांडू कांग्रेस के 42 विधायकों के साथ भाजपा की सहयोगी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) में शामिल हो गए।

21 दिसंबर को खांडू समेत 7 किसानों को पीपीए अध्यक्ष ने निलंबित कर दिया। दिसंबर 2016 में खांडू ने पीपीए के साथ 43 सीटों में से 33 सीटों को हटाकर भाजपा में शामिल हो गए और बहुमत साबित किया।

भाजपा के पहले से ही 11 विधायक थे। उन्होंने दो भिन्न धाराओं के समर्थन से आंकड़ा 46 कर लिया। पेमा खांडू अरुणाचल प्रदेश में भाजपा के दूसरे मुख्यमंत्री बने। उनसे पहले 2003 में 44 दिनों के लिए गेगोंग अपांग के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी।

4.सी. विधानसभा

सीम में 32 विधानसभा सीट है। बहुमत का आंकड़ा 17 है। राज्य में सिक्किम रिवोल्यूशनरी मोर्चा (एसकेएम), सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ), कांग्रेस और भाजपा प्रमुख शामिल हैं। खैर, यहां प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में पीएसीएम की सरकार है।

2019 विधानसभा चुनाव में एसकेएम को 17 सुराग मिले थे। एसडीएफ के खाते में 15 मौतें हुईं। भाजपा और कांग्रेस सरकार में अपना खाता भी नहीं खोला गया। हालांकि, 13 अगस्त 2019 को पूर्व सीएम पवन चामलिंग की पार्टी एसडीएफ के 15 में से 10 विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे।

पवन चामलिंग के पास सबसे लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) 1994 से लेकर 2019 तक लगातार 5 बार सत्ता में रही। पार्टी प्रमुख पवन चामलिंग लगातार 24 साल 166 दिन तक सीएम पद पर रहे।

वे देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले नेता हैं। सीम एकमात्र राज्य है, जिसने 1979 के बाद से सभी विधानसभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों को सत्ता सौंपी है।

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