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- लोकसभा चुनाव चरण 7 मतदान प्रतिशत लाइव अपडेट; नरेंद्र मोदी भाजपा कांग्रेस | एग्जिट पोल परिणाम 2024
नई दिल्ली21 मिनट पहले
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कांग्रेस चुनाव-2024 के सातवें और अंतिम चरण में शनिवार (1 जून) को 7 राज्यों और 1 केन्द्र शासित प्रदेश की 57 सीटों पर मतदान होना है।
2019 में इन सीटों में से सबसे ज्यादा भाजपा 25, टीएमसी 9, बीजद 4, जेडीयू और अपना दल (एस) 2-2, जेएमएम मुखिया 1 सीट जीती थी। कांग्रेस को सिर्फ पंजाब की 8 बुरी बातें पर जीत मिली थी।
इस चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 5 केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, अनुराग ठाकुर, अनुप्रिया पटेल, महेंद्र नाथ पांडे और पंकज चौधरी मैदान में हैं। 4अभिनेता- कंगना रनौत, रवि किशन, पवन सिंह, काजल निषाद भी चुनाव लड़ रहे हैं।
इनके अलावा ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी, अफजाल अंसारी, विक्रमादित्य सिंह भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार चुनाव के सातवें चरण में 904 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें 809 पुरुष और 95 महिला उम्मीदवार हैं।
इस फेज में सबसे अमीर पुरुष बठिंडा, पंजाब से उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल हैं। उनके पास 198 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
542 कांग्रेसी सीटों के लिए छठे फेज तक 485 सीटों पर मतदान हो चुका है। 1 जून को आखिरी 57 सीटों पर वोटिंग होगी।
गुजरात में सूरत से भाजपा के उम्मीदवार मुकेश दलाल निर्विरोध चुनाव जीत चुके हैं, इसलिए वोटिंग 542 उम्मीदवारों पर ही हो रही है।




199 उम्मीदवार आपराधिक मामलों में, 155 हत्या-अपहरण जैसे गंभीर अपराध में शामिल
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, 199 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं 155 उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिन पर हत्या, अपहरण जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। इनमें से 13 शिशुओं को किसी न किसी मामले में दोषी ठहराया गया है।
4 किलोग्राम पर हत्या और 21 पर हत्या की कोशिश के मामले दर्ज हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले 27 दर्ज हैं। 3 अपराधों के विरुद्ध सबूत (IPC-376) का केस दर्ज है। वहीं, 25 उम्मीदवारों पर शानदार भाषण देने का केस दर्ज है।

33% उम्मीदवार करोड़पति, भाजपा के सबसे ज्यादा 48
कांग्रेस चुनाव के सातवें चरण में 904 सीटों पर 33 फीसदी यानी 299 करोड़पति हैं। इन उम्मीदवारों के पास औसत संपत्ति 3.27 करोड़ रुपये है। सबसे ज्यादा भाजपा के 44 उम्मीदवार करोड़पति हैं। बठिंडा, पंजाब से उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। उनके पास 198 करोड़ की संपत्ति है।
लिस्ट में दूसरा नाम ओडिशा से भाजपा उम्मीदवार बियंत पांडा (148 करोड़ रुपए) और तीसरा नाम चंडीगढ़ से भाजपा उम्मीदवार संजय टंडन (111 करोड़ रुपए) का है। शिरोमणि अकाली दल के सभी 13, आम आदमी पार्टी के सभी 13, बीजू जनता दल के सभी 6 उम्मीदवार करोड़पति हैं। सपा के 9, टीएमसी के 8, कांग्रेस के 30 और सीपीआई-एम के 4 उम्मीदवारों की संपत्ति एक करोड़ या उससे ज्यादा है।
ओडिशा के जगतसिंहपुर से उत्कल समाज की उम्मीदवार भानुमती दास का नाम सबसे कम संपत्ति वाले पूर्वजों में से एक है। उनकी संपत्ति करीब 1500 रुपए की है। इनके अलावा पंजाब के लुधियाना से जनसेवा चालक पार्टी के राजीव कुमार मेहरा और पश्चिम बंगाल के जादवपुर से वैलेंटाइन उम्मीदवार बलराम मंडल के पास 2500 रुपये की कुल संपत्ति है।

सातवें चरण में 6 केंद्रीय मंत्री, एक पूर्व मुख्यमंत्री और 4 अभिनेता चुनाव लड़ रहे हैं…

सातवें चरण की हॉट तस्वीरें, जिन पर रहेंगी नजर…
1. वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी सबसे वीआईपी सीट है। पीएम मोदी पिछले 10 साल से यहां के सांसद हैं। तीसरी बार उनकी नजर बहुत बड़े अंतर से जीत हासिल करने पर है। इस बार यहां से केवल 6 उम्मीदवार ही पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हैं। शुरुआत में 141 मौतें हुईं। एक ने वापस ले लिया। बाकियों में से केवल 7 ही स्क्रूटनी में पास हो सके।
कांग्रेस-सपा और इंडी गठबंधन की तरफ से अजय राय ही लड़ाई में हैं, लेकिन पिछले तीनों चुनावों में वे बड़े अंतर से हारे हैं।
2. मंडी, हिमाचल प्रदेश

राज्य के 6 बार के सीएम रहे वीरभद्र सिंह और मंडी संसदीय सीट से मौजूदा सांसद प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह मौजूदा विधायक हैं। विक्रमादित्य, सुखू कैबिनेट में मंत्री भी हैं। भाजपा ने कंगना रनोट को टिकट दिया है। कंगना रनौत भले ही बॉलीवुड की क्वीन हैं, लेकिन उनके पक्ष में उनके बॉलीवुड स्टारडम, राजपूत-ब्राह्मण और भाजपा को मिलने वाले वोट भी जा सकते हैं।
कंगना को टिकट देने का फैसला हाईकमान का था, ऐसे में कुछ भाजपा नेता इससे खफा भी हैं। इनमें से एक दिनेश भाटी पार्टी सिवाय कंगना के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं।
3. गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

गाजीपुर सीट पर अफजाल अंसारी का मुकाबला पारसनाथ से नहीं बल्कि सीधी भाजपा से है, क्योंकि पारसनाथ राय की राजनीति में कोई अनुभवी खिलाड़ी नहीं है, इसलिए यहां प्रचार करने के लिए कई राज्यों के सीएम समेत खुद पीएम मोदी पहुंचे थे। इस सीट पर डॉ. सुरेश कुमारचयनिक ताल ठोक रहे हैं। वहीं बात अगर अफजल की करें तो मुख्तार अंसारी की मौत के बाद गाजीपुर की सियासत में बदलाव आया है। मुख्तार की मौत की सहानुभूति वोट के तौर पर अफजाल पत्रकार को मिल सकती है।
4. गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

गोरखपुर सीट पर डॉक्टर सामने आए हैं। रवि किशन यहां दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं तो काजल भी पहली बार कांग्रेस के चुनावी मैदान में उतरी हैं। काजल ने अपना पॉलिटिकल करियर कांग्रेस के साथ 2012 में शुरू किया था। इसके बाद वे विधानसभा में सपा के टिकट और मेयर का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों ही चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली है।
रवि किशन मौजूदा सांसद के साथ-साथ सीएम योगी की पुरानी सीट को बाकायदा संभाल रहे हैं। इस बार भी उन्हें योगी के नाम पर वोट मिल सकता है।
5. हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

इस बार के लोकसभा चुनाव के लिए हमीरपुर सीट पर माहौल गर्म है। यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। भाजपा ने यहां 12 में से 10 चुनाव जीते हैं। यहां से केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा उम्मीदवार अनुराग ठाकुर जीत का चौका पहले ही लगा चुके हैं। अब पार्टी ने उन्हें यहां से पांचवीं बार उम्मीदवार बनाया है।
जबकि कांग्रेस ने इस बार ऊना से आने वाले पूर्व विधायक सतपाल रायजादा को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की साख भी दांव पर है।
6. डायमंड हार्बर, पश्चिम बंगाल

ममता के भतीजे और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी की जीत की राह यहां आसान लग रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां की जनता का मानना है कि भाजपा ने अभिषेक के मुकाबले में काफी कमजोर उम्मीदवार अभिजीत दास को टिकट दिया है। अभिजीत 2019 और 2009 में भी कांग्रेस चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं सके।
बात अगर अभिषेक की करें तो उन्हें पार्टी और बंगाल के राजनीतिक हलकों में निर्विवाद तौर पर ममता का उत्तराधिकारी मान लिया गया है। इन दोनों के अलावा कांग्रेस से अलायंस के तहत यहां सीपीएम ने एक छात्र नेता सिंबल उर रहमान को टिकट दिया है।
7. मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश

अनुप्रिया तीसरी बार सांसद बनने के लिए मैदान में हैं। एनडीए की तरफ से चुनाव में उतरी अनुप्रिया का दावा है कि उन्हें यूपी में वशंज, मौर्य, निषाद, पाल और सैनी का समर्थन मिला है। इधर, अनुप्रिया के खिलाफ एसपी ने रमेश बिंद को टिकट दिया है।
6 महीने पहले ही सपा में आए बिंद ने 2019 में भाजपा की टिकट पर भदोही से जीत हासिल की थी। सपा ने बीएनडी को टिकट देकर और लाखों वोट पाने की कोशिश की है।
8. बठिंडा, पंजाब

हरसिमरत कौर बादल इस सीट से लगातार चौथी बार चुनावी मैदान में हैं। इसे शिरोमणि अकाली दल का गढ़ माना जाता है। हरसिमरत के ससुर प्रकाश सिंह बादल यहां से 5 बार मुख्यमंत्री रहे। हरसिमरत खुद इस सीट पर 2009 से जीत रही हैं। 2019 में उन्होंने कांग्रेस के राजा वडिंग को हरा दिया था। इस बार भी उनकी कोशिश सीट अपने पास रखने की है। हरसिमरत के खिलाफ इस बार भाजपा ने अपना उम्मीदवार पूर्व आईएएस पर उतारा है।
9. गोदडा, झारखंड

गोड्डा सीट पर तीन बार के सांसद निशिकांत दुबे चौथी बार मैदान में हैं। कांग्रेस ने उनके खिलाफ दीपिका पांडे को टिकट दिया। लेकिन बाद में उनकी जगह प्रदीप यादव को लांच किया गया। प्रदीप 2019 में भी निशिकांत के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
इसके अलावा वैष्णव उम्मीदवार अभिषेक झा के मैदान में आने और एआईएमआईएम उम्मीदवार मोहम्मद मंसूर के मैदान सेअलावा से इस सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
10. कराकट, बिहार

बिहार की सबसे चर्चित सीट है काराकाट। इस सीट पर भाजपा से बागी हुए भोजपुरी स्टार पवन सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। काराकाट सीट से एनडीए के उपेंद्र सिंह और इंडीज एलायंस के राजाराम यादव चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन पवन सिंह ने मैदान में उतरकर इस मुकाबले को ट्राइंगल बना दिया है।
11। पाटलिपुत्र, बिहार

पाटलिपुत्र सीट से राजद प्रमुख लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती चुनावी मैदान में तीसरी बार उतरी हैं। मीसा भारती का मुकाबला सीधे तौर पर उनके मुंहबोले चाचा और भाजपा उम्मीदवार राम कृपाल यादव से है।
रामकृपाल पहले लालू प्रसाद के करीबी थे, 2014 चुनाव से ठीक पहले आरजेडी से टिकट मिलने पर बीजेपी का दमन थाम लिया गया था। इसके बाद वे मीसा को ही हराकर संसद पहुंचे थे।
12. खडूर साहिब, पंजाब

पंजाब की खडूर साहिब को राजनीतिक गलियारों में पंथक सीट के नाम से जाना जाता है। खडूर साहिब लोकसभा सीट पर पूरे देश का ध्यान गया है। यह सीट शिरोमणि अकाली दल के गढ़ों में से एक है। अमृतपाल सिंह के चुनाव लड़ने के वादे से पूरा समीकरण ही बदल गया है।
अब यहां पंचकोणीय मुकाबला हो गया है। यानी शिरोमणि अकाली दल के विरसा सिंह वल्टोआ, आम आदमी पार्टी के लालजीत सिंह भुल्लर, कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा और भाजपा के मंजीत सिंह मियांविंद मैदान में हैं।
13. दुमका, झारखंड

दुमका में गतिशील पर्यावरण गरम है। इसकी वजह है झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन की बगावत। चुनाव की घोषणा के 3 दिन बाद पारिवारिक पार्टी से 15 साल पुराना नाता तोड़कर भाजपा में चली गई। इसके 5 दिन बाद भाजपा ने पहले से उम्मीदवार और मौजूदा सांसद सुनील सोरेन का नाम काट कर सीता सोरेन को टिकट दे दिया।
उधर, झामुमो ने 45 साल में पहली बार परिवार से बाहर शिकारपाड़ा के 7 बार से विधायक नलिन सोरेन को भाजपा को चुनौती दे दी है।
14. पटना साहिब, बिहार

पटना साहिब सीट पर पिछले चुनाव में उम्मीदवारों के चेहरे बदल गए, लेकिन सीट भाजपा के ही पास रही। 2009 और 2014 में भाजपा नेता शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव जीते थे। 2019 में पार्टी ने रविशंकर प्रसाद को मैदान में उतारा। वे भी जीत गए।
रविशंकर के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता डॉ. अंशुल अविजित मैदान में हैं। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के बेटे हैं। विदेश से पढ़ाई की और अब राजनीति में आ रहे हैं।
15. आरा, बिहार

आरा सीट पर भी एनडीए और इंडी गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। एनडीए ने मौजूदा सांसद आर के सिंह को फिर से मैदान में उतारा है तो वर्तमान की ओर से सीपीआई-एम के सुदामा प्रसाद हैं। सुदामा तरारी विधानसभा सीट से विधायक भी हैं। इस बार जातीय समीकरण को मजबूत करने के लिए पार्टी ने वैश्य वर्ग के विधायक सुदामा प्रसाद पर दांव लगाया है।
16. जालंधर, पंजाब

जालंधर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और तीन दल-बदलू किसानों के बीच दिलचस्प मुकाबला है। कांग्रेस ने अपना गढ़ कही जाने वाली जालंधर कांग्रेस सीट से दलित नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को मैदान में उतारा है।
भाजपा ने वर्तमान सांसद सुशील कुमार मोदी पर दांव लगाया है। रिंकू को आपने पहले अपना उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया और जालंधर सीट से नामांकन दाखिल कर दिया। रिंकू पिछले साल कांग्रेस को छोड़कर आप में शामिल हुए थे।
17. देवरिया, यूपी

भाजपा के पास लगातार जीत की हैट्रिक का मौका है। भाजपा ने शशांक मणि त्रिपाठी को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने अखिलेश प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाया है। जबकि बहुजन समाज पार्टी ने संदेश दिया है कि यादव श्री को मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस इस सीट पर 40 साल से जीत की तलाश में है।
18. महाराजगंज, उत्तर प्रदेश

महाराजगंज में भाजपा और भारत गठबंधन की सीधी लड़ाई है। केंद्र सरकार में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी 9वीं बार बीजेपी के टिकट से चुनावी मैदान में उतरे हैं। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट से फरेंदा से विधायक चुने गए रवि चौधरी पर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेलते हुए कांग्रेस का टिकट दिया है।
यहां कुर्मी वोटर काफी संख्या में है। पंकज चौधरी को पूरा समर्थन मिल रहा है। वहीं कांग्रेस प्रमुख राधा चौधरी के चुनाव लड़ने से कुर्मी मतों में बंटवारा होना तय माना जा रहा है।
19. चंदौली, उत्तर प्रदेश

भारी उद्योग केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडे इस सीट पर हैट्रिक लगाने की कोशिश में हैं। समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर प्रदेश के पूर्व मंत्री राधा सिंह को कोचला अखाड़े में उतारा है। जबकि बहुजन समाज पार्टी ने यहां पर सत्येंद्र कुमार मौर्य को अपना नाम बनाया है। लेकिन असली मुकाबला भाजपा और सपा के बीच है।

ओडिशा में विधानसभा की 42 सीटों पर भी मतदान
ओडिशा में शनिवार (1 जून) को 42 विधानसभा सीटों पर भी मतदान होगा। 147 विधानसभा सीटों पर चार चरणों में चुनाव हुए हैं। 13 मई को 28, 20 मई को 63, 25 मई को 42 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। बाकी 42 सीटों पर वोटिंग होगी। कांग्रेस पार्टी की मतगणना 4 जून को होगी।
ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद), भाजपा, कांग्रेस और सीपीआई (एम) प्रमुख हैं। राज्य में अभी सीएम नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजद की सरकार है। वो 5 मार्च 2000 से लगातार सीएम हैं। पटनायक सीएम पद पर रहने वाले देश के दूसरे सबसे बड़े नेता हैं। वे 24 साल से लगातार पद पर हैं। उनसे आगे सिक्किम के पूर्व सीएम पवन चामलिंग हैं, जो 24 साल 166 दिन तक सीएम पद पर रहे।
ओडिशा में 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजद ने 147 में से 113 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को 23, कांग्रेस को 9, सीपीआई (एम) और चुनाव को 1-1 सीटें मिलीं।
लोकसभा चुनाव 7 फेज में, नतीजे 4 जून को आएंगे

देश की 543 सीटों के लिए चुनाव सात चरणों में होगा। पहले फेज की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी और आखिरी फेज की वोटिंग 1 जून को होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। चुनाव आयोग ने लोकसभा के साथ 4 राज्यों- आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनाव की तारीखें भी जारी की हैं। ओडिशा में 13 मई, 20 मई, 25 मई और 1 जून को वोटिंग होगी। पूरी खबर पढ़ें…
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