श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। मथुरा कोर्ट में दाखिल 18 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की।
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माना जा रहा है कि गर्मी की छुट्टियों के बाद उच्चायोग अपना फैसला सुन सकता है। मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को श्रीकृष्ण मंदिर ट्रस्ट को सौंपने और पूजा की मांग करने वाली याचिकाओं में मथुरा कोर्ट में दाखिल की गई।

18 पर्चे की एक साथ हुई सुनवाई
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सभी 18 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। हिंदू पक्ष की तरफ से दाखिल 18 याचिकाओं को शाही ईदगाह कमेटी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में आदेश 7, नियम 11 के तहत चुनौती दी है। शाहीन बाग कोर्ट के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान कहा कि मथुरा कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई उचित नहीं है।
मामला पूजा स्थल अधिनियम 1991 और वक्फ अधिनियम के साथ परिसीमन अधिनियम से बाधित है। इसलिए इस मामले में कोई भी याचिका न तो दायर की जा सकती है और न ही उसे सुना जा सकता है।
मंदिर के पक्ष से सुप्रीम कोर्ट में पेश वकीलों ने कहा- इस प्रकरण में न तो पूजा स्थल अधिनियम का कानून और न ही वक्फ बोर्ड कानून लागू होता है। मंदिर के पक्ष में वकीलों के अनुसार शाही ईदगाह परिसर जिस स्थान पर मौजूद है वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि की जमीन है। समझौते के तहत मंदिर की जमीन को शाही ईदगाह समिति को दी गई है। जो नियमों के खिलाफ है।
29 दिन की सुनवाई में सभी पक्षियों को सुनने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा है। अब यह तय करना है कि जो वाड मथुरा कोर्ट में दाखिल है, वह सुनवाई योग्य है या नहीं।
अगर सुप्रीम कोर्ट याचिका को सुनने लायक माना जाए तो हिंदू पक्ष की बड़ी जीत होगी। अयोध्या की पंक्तियों पर मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रसंग में भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ऐतिहासिक सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय आदेश 7 नियम 11 के तहत वाद को सुनवाई योग्य नहीं माना जाएगा तो यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में होगा।

ईदगाह मस्जिद वर्ष 1670 में औरगंजेब ने बनवाई थी। मुहम्मदों ने दावा किया है कि मस्जिद को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनाया गया है। वह इसे वहां से हटाने की मांग करता है।
जवाब दिया वकीलों
मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा- विभिन्न याचिकाओं में सभी वकीलों और पैगंबरों ने बहस की। उसका उत्तर देना जरूरी है। वाद संख्या 5 व 6 में याचिका की बहस का जवाब याचिका संख्या 17 की सुनवाई के समय दिया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव सहित 18 नागरिक वादों की सुनवाई कर रहे हैं।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था
5 घंटे तक सुनवाई चली। इस दौरान शाही ईदगाह कमेटी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। वकीलों ने मांग की कि मथुरा कोर्ट में दाखिल याचिका को खारिज कर दिया जाए। हिंदू पक्षकारों के वकीलों ने इसका विरोध किया। अदालत ने फिर 30 मई को सुनवाई का आदेश दिया था।
हिंदू पक्ष ने कई याचिका पर बहस पूरी की थी
30 मई को हुई सुनवाई में हिंदू पक्ष ने अपनी बहस पूरी की थी। इसके बाद आज मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलील पेश की। अभी तक की सुनवाई में हिंदू पक्ष मामले को राम जन्मभूमि की तर्ज पर सुनवाई आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है। जबकि मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि मामले में आगे की सुनवाई नहीं हो रही है। मुस्लिम पक्ष रिकॉर्ड की पोषणीयता, वर्शिप अधिनियम 1991, परिसीमन अधिनियम, वक्फ अधिनियम आदि बिंदुओं पर अपनी बात रखी गई।

