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Iran US Tension Live News: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत फेल हो गई. इस बातचीत से दुनिया को कोई फायदा नहीं हुआ. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बात की. इसमें उन्…और पढ़ें
Iran US Tension Live News: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता भले ही बिना किसी समझौते के खत्म हो गई हो, लेकिन अब दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ तौर पर इस वार्ता के टूटने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका के ‘डबल स्टैंडर्ड’ और ‘तानाशाही रवैये’ के कारण ही कोई निष्पक्ष समझौता नहीं हो सका. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान एक ‘संतुलित और न्यायसंगत समझौते’ के लिए पूरी तरह तैयार है, जो क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित कर सके, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करे.
यह बयान उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत के दौरान दिया. इस बातचीत में दोनों नेताओं ने इस्लामाबाद वार्ता के बाद के हालात और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा की. पुतिन ने भी पश्चिमी देशों के ‘डबल स्टैंडर्ड’ की आलोचना की और ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया. उन्होंने ईरान की उस मांग को भी सही ठहराया, जिसमें हालिया हमलों से हुए नुकसान की भरपाई और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी की बात कही गई है.
किन मुद्दों पर नहीं बनी बात?
इस्लामाबाद में हुई यह वार्ता पिछले कई दशकों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे उच्च स्तर की सीधी बातचीत थी, लेकिन इसके बावजूद कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण और ईरान के यूरेनियम संवर्धन (न्यूक्लियर प्रोग्राम) को लेकर दोनों पक्षों में गहरा मतभेद बना रहा.
समझौते के बेहद करीब थे
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान ने ‘पूरी ईमानदारी’ से बातचीत की, लेकिन जब समझौता करीब था, तब अमेरिका ने अपनी शर्तें बदल दीं और दबाव बनाने की कोशिश की. उन्होंने कहा, ‘जहां सद्भाव होता है, वहां सकारात्मक जवाब मिलता है, लेकिन दुश्मनी का जवाब दुश्मनी ही होता है.’
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अहम बात यह भी है कि बातचीत विफल होने के बावजूद हालात तुरंत युद्ध की ओर नहीं बढ़े हैं. दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का सीजफायर अभी भी लागू है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार कूटनीति के रास्ते को जारी रखने की अपील कर रहा है. फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 3,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग पर भी इसका सीधा असर पड़ा है. ईरान ने इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है.





