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- पुणे पोर्श कार दुर्घटना; विशाल अग्रवाल पुत्र | डॉक्टर अजय टावरे विवाद
पुणेकुछ ही क्षण पहले
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ससून अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ तावरे, चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ श्रीहरि हलनोर और स्टाफ अतुल घाटकांबले को ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में 27 मई को गिरफ्तार किया गया था।
पुणे पोर्श कार हादसे में नाबालिग ब्लड सैंपल बदलने के आरोपी डॉक्टर अजय टावरे और श्रीहरि हलनोर को सस्पेंड कर दिया गया है। डॉ. तावरे ससून सिविल अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख और डॉ. हलनोर चीफ मेडिकल ऑफिसर थे।
अस्पताल के डीन डॉ विनायक काले को छुट्टी पर भेज दिया गया है। उनकी जगह डॉ. चंद्रकांत महसके को अतिरिक्त श्रेय दिया गया है। डॉ. चंद्रकांत पुणे के बारामती स्थित पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी सरकारी मेडिकल कॉलेज में डीन हैं।
डॉ. तावरे, डॉ. हलनोर और एक स्टाफ अतुल घाटकांबले को 27 मई को गिरफ्तार कर लिया गया था। तीनों 30 मई तक पुलिस हिरासत में हैं। तीनों ने नाबालिग लड़की के ब्लड सैंपल को डस्टबिन में फेंक दिया था। इसके बाद किसी और के रक्त नमूने के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें शराब का अंश नहीं था।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने बुधवार 29 मई को बताया कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के ब्लड सैंपल में हेरफेर की जांच के लिए तीन स्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति ने राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसके आधार पर लोगों को सस्पेंड किया गया है।
जेजेई ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के डीन डॉ. पल्लवी सपले समिति की अध्यक्षता कर रही हैं। इसके अलावा ग्रांट मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. गजानन चव्हाण एवं छत्रपति संभाजी नगर सरकारी मेडिकल कॉलेज के विशेष ड्यूटी अधिकारी डॉ. श्री चौधरी इसके सदस्य हैं।
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 18-19 मई की रात 17 साल के एक लड़के ने आईटी सेक्टर में काम करने वाली बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौत हो गई। घटना के 15 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड ने सकारात्मक परिणाम को 7 प्रतिशत पर जमानत दे दी।

डॉ. अजय टावरे और श्रीहरि हलनोर को 27 मई को गिरफ्तार किया गया था।
डॉ तावरे ने ब्लडडुअल बदलने का विचार दिया था
पुलिस ने मंगलवार 28 मई को बताया था कि ब्लड सैंपल बदलने का आइडिया डॉ. तावरे का था। घटना के बाद 19 मई को नाबालिग लड़की के पिता विशाल अग्रवाल और डॉ टावरे के बीच 14 बार फोन पर बातचीत हुई थी। विशाल ने अपने बेटे को बचाने के लिए डॉक्टर से मदद मांगी।
पुलिस के अनुसार, रक्त नमूना बदला जा सकता है, यह कोई और सोच नहीं सकता था। यह डॉ टावरे का ही विचार था। उसने ‘पावड़ा’ का ब्लड सैंपल किसी और से बदल दिया, ताकि जांच में शराब पीने की बात सामने न आए।
जांच में पता चला है कि ब्लड सैंपल बदलने के लिए डॉ. तावरे ने डॉ. हलनोर और घाटकांबले को 3 लाख रुपए दिए गए। डॉ. तावरे ने ये रुपये अपनी जेब से दिए या किसी और से लेकर दिए, इसकी जांच की जा रही है। साथ ही साथ उसके रक्त नमूने का रक्त नमूने से बदला गया, यह भी पता लगाया जा रहा है।
जुवेनाइल बोर्ड मेंबर्स के खिलाफ जांच के आदेश
महाराष्ट्र सरकार ने नाबालिगों को जमानत देने वाले किशोर न्याय बोर्ड के तीन सदस्यों के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए 5 सदस्यों की एक समिति बनाई गई है, जो यह जांच करेगी कि बोर्ड सदस्यों ने जमानत देते समय तय नियमों का पालन किया या नहीं। समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट दी जाएगी।
बोर्ड ने छवियों को निबंध लिखने के लिए कहा था

बोर्ड ने सड़क पर आदर्श सड़क बनाने पर 300 शब्दों का निबंध लिखा, जिसमें 15 दिनों तक यातायात पुलिस के साथ काम करने और शराब पीने की आदत के लिए परामर्श देने को कहा गया। बोर्ड के फैसले के खिलाफ पुणे पुलिस सत्र कोर्ट पहुंची।
पुलिस का कहना था कि नाबालिग लड़की पर बलिग की तरह कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उसका अपराध गंभीर है। सेशन कोर्ट ने पुलिस को बोर्ड में समीक्षा याचिका देने को कहा। 22 मई को जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को फिर से तलब किया और उसे 5 जून तक बाल सुधारने के लिए घर भेज दिया।
इस मामले में नाबालिग के पिता, दादा, नाबालिग की मेडिकल जांच करने वाले डॉक्टरों और उसे शराब पिलाने वाले दो पब के मालिक-मैनेजर सहित 10 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है। नाबालिग के पिता को 21 मई और दादा को 25 मई को गिरफ्तार किया गया था।

