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ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने अमेरिकी नौसेना को रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. अब ट्रंप आर्मी का फोकस महंगे हथियारों के बजाय सस्ते और घातक हाइपरसोनिक हथियारों पर है. नया FLASH प्रोग्राम महंगे मैटेरियल की जगह उन्नत एरोडायनामिक्स और किफायती तकनीक का उपयोग करेगा. इसका उद्देश्य कम लागत में ऐसी मिसाइलें बनाना है जो मौजूदा नौसैनिक जहाजों से लॉन्च हो सकें और दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को आसानी से ध्वस्त कर सकें.
अमेरिका आर्मी अपनी रणनीति बदल रही है.
वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध की बदलती रणनीतियों ने अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों को अपनी ताकत पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. युद्ध के मैदान में जिस तरह से लागत और मारक क्षमता का असंतुलन देखा गया उसने ट्रंप आर्मी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या अरबों डॉलर के महंगे हथियार भविष्य की जंग जीत पाएंगे? इसी सबक को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने अब एक ऐसे मिशन पर काम शुरू किया है, जो न केवल दुश्मन के पसीने छुड़ाएगा बल्कि अमेरिकी खजाने पर भी भारी नहीं पड़ेगा.
10 अप्रैल 2026 को ऑफिस ऑफ नेवल रिसर्च (ONR) ने ‘FLASH’ यानी फ्लाइट एडवांसमेंट ऑफ स्टक्चर्स फॉर हाइपरसोनिक्स कार्यक्रम का औपचारिक ऐलान किया है. यह कदम सीधे तौर पर ईरान जैसे विरोधियों के खिलाफ एक अफोर्डेबल लेकिन घातक ढाल तैयार करने की अमेरिकी कोशिश है.
फ्लैश हथियारों पर फोकस
अमेरिकी नौसेना का यह नया हथियार केवल रफ्तार का खेल नहीं है बल्कि यह बजट और मारक क्षमता का अनूठा संगम है:
• महंगे मटेरियल से तौबा: अब तक हाइपरसोनिक मिसाइलें दुर्लभ और महंगे मटेरियल से बनती थीं. FLASH प्रोग्राम का फोकस ऐसे पारंपरिक और सस्ते मटेरियल पर है जो आसानी से उपलब्ध हों.
• मौजूदा सिस्टम में फिट: इसे अलग से लॉन्च पैड की जरूरत नहीं होगी. यह नौसेना के वर्तमान वर्टिकल लॉन्य सिस्टम (VLS) और वर्जीनिया क्लास सबमरीन के पेलोड मॉड्यूल के साथ पूरी तरह फिट बैठेगा.
• मारक क्षमता और रफ्तार: मच 5 (आवाज की गति से 5 गुना तेज) से अधिक की रफ्तार पर यह दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए उन्नत एरोडायनामिक्स का इस्तेमाल करेगा.
• व्यावसायिक तकनीक का उपयोग: मिसाइल के गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम के लिए बाजार में उपलब्ध (Commercial-off-the-shelf) तकनीक का इस्तेमाल होगा ताकि विकास का खर्च कम किया जा सके.
सवाल-जवाब
ईरान वार से अमेरिका ने क्या सबक लिया?
ईरान और उसके समर्थित समूहों के साथ संघर्ष में अमेरिका ने महसूस किया कि महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम के जरिए सस्ते ड्रोन्स और मिसाइलों को रोकना आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है. इसीलिए अब अमेरिका ‘लो-कॉस्ट’ हाइपरसोनिक हथियारों पर ध्यान दे रहा है, जो कम खर्च में दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर सकें.
FLASH प्रोग्राम अन्य हाइपरसोनिक मिसाइलों से अलग कैसे है?
जहां पुरानी हाइपरसोनिक मिसाइलें अपनी बनावट के लिए दुर्लभ धातुओं पर निर्भर थीं, FLASH उन्नत एरोडायनामिक डिजाइन और सस्ते मैटेरियल्स पर जोर देता है. इसका उद्देश्य सस्ती मारक क्षमता (Affordable Lethality) हासिल करना है ताकि इन्हें युद्ध के समय बड़ी संख्या में बनाया जा सके.
इस प्रोजेक्ट की समयसीमा क्या है?
अमेरिकी नौसेना ने कंपनियों से 17 अगस्त 2026 तक प्रस्ताव मांगे हैं. इस प्रोजेक्ट के कॉन्ट्रैक्ट्स जनवरी 2027 तक दिए जाने की उम्मीद है. मई 2026 में इसके लिए एक बड़ी इंडस्ट्री मीटिंग भी बुलाई गई है.
क्या ‘अफोर्डेबल’ हथियारों से बदलेगी जंग की परिभाषा?
ईरान के साथ युद्ध की आहट ने पेंटागन को यह समझा दिया है कि भविष्य की जंग केवल तकनीक की नहीं बल्कि सस्टेनेबिलिटी की होगी. अगर एक मिसाइल की कीमत 100 मिलियन डॉलर है तो आप उसे हर छोटे लक्ष्य पर नहीं दाग सकते. FLASH प्रोग्राम का उद्देश्य ऐसी मिसाइलें बनाना जो इतनी सस्ती हों कि उन्हें थोक के भाव इस्तेमाल किया जा सके. उन्नत एरोडायनामिक्स के जरिए यह मिसाइल हवा के घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी को झेल लेगी, बिना किसी महंगे स्पेशल कोटिंग के. यह सीधे तौर पर उन देशों के लिए चेतावनी है जो अपनी एंटी-एक्सेस (A2/AD) रणनीति के जरिए अमेरिकी जहाजों को रोकना चाहते हैं. अमेरिका अब महंगे हथियारों के बजाय स्मार्ट और सस्ते हथियारों से दुनिया पर अपनी धाक जमाने की तैयारी में है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें





