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Pune Porsche Car Accident; Vedant Agarwal Blood Group Controversy | Pune News | पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस- दो डॉक्टर गिरफ्तार: नाबालिग आरोपी के ब्लड सैंपल बदलने का आरोप; दादा-पिता समेत अब तक कुल 9 लोग अरेस्ट

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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18 मई की रात को एक्सीडेंट के बाद राहगीरों ने एमएफ को पीटा था। एक्सीडेंट में दो लोगों की मौत हुई थी।  - दैनिक भास्कर

18 मई की रात को एक्सीडेंट के बाद राहगीरों ने एमएफ को पीटा था। एक्सीडेंट में दो लोगों की मौत हुई थी।

पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस में क्राइम ब्रांच ने दो डॉक्टरों को सोमवार (27 मई) सुबह गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि ससून जनरल अस्पताल के फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. अजय टावरे और डॉ. श्रीहरि हरलोर पर अल्पसंख्यक स्वरूप के ब्लडसम्प्ल से हेरफेर का आरोप है।

पुलिस ने बताया कि नाबालिगों का दो बार एल्कोहॉल ब्लड टेस्ट कराया गया था। इसमें पहले सैंपल की रिपोर्ट सामने आई थी, लेकिन दूसरे टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दूसरे टेस्ट में पाया गया कि मॉडल के ब्लड में एल्कोहॉल है।

दोनों डॉक्टरों से पुलिस पूछताछ कर रही है। दोनों को आज दोपहर शिवाजीनगर कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस कमिश्नर मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे, जिसमें कुछ और नए खुलासे हो सकते हैं।

18 मई को पुणे के कल्याणी नगर में नाबालिग ने शराब के नशे में बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मार दी थी, जिसमें दोनों की मौके पर मौत हो गई थी। इस मामले में मूर्ति के दादा, पिता और 2 रिश्तेदारों सहित अब तक कुल 9 गिलाहियां हो चुकी हैं।

इनमें पब के मालिक, 2 मैनेजर और 2 स्टाफ भी शामिल हैं। उनकी पहचान कोजी रेस्टोरेंट के मालिक प्रहलाद भूतड़ा, उनके मैनेजर सचिन कटड़ा, ब्लैक क्लब होटल के मैनेजर संदीप सांगले और उनके स्टाफ जयेश बोनकर और नितेश शेवानी शामिल हैं। इन सब पर नाबालिगों को शराब पिलाने का आरोप है।

तस्वीर ससून जनरल हॉस्पिटल के फोरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड डॉ.  अजय टावरे की है।

तस्वीर ससून जनरल हॉस्पिटल के फोरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अजय टावरे की है।

पुलिस बोली- दादा को बचाने के लिए ड्राइवर को पकड़ कर रखा
क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने बताया था कि ड्राइवर को फंसाने की नाबालिग के पिता और दादा ने साथ में रची थी। ड्राइवर की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 365 (गलत तरीके से कैद करने के इरादे से अपहरण करना) और 368 (गलत तरीके से छिपाना या कैद में रखना) के तहत मामला दर्ज किया है। पिता विशाल अग्रवाल को पुलिस ने 21 मई को गिरफ्तार किया था। दादा को 25 मई को गिरफ्तार कर लिया गया। वह 28 मई तक पुलिस हिरासत में है।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, 18-19 मई की रात दुर्घटना के बाद दादा और पिता ने नाबालिग को बचाने के लिए ड्राइवर को फंसाने की योजना बनाई थी। 42 वर्षीय ड्राइवर ने पुलिस को अपने बयान में बताया कि घटना के तुरंत बाद मुझे सुरेंद्र अग्रवाल का फोन आया। वह फोन पर पहले चिल्लाए। फिर अपनी BMW कार में जबरदस्त जीत हासिल कर मैं अपने बंगले ले गया। वहां 19-20 मई तक कब्जा रखा गया।

ड्राइवर के मुताबिक, नाबालिग के पिता और दादा ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया था। उन्होंने दुर्घटना का नतीजा लेने के लिए पैसे का लालच दिया और कहा कि वे उसे जल्दी ही जेल से निकाल देंगे। दोनों ने धमकी भी दी और कहा कि इस बारे में किसी से बात की तो याद रखना। मेरी पत्नी ने मुझे छुड़ाया।

पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट 25 मई को ड्राइवर के साथ नाबालिग आरोपी के घर पहुंची।

पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट 25 मई को ड्राइवर के साथ नाबालिग आरोपी के घर पहुंची।

पुलिस कमिश्नर बोले- नाबालिग ही गाड़ी चला रहा था
पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने शनिवार (25 मई) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ड्राइवर ने बताया था कि वह कार चला रहा था। हालाँकि, बाद में पुष्टि हुई कि नाबालिग ही कार चला रहा था। अगले हफ्ते तक हम ब्लड और डीएनए रिपोर्ट्स आने की उम्मीद कर रहे हैं।

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि यरवदा पुलिस स्टेशन के दो अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया है। 18-19 मई की रात जब कल्याणी नगर में यह हादसा हुआ, तब इंस्पेक्टर जगदाले और एएसआई टोडकरी मौके पर पहुंचे। हालांकि, दोनों ने घटना की जानकारी नियंत्रण कक्ष को नहीं दी थी। वे आदतों को जीवनशैली से मेडिकल जांच के लिए भी नहीं ले गए थे।

सीसीटीवी में फास्ट चार्जिंग से कुछ तस्वीरें सामने आई थीं।

सीसीटीवी में फास्ट चार्जिंग से कुछ तस्वीरें सामने आई थीं।

200 की स्पीड में बाइक को टक्कर मार दी, दो आईटी इंजीनियर्स की जान गई
18-19 मई की रात 17 साल 8 महीने के प्रभाव ने लंबी पोर्श कार से बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मारी थी। आईटी सेक्टर में काम करने वाले 24 साल के अनीश कालरा और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई। दोनों मध्य प्रदेश के रहने वाले थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, तब कार 200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चल रही थी।

अंकित नाबालिग के दादा सुरेंद्र अग्रवाल ने 23 मई को दावा किया था कि घटना के समय उनका पारिवारिक ड्राइवर भाग रहा था। भगवान के पिता विशाल ने भी यही बात कही थी। पुलिस की पूछताछ में ड्राइवर ने भी पहले खुद गाड़ी चलाने की बात स्वीकार की थी।

न्यायालय ने निबंध लेखन की शर्त पर अनुकूल को जमानत दी थी
19 मई को ही घटना के 15 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड ने मामूली रकम के साथ आरोपी को रिहा कर दिया था। सड़क पर सड़क नियंत्रण पर 300 शब्दों का निबंध लिखकर, 15 दिनों तक यातायात पुलिस के साथ काम करने और शराब पीने की आदत के लिए परामर्श देने को कहा गया था।

पुणे पुलिस ने जुवेनाइल बोर्ड से कहा कि अपराध बेहद गंभीर है, इसलिए नाबालिग आरोपी पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस बोर्ड के फैसले के खिलाफ सत्र कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट ने पुलिस को बोर्ड में समीक्षा याचिका देने को कहा।

22 मई को जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को एक बार फिर तलब किया और 5 जून तक बाल सुधार के लिए घर भेज दिया। आदर्श का पिता पुणे का नामित बिल्डर है। दुर्घटना की रात अपने दोस्तों के साथ 12वीं के रिजल्ट का जश्न मनाया गया। वह घटना से पहले दो पब में शराब पीती थी।

90 मिनट में 48 हजार रुपए की शराब पी थी

ये तस्वीर पब के सीसीटीवी फुटेज की है।  हादसे से पहले नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ शराब पी और ड्रग्स में कार लेकर निकल गया।

ये तस्वीर पब के सीसीटीवी फुटेज की है। हादसे से पहले नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ शराब पी और ड्रग्स में कार लेकर निकल गया।

पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि 2.5 करोड़ की पॉर्श कार को 18 मई को रात करीब 10:40 बजे पब किया गया था। यहां उन्होंने 90 मिनट में 48 हजार रुपए का बिल चुकाया।

इसके बाद वह रात 12:10 बजे ब्लैक क्लब मैरिएट होटल गया था। यहां से निकलने के बाद रात करीब 2:15 बजे उनकी कार एक्सीडेंट हुई थी। वह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चला रहा था। इसमें दो लोगों की मौत हुई थी।

बिना लाइसेंस के पिता ने दी कार चलाने की घोषणा
एफआईआर के मुताबिक, नाबालिग के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। यह जानने के बावजूद उसके पिता ने उसे लंबी कार चलाने दे दी। बिल्डर को यह भी पता चला कि उसका बेटा शराब पीता है, फिर भी उसे पार्टी में शामिल होने की मनाही दी।

विशेष अदालत ने 24 मई को आरोपी के पिता समेत सभी छह आरोपियों को 7 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी, ताकि यह दिखाया जा सके कि फोटो माइनर गाड़ी नहीं चला रही थी।

पुलिस ने प्रतिमा के पिता, बार मालिकों और मैनेजर के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 420 भी दर्ज कर ली है। कमिश्नर ने कहा, ‘हमारे पास नाबालिगों के पब में शराब पीते हुए सीसीटीवी फुटेज हैं। ऐसे में हम सिर्फ ब्लडप्रूडल रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहेंगे। साथ ही, इंटरनैशनल इन्क्वायरी में पता चला है कि कुछ लोगों की ओर से गलती हुई थी और सबूत नष्ट करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’

पुणे के पबों पर प्रशासन का एक्शन, कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन

2500 पब-बार कर्मचारियों ने 24 मई को जिला प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की।

2500 पब-बार कर्मचारियों ने 24 मई को जिला प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की।

घटना के बाद पुणे जिला प्रशासन ने शहर में संचालित पबों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। नियमों का उल्लंघन करने वाले 32 पबों पर कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के खिलाफ शुक्रवार (24 मई) को 2500 पब-बार कर्मचारियों ने पुणे स्टेशन के पास राजा बहादुर मिल्स एरिया में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि जो पब नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, सभी पर नहीं। एक टूर्म ने कहा कि दो पब की गलती का खामियाजा, हमें छूटना पड़ रहा है। एक पब के मालिक ने कहा कि कोविड के दौरान हमें बहुत नुकसान हुआ था। अब इस कार्रवाई से और नुकसान हो रहा है।

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