Blue City Of India: जोधपुर को क्‍यों कहा जाता है ‘भारत का नीला शहर’? घूमने जाएं तो जरूर देख आएं ये 5 टॉप लोकेशन्स


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Why is Jodhpur Is blue : राजस्थान की बात हो और रंगों का जिक्र न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. गुलाबी शहर जयपुर के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन आज बात करेंगे राजस्थान के उस शहर की जिसने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग ‘नीली’ पहचान बनाई है. जी हां, हम बात कर रहे हैं जोधपुर की, जिसे प्यार से लोग ‘ब्लू सिटी’ (Blue City) कहते हैं. रेगिस्तान की तपती धूप के बीच जब आप इस शहर को देखते हैं, तो नीले रंग के घर आंखों को बड़ी ठंडक पहुंचाते हैं.

Jodhpur Travel Guide : क्या आपने कभी सोचा है कि जोधपुर नीला ही क्यों है? इसके पीछे कई दिलचस्प कहानियां हैं. पुरानी मान्यताओं के अनुसार, पहले के समय में ब्राह्मण अपने घरों को अलग पहचान देने के लिए उन्हें नीले रंग से रंगवाते थे. इसी वजह से पुराने शहर के इस इलाके को ‘ब्रह्मपुरी’ भी कहा जाता था. धीरे-धीरे यह चलन इतना बढ़ा कि पूरा शहर ही इस खूबसूरत रंग में रंग गया और इसे ‘ब्लू सिटी’ का नाम मिल गया.

नीला रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है, इसके पीछे एक बहुत ही समझदारी भरा कारण भी है. जोधपुर में गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है. विज्ञान कहता है कि नीला रंग सूरज की रोशनी को वापस भेज देता है और गर्मी को घर के अंदर नहीं आने देता. यानी सालों पहले यहां के लोगों ने बिना बिजली वाले ‘नेचुरल एसी’ का जुगाड़ कर लिया था. इन नीले घरों के अंदर बाहर की तुलना में काफी कम गर्मी लगती है.

एक और मजेदार कारण यह भी है कि यहां के लोग चूने में ‘नीला थोथा’ (कॉपर सल्फेट) मिलाकर दीवारों पर लगाते थे. उनका मानना था कि ऐसा करने से घरों में दीमक और कीड़े-मकौड़े नहीं आते. तो बस, एक तीर से दो निशाने हो गए—घर कीड़ों से भी बच गए और शहर को एक शानदार पहचान भी मिल गई. आज यही नीला रंग सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है.

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जोधपुर में क्‍या-क्‍या देखें- अगर आप जोधपुर जा रहे हैं, तो सबसे पहले मेहरानगढ़ किला जरूर जाएं. यह किला एक ऊंची पहाड़ी पर बना है. जब आप इसकी चोटी से नीचे शहर की तरफ देखते हैं, तो आपको नीले रंग के घरों का एक समंदर नजर आता है. यह नजारा इतना खूबसूरत होता है कि आप अपनी नजरें नहीं हटा पाएंगे. यह फोटो खींचने के लिए सबसे बेस्ट जगह है.

किले के पास ही जसवंत थड़ा है, जिसे ‘मारवाड़ का ताजमहल’ भी कहते हैं. सफेद संगमरमर से बनी यह जगह बहुत ही शांत और सुंदर है. इसके बाद आप उम्मेद भवन पैलेस देख सकते हैं. यह महल इतना विशाल है कि इसके एक हिस्से में आज भी जोधपुर का राजपरिवार रहता है, जबकि बाकी हिस्सा एक म्यूजियम और आलीशान होटल है. इसकी भव्यता देखकर आप हैरान रह जाएंगे.

थोड़ा और समय हो तो मंडोर गार्डन्स घूमने जाएं. यहां पुराने मंदिर और सुंदर बगीचे हैं जो आपको सुकून देंगे.

और हां, जोधपुर गए और वहां का खाना नहीं खाया, तो यात्रा अधूरी है. क्लॉक टावर (घंटाघर) के पास के बाजार में जाएं और वहां के मशहूर ‘मिर्ची वड़े’ और ‘मावा कचौड़ी’ का आनंद लें. यहां की तंग गलियों में घूमना अपने आप में एक अलग रोमांच है.

कुल मिलाकर, जोधपुर एक ऐसा शहर है जो अपनी परंपराओं और रंगों को आज भी समेटे हुए है. यहां की गलियों में घूमते हुए आपको ऐसा लगेगा जैसे आप इतिहास के किसी सुनहरे पन्ने पर चल रहे हों. तो अगली छुट्टियों में अपनी बैग पैक कीजिए और निकल पड़िए इस नीले शहर को करीब से देखने के लिए.



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