रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘जनहित में बुनियादी सवाल पूछने पर मेरे सहयोगी पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों की पूरी फौज की तैनाती यह साबित करती है कि असम के मुख्यमंत्री हताश और परेशान हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह उचित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह प्रतिशोध की कार्रवाई है, एक ऐसे मुखर विपक्ष की आवाज को दबाने और चुप कराने के लिए राज्य मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है, जो सरकार के कई कारनामों को उजागर कर रहा है। जो डराते हैं वे डरे हुए होते हैं और उनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ होता है।’’
रमेश ने दावा किया कि इससे यह भी साबित होता है कि मुख्यमंत्री को आसन्न हार का सामना करना पड़ रहा है।





