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Booth-wise Voter Turnout Data Case; CEC Rajiv Kumar | Supreme Court | चुनाव आयुक्त बोले- हम दिखाएंगे कैसे गुमराह किया जाता है: EVM-वोटर टर्नआउट पर हो रहे संदेह पर कहा- सुप्रीम कोर्ट ने सच मान लिया, अब हमारी बारी

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नई दिल्ली17 मिनट पहले

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मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने छठे फेज के दौरान 25 मई को दिल्ली में एक बूथ पर परिवार के साथ जाकर वोट डाला।  - दैनिक भास्कर

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने छठे फेज के दौरान 25 मई को दिल्ली में एक बूथ पर परिवार के साथ जाकर वोट डाला।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने दिल्ली में एक पोलिंग बूथ पर वोट डाला। इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर बात की, जिसमें चुनाव आयोग के फॉर्म 17सी डेटा और बूथ-वाइज वोटर टर्नआउट प्रकाशित करने को लेकर किसी भी निर्देश देने से इनकार कर दिया है।

सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि उन्होंने सच स्वीकार कर लिया है। संदेह का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। हम एक दिन निश्चित रूप से सभी के साथ इस पर चर्चा करेंगे।

राजीव बोले कि यहां क्या खेल है, संदेह क्यों पैदा किए जाते हैं। हम एक दिन यह सामने लाएंगे और सभी को दिखाएंगे कि लोगों को कैसे जोड़ा जाता है। लोगों के मन में कैसे संदेह पैदा होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई को ईसीआई की वेबसाइट पर फॉर्म 17सी डेटा अपलोड करने और बूथ-वार वोटर टर्नआउट डेटा प्रकाशित करने की मांग वाली याचिका पर किसी भी निर्देश देने से इनकार कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर में जल्द होंगे विधानसभा चुनाव
राजीव कुमार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में जल्द ही विधानसभा चुनाव होंगे। राजीव बोले- जम्मू-कश्मीर में हुई वोटिंग चुनाव आयोग उत्साहित है, इसलिए बहुत जल्द विधानसभा चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी सरकार जारी रखते हैं। यह सुनकर, बहुत दुख हुआ है कि लोग बड़ी संख्या में मतदान करने आ रहे हैं। लोकतंत्र की आधारशिला और मजबूत हो रही हैं।

वोटर टर्नआउट ऐप मुझे वोटर टर्नआउट ऐप के लिए मजबूर कर रहा है
एडीआर की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने कहा था- वोटर टर्नआउट ऐप पर वोटिंग डेटा अपलोड करने के लिए आयोग के लिए आ बैल मुझे मार जैसा हो गया है, पहले वैधानिक जरूरत नहीं होती। अब जब वोटिंग डेटा 48 घंटे में जनता करने की मांग हो रही है तो कमीशन ख़राब हो रहा है।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की वेकेशन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि कांग्रेस चुनाव के 5 चरणों की वोटिंग हो चुकी है। बेंच ने कहा- अब सिर्फ दो फेज की ही वोटिंग बाकी हैं। इस तरह से डेटा अपलोड करना चुनाव आयोग के लिए मुश्किल होगा।

केर्ट ने कहा- हमें कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं देने का रुझान है। जस्टिस दत्ता ने मौखिक टिप्पणी में कहा- हमें संवैधानिक मुद्दों पर भरोसा करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि एडीआर की ओर से इस बारे में 2019 में लगाए गए मूल याचिका पर चुनाव के बाद नियमित बेंच में सुनवाई होगी।

वोटिंग प्रतिशत में आने पर रिपोर्ट लगाई गई
कांग्रेस चुनाव शुरू होने के बाद वोटिंग के दिन आयोग वोटर टर्नआउट जारी करता है। इसके कुछ दिन बाद वह इस फेज के अंतिम डेटा जारी करता है। कांग्रेस, एडीआर और फैक्ट्स ने दोनों डेटा में अंतर आने के बाद ही सवाल उठाए और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

याचिका के अनुसार, चुनाव आयोग ने 19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के 11 दिन बाद और 26 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के चार दिन बाद 30 अप्रैल को अंतिम मतदान प्रस्तुति जारी की थी। इसमें मतदान के दिन जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार मतदान प्रतिशत लगभग 5-6 प्रतिशत ज्यादा था।

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