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- बूथ वाइज वोटिंग डेटा के खिलाफ चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ एडीआर एनजीओ लोकसभा चुनाव
नई दिल्ली6 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर के वकील और जस्टिस प्रशांत चंद्र शर्मा की वेच बेंच पर शुक्रवार (24 मई) को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) की वेबसाइट पर फॉर्म 17सी डेटा अपलोड करने और बूथ वोटिंग डेटा अपलोड करने की मांग वाली एडीआर की फाइल पर विचार किया गया। ।।
एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने मांग की है कि 48 घंटे के लिए चुनाव आयोग में वोट प्रतिशत का डेटा बूथ अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें।
22 मई को हुई सुनवाई में आयोग ने एनजीओ की मांग का विरोध किया था। एससी में शेष फाइलेविट में कहा गया था कि फॉर्म 17 सी (हर मतदान केंद्र ने स्टेडियम का रिकॉर्ड डाला था) के आधार पर मतदान डेटा का खुलासा करने से झील के बीच भ्रम पैदा हुआ था, क्योंकि इसमें बैलेट पेपर की गिनती भी शामिल होगी।
ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके आधार पर सभी मतदान परिणामों का अंतिम वोटिंग डेटा जारी करने के लिए कहा जा सके। फॉर्म 17सी केवल पोलिंग एजेंट को दे सकते हैं। यह किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को देने की अनुमति नहीं है।’ फॉर्म 17सी वह प्रमाण पत्र है, जिसे पीठासीन अधिकारी सभी मामलों को प्रमाणित करके देता है।
मिश्रा ने कहा कि कई बार जीत-हार का अंतर होता है। आम वोटर फॉर्म 17सी के अनुसार बूथ पर पड़े कुल वोटों और बैलेट पेपर को आसानी से समझ नहीं सकते। इस तरह से गलत तरीके से चुनाव प्रक्रिया पर कलंक लगाने के लिए किया जा सकता है, जिससे मौजूदा चुनाव में नेता फैल सकते हैं।’
चुनाव आयोग पर वोटिंग परसेंट देर से जारी करने का आरोप
उत्साहित, गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें मतदान के 48 घंटे के भीतर सभी बूथों का अंतिम डेटा आयोग की वेबसाइट पर जारी करने की मांग की गई है।
एनजीओ ने चुनाव आयोग पर जनमत संग्रह के पहले दो चरण में बिटकॉइन जारी करने में देरी का आरोप लगाया। फाइल में कहा गया था कि पहले तो डेटा जारी करने में देरी हुई। इसके बाद प्रारंभिक डेटा के डेस्कटॉप डेटा में ग्लूकोज़ काफी बढ़ गया।
याचिका के अनुसार, चुनाव आयोग ने 19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के 11 दिन बाद और 26 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के चार दिन बाद 30 अप्रैल को अंतिम नामांकन जारी किया था। खंड-खंड के डेरिलीज़ में प्रमुख खंडों के खंड-खंड खंड लगभग 5-6 प्रतिशत अधिक थे।
चुनाव आयोग बोला-चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा करने का अभियान चलाया जा रहा है
सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से एक हफ्ते में जवाब मांगा था। बुधवार (22 मई) को आयोग ने कहा, ‘चुनाव प्रक्रिया को लेकर फीडबैक और निराधार रिपोर्ट से संदेह पैदा करने का अभियान चल रहा है। यह ख़त्म होगा। सच सामने आने तक नुकसान हो चुका होगा। एडीआर कानूनी अधिकार का दावा कर रहा है लेकिन ऐसा कानून नहीं है।’
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