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Allahabad High Court comment Banda CJM Bhagwan Das Gupta | ‘जज बने रहने लायक नहीं बांदा CJM’: हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, बिल भेजा तो बिजली अफसरों पर करा दिया था फर्जी केस – Prayagraj (Allahabad) News

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बांदा के सीजेएम भगवान दास गुप्ता के खिलाफ टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा- जज ने निजी हित के लिए पद का गलत इस्तेमाल किया। बिल वितरण पर बिजली विभाग के मलबे पर फर्जी मामले। वह जज बने रहने वाले नहीं हैं।

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साथ ही, हाईकोर्ट ने जिला जज के बिना किसी भी जज के लिए एफआईआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दी। हालाँकि, अति गंभीर मामलों में केस करा सकते हैं।

रविवार को जस्टिस राहुल चौधरी और मो. बायक हुसैन इदरीसी ने नालब के कृमि रचनाकार मनोज गुप्ता, एसडीओ दीपेंद्र सिंह और सहायक सचिव राकेश सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया है। सीजेएम ने 2023 में धोखाधड़ी के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इस वकील को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।

पहले सीजेएम के शिकायत पर हुई थी एसआईटी जांच
सीजेएम भगवान दास गुप्ता ने 2009 में लखनऊ के अलीगंज में मकान खरीदा था। इस पर 1 लाख 66 हजार 916 रुपए का बिजली बिल था। बिजली कनेक्शन मकान मालिक के नाम था। सीजेएम ने अपना नाम अलीगंज सब स्टेशन के लिए कनेक्शन पर आवेदन दिया। विभाग ने बताया कि बिल भुगतान होने के बाद ही नाम बदला जा सकता है।

बिजली विभाग ने बिल वेंचर्स के लिए नोटिस जारी किया। सीजेएम भगवान दास ने मकान मालिक और बिजली विभाग के खिलाफ नाऊन के एसीजेएम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। उनके प्रतिवादी अदालत ने एसआईटी जांच के आदेश दिए। प्रतिभावान को समन भी भेजा गया था, लेकिन बाद में वापस ले लिया गया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने केस को खारिज कर दिया था।

जज ने फिर बांदा बांदा में केसरी प्रवेश द्वार
सीजेएम भगवान दास के खिलाफ 27 जुलाई 2023 को बिजली विभाग के कोलोराडो में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए बांदा बांदा में मुकदमा दर्ज कराया गया। इस वकील को कोर्ट में चुनौती दी गई। दर्शन के बाद उच्च न्यायालय ने शेयरधारकों के खिलाफ दर्ज अलॉटमेंट को रद्द कर दिया।

उच्च न्यायालय तक सी.जे.एम. कानूनी लड़ाई हार गए
कोर्ट ने कहा- सीजेएम कानूनी लड़ाई कोर्ट तक हारते गए। इसके बाद भी बांदा में बिजली विभाग के मजिस्ट्रेट के इंस्पेक्टर के खिलाफ दान बहादुरी को धमाका कर एफआईआर दर्ज कराई गई। अदालत ने आश्चर्य प्रकट किया कि 14 प्राचीन काल के मजिस्ट्रेटों ने केवल 5 हजार रुपये का बिजली बिल जमा किया।

वैज्ञानिको ने कहा- सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जा रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों पर फ़्रेस्ट वेल्फ़ायर का भी आरोप। वहीं, बिजली विभाग के शेयरों ने कोर्ट में कहा- जज ने अब तक 2,01,963 रुपये का बिजली बिल जमा नहीं किया है।

जज भी अन्य शिष्यों की तरह लोकसेवक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक जज की तुलना किसी अन्य प्रशासनिक पुलिस गिरफ्तारी से नहीं की जा सकती। यद्यपि, न्यायाधीश भी अन्य प्रकार के लोकसेवक हैं, लेकिन ये न्यायिक अधिकारी नहीं हैं, जिन्हें भारतीय संविधान से संप्रभु शक्ति का उपयोग करने का अधिकार प्राप्त है। एक न्यायाधीश का दायित्व और व्यवहार संविधान के अनुरूप होना चाहिए।

जज की अपनी गाइडलाइंस…उनका व्यक्तित्व दो बार देखा गया
उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी की किताब का उल्लेख किया। कहा- जज जो मुकदमा कर रहे हैं, देख नहीं सकते। जो देख रहे हैं, उसे सुन नहीं सकते। जज की अपनी गाइडलाइंस हैं। उनके फैसले ऐसे हैं, जिसमें उनका व्यक्तित्व दिखता है।



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