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Shoe traders in Agra have Rs 100 crore in cash | आगरा में जूता व्यापारियों के यहां 60 करोड़ कैश: मशीन से नोट गिनने शिफ्ट में बुलाए कर्मचारी, पर्ची कारोबार से होता था पूरा खेल – Agra News

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आगरा में 3 जूते चप्पलों के यहां इनकम टैक्स की रेड कॉन्स्टेंट 48 घंटे से जारी जारी है। सोमवार दोपहर 12 बजे से लेकर रात 12 बजे तक यहां कार्रवाई चल रही थी। आयकर जारी होने से करीब 60 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का अनुमान है। मंगलवार तकिन

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इनकम टैक्स ने दस्तावेजों से बरामद नकदी को भारतीय स्टेट बैंक में जमा कराने के लिए भेजा है। बैंक कर्मचारियों द्वारा सिक्कों की गिनती पूरी होने के बाद ही कैश की जानकारी मिल गई।

सबसे ज्यादा कैश हरमिलाप ट्रेडर्स के मालिक मीरा डांग के यहां से मिलता है। मिथ्या डांग आगरा के जूता व्यवसाय में पर्ची सिस्टम के बड़े खिलाड़ी हैं। बिजनेस बिजनेस में आने से पहले बहुत साधारण व्यक्ति थे। उन्होंने आटा चुराने की शुरुआत की थी। करीब 25 साल में वो कितने करोड़ के मालिक बन गए? इस प्रश्न को लेकर टीम जांच कर रही है।

यहां पर 36 घंटे तक मशीन से गिनने का नोट जारी किया गया।

यहां पर 36 घंटे तक मशीन से गिनने का नोट जारी किया गया।

आगरा में शनिवार को आयकर विभाग ने आगरा के तीन जूतों के शोरूम यहां रेड की थी। त्रिमूर्ति बीके शुज के एमजी रोड स्थित प्रतिष्ठान और सूर्या नगर स्थित घर, हरमिलाप ट्रेडर्स के मालिक मीरा डंग के घर व फर्म और मंशु फुटवियर कंपनी के आवास व फर्म पर रेड की गई। कहानी के करीब 14 आख्यानों पर कार्रवाई की गई।

यहां दोनों पर लगातार करीब 36 घंटे तक कार्रवाई चली। रात 12 बजे तक हरमिलाप ट्रेडर्स के मालिक मीरा डंग के जयपुर हाउस में स्थित आवास पर इनकम टैक्स की टीम नोट गिन्न में अजा रही। इसके अलावा बीके शुज और मंशु फुटवियर के यहां भी देर रात तक कार्रवाई चली।

30 नोट की मशीन हांफ गई, पिस्तौल परेड स्टाफ में शिफ्ट
यहां से 500 के सिक्कों का जखीरा मिला हुआ है। बताया गया है कि यहां मुर्गों की गड्डियों का पहाड़ मिला हुआ है। लाइब्रेरी, बेड, सूटकेस, तकिए और गद्दों में नोट शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में गड्डियां देखकर आयकर विभाग के अधिकारी भी आ सकते हैं। बैंक से मशीन खरीदने के लिए बिजनेस शुरू करें।

नोट गिनते-गिनते मशीन गर्म हो गई। कुछ देर के लिए उन्हें बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं नोट गिनने के लिए एसबीआई के कर्मचारियों को शिफ्ट में बुलाया गया। शाम सात बजे स्मारक डांग के यहां कर्मचारियों की शिफ्ट बदली गई। उस दौरान इनकम टैक्स के एक अधिकारी ने बताया कि सिक्कों की गिनती चल रही है।

हरदीप मिड्डा मंशु शुज फुटवियर कंपनी की शुरुआत करते हैं।  इनमें यहां भी आयकर की छाप लगाई गई है।

हरदीप मिड्डा मंशु शुज फुटवियर कंपनी की शुरुआत करते हैं। इनमें यहां भी आयकर की छाप लगाई गई है।

कॉलोनी के लोग बोले- मान लीजिए कि ये इतने बड़े आदमी नहीं हैं
मिर्जा डांग के घर से करोड़ों रुपये बरामद होने के बाद पूरे इलाके में उनकी ही चर्चा थी। उनके घर के सामने से एक ही व्यक्ति वाला हर व्यक्ति रुककर एक तरफ देख रहा था। आसपास के लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं लगता कि उनके पास करोड़ों रुपये हैं। वो बेहद साधारण तरीके से रहते थे।

बिज़नेस के राजा थे अनमोल डंग
आगरा का घरेलू जूता बाज़ार बिज़नेस पर प्रतिबंध है। बड़े पैमाने पर, छोटी-छोटी गोलियों को पैलैटम करने के बजाय पर्ची थमा देते हैं। इस पर्ची को छोटी मशीन की पर्ची का काम करने वालों से अलग-अलग लेते हैं। शू एड्यूज़ की किताब तो मायरी डंक शिप बिजनेस का राजा है।

आगरा की बड़ी दुकान में घरेलू जूता बाज़ार
आगरा के घरेलू जूता बाजार में 65 प्रतिशत भागीदारी है। छोटे-छोटे बच्चों द्वारा छोटे-छोटे स्टूडियो में जूते तैयार किए जाते हैं। आगरा की गलियों-मोहल्लों के घरों में छोटे-छोटे कई जूते-चप्पल हैं। यह बिज़नेस ऋण पर सबसे अधिक है। छोटे-छोटे जब माल तैयार कर ले जाते हैं, तब वह उन्हें नकद नकद या चेक की जगह लिपि थमा देते हैं।

दस्तावेज़ की वैधता 3 से 7 माह
लाखों का कारोबार इसे छोड़कर अन्य जगहों पर भी होता है। 3 से 7 महीने तक मोबाइल के लिए रजिस्टर करें। जूते के बिजनेस में शामिल होने वाले कागजात में हरमिलाप ट्रेडर्स के मिथ्या डांग का होल्ड माना जाता है।

कारखाने के आंकड़ों के अनुसार वह प्रति सैकड़ा एक से 1.25 प्रतिशत तक ब्याज लेती है। बीके सुज भी डिजिटल बिजनेस में सक्रिय है। प्रति सैकड़ा में 40 पैसे की ब्याज दर है।

सुभाष मिड्डा और अशोक मिड्डा बीके शूज कंपनी द्वारा संचालित है।  यहां भी इनकम टैक्स की रेड रखी गई है।

सुभाष मिड्डा और अशोक मिड्डा बीके शूज कंपनी द्वारा संचालित है। यहां भी इनकम टैक्स की रेड रखी गई है।

मिर्ज़ामी ने आटे की दुकान से व्यापार शुरू किया
मिथ्या डांग शू मैटेरियल की ट्रेडिंग का काम करने वाले कारखाने हैं। इनका नाम ही मंडी में कागजों का काम करने वाले बड़े कागजों में हैं। जो कि स्टूडियो को रुचि पर पैसे देते हैं। उनके यहां बड़ी मात्रा में कैश बरामद होने की वजह से पर्ची बिजनेस ही मनी जा रही है। मिशारत ने पिछले दो दशकों में इतने अमीरों का कारोबार किया।

हींग की मंडी से शुरू हुआ दस्तावेजों का खेल
दो दशक पहले स्मारक के मोती कटरे में आटा मारा गया था। इसके साथ ही उन्होंने मंडी में पर्ची का काम भी किया। धीरे-धीरे उन्होंने रेग्जीन और फोन का काम शुरू किया। शू मैटेरियल से अधिक उनके दस्तावेज़ का काम है।

चुनाव की वजह से नहीं हो रहा था भुगतान
यहां चुनाव के पीछे इतनी बड़ी नकदी नकदी बरामद होना भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। चुनाव की वजह से पर्चियों के बदले कैश का भुगतान नहीं हो रहा था। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी एकत्रित हुई थी। अन्य अर्थशास्त्र विभाग को लगाया गया था।

जूतों ने बताया कि मैसाचुसेट्स जूतों को उधार दिया गया था। उनके घर से करोड़ों रुपयों की वकालत की वसूली हो रही है, मछुआरों पर भी डाका डाला जा रहा है। पर्ची से काम चलाने के लिए ही वह इतनी बड़ी नकदी अर्जित कर रहे थे।

दस्तावेज़ी अख़बार पर
मीरा डांग के यहां से टीम को स्लिप की लिस्ट मीटिंग की बात कही जा रही है। इसके अलावा जिन लोगों को स्मारक ने उधार दिया है, उनकी सूची भी मिल गई है। ऐसे में इनमार्केट टैक्स डिपार्टमेंट की रिटेल स्लिप पर बिजनेस से लेकर कई बिजनेस चले गए हैं।

रिज्यूमे कम करके बनाया गया साख
सूर्य नगर में रहने वाले सुभाष मिड्डा और अशोक मिड्डा बीके सुज द्वारा संचालित किये जाते हैं। जूते-चप्पल की दुकान तो उनके पिता छोटे सी की दुकान पर थे। दोनों भाई नौकरी करते थे। नौकरी के दौरान मुंबई की एक पार्टी मिली। उसे अन्यत्र बाजार के रिज्यूमे से शुरू करें। बस सूची से संकलित सूची। ये छोटे-छोटे ऑर्डर लिए गए थे।

धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे काम किया जा रहा है। इनका फुट फैशन के नाम से ब्रांड है। घरेलू जूते व्यवसाय में ये बड़ा नाम है। अब यह दुबई व सऊदी अरब में सऊदी अरब के प्रतिद्वंद्वी भी हैं।

संचालन मंशू शुज हरदीप मिड्डा ने किया। हरदीप ताजनगरी फेज-टू स्थित शंकर ग्रीन्स में रहते हैं। यह सुभाष मिड्डा और अशोक मिड्डा के भाई हैं। पहले तीन भाई एक साथ काम करते थे।



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