चेन्नई2 मिनट पहलेलेखक: विनय कुमार ठाकुर
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पीएम मोदी ने 28 फरवरी को इसरो के कुलशेखरपट्टनम में दूसरे अंतरिक्ष बंदरगाह की यात्रा की थी।
जल्द ही दुनिया की एयरोस्पेस कैपिटल बनने जा रही है। कम खर्च में छोटे सैटेलाइट बनाने से लेकर लॉन्चिंग तक एक ही जगह पर कई प्लेटफॉर्म तैयार हो चुके हैं।
10 साल में यहां 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश होगा। लॉकहीड मार्टिन, एयरबस, कॉलिन्स जैसे विदेशी व्यापारी भारतीय निजी अंतरिक्षयान के साथ छोटे सैटेलाइट बना रहे हैं। ये संक्रान्ति सिद्धहोगा।
चेन्नई से करीब 600 किमी दूर कुलशेखरपट्टिनम में 950 करोड़ रुपये की लागत से नए स्पेस पोर्ट, सैटेलाइट निर्माण और प्रपल्शन संस्थान को समर्पित दो एयरोस्पेस पार्क और दो डिफेंस गैलरी बन रहे हैं। ये तमिल को एयरोस्पेस डिफेंस सेक्टर में सुपर पावर मिशिगन है।
इन्वेस्टमेंट स्पेस जोन रूहीमी हाइब्रिड रॉकेट, अग्निकुल बैचलर वन पीस इंजन बनाने के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट प्रपल्शन पर काम कर रही हैं। फायरकुल केरोसीन फुल वाला रॉकेट बनाई जा रही है, जो 300 किलोमीटर के सैटेलाइट को 700 किमी ऊपर कक्षा में स्थापित कर सके। भविष्य में कुलशेखरपट्नम स्पेस पोर्ट से लॉन्च की जाएगी। इससे बड़े उपग्रह प्रक्षेपित होंगे।

यह तस्वीर कुलशेखरपट्टिनम की है, जहां इसरो का दूसरा स्पेस पोर्ट बनाया जा रहा है।
स्पेस किड्ज के पास जहां 6 उपग्रहों का ऑर्डर है। स्पेस जोन अगस्त में क्यूब सेट और पिको सैटेलाइट लॉन्च होने वाला है। दोनों के पास अपने ग्राउंड स्टेशन और लॉन्च किए गए पैड हैं। स्पेस जोन के पास मोबाइल सैटेलाइट लॉन्चर भी है।
श्रीपेरंबदूर में एयरोस्पेस, डिफेंस के लिए एडवांस लेबर सेंटर बन रहा है। कुलशेखरपतिनम के पास तिरुवनवेली में इसरो का मिशन प्रपल्शन सेंटर में क्राय जेनेटिक्स स्टोरेज टैंक की जांच होगी।
भारतीय उपग्रह बाजार में विदेशी निवेश की सीमा 100% कर दी गई है। 2030 तक दुनिया भर में छोटे सैटेलाइट का निर्माण और लॉन्चिंग का बाजार 1 ट्रिलियन डॉलर होगा।
स्पेस किड्ज के संस्थापक डॉ. श्रीमती केसन ने बताया कि चेन्नई छोटे उपग्रहों का हब बनेगा। ऑटोमेशन दिग्गज कंपनी रॉकवेल की यहां यूनिट कर्मचारी। वियतनाम के विनचिप में 2 अरब डॉलर का निवेश जारी है। एयरोइन स्पेस टेक कंपनी इलेक्ट्रिक प्रपल्शन सिस्टम बना रही है।
986 करोड़ रुपये में बनेगा इसरो का नया स्पेस पोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को राज्य के कुलशेखरपट्टनम में इसरो के नए अंतरिक्ष बंदरगाह की यात्रा करेंगे। इसे 986 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया। यहां से हर साल 24 लॉन्चिंग की जाएगी। कॉम्प्लेक्स में 35 सुविधाएं और एक मोबाइल लॉन्चिंग शामिल होगी।
नए लॉन्च पैड को लेकर इसरो प्रमुख एस एस सोमनाथ ने कहा- तमिलनाडु सरकार ने हमें जमीन पोस्ट कर दी है। निर्माण शुरू होने वाला है, इसे पूरा होने में लगभग 2 साल लगेंगे। यहां से दो साल बाद एसएसएलवी लॉन्च किया गया।
कुलशेखरपट्टीनम का स्पेस पोर्ट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र के बाद इसरो का दूसरा स्पेस पोर्ट होगा। 1971 में एस्ट्रोनॉट स्पेस सेंटर की स्थापना हुई थी।
