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- एनसीईआरटी: न्यायपालिका अध्याय में भ्रष्टाचार को लेकर प्रोफेसर मिशेल डेनिनो को पाठ्यक्रम से हटाया गया
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सुप्रीम कोर्ट एनसीईआरटी कक्षा 8वीं की सोशल साइंस की किताब में ‘कर्पशन इन द ज्यूडिशियरी’ नाम का सब-चैप्टर तैयार करने वाली टीम को निकालने की तैयारी है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य संस्थानों और सार्वजनिक वित्त पोषित संस्थानों को निर्देश दिया है कि एनसीईआरटी के सोशल साइंस करिकुलम के अध्यक्ष प्रोफेसर मिशेल डेनिनो को अलग से पाठ्यक्रम दें।
साथ ही, उनके दो अन्य सहयोगी सहयोगी दिवाकर और आलोक अख्तर कुमार भी किसी भी तरह से पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं किये गये। इसके अलावा, तीसरी पीढ़ी की पाठ्यपुस्तकों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया से भी अलग किया जाएगा।

प्रोफेसर मिशेल डेनिनो ने अपने 2 सहयोगियों – दिवाकर और आलोक कुमार के साथ मिलकर कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की किताब के पार्ट-2 में सब-चैप्टर ‘कर्पशन इन ज्यूडिशियरी’ तैयार की थी।
पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा शुल्क भी मांगा
भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई सूर्यकांत की अवाम वाली बेंच ने प्रो. मिशेल डेनिनो और उनकी टीम को इस अध्याय की तैयारी में और उन्हें करिकुलम में शामिल करने की प्रक्रिया से अलग जाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही उन्हें किसी भी पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा देने से भी रोक लगाने का निर्देश दिया गया है।
प्रोफेसर ज्यूडिशियरी की अवरक्त छवि बनाने की कोशिश
कोर्ट ने कहा कि इस तरह की विचारधारा को पहली बार देखने का कोई कारण नहीं है कि प्रोफेसर मिशेल डेनिनो, दिवाकर और आलोक कुमार की भारतीय पत्रकारिता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसा भी माना जा सकता है कि उन्होंने इस तरह से स्पेक्ट्रेट को पेश किया, जिससे कक्षा 8 के छात्रों के सामने ज़ाहिर की नकारात्मक छवि बन गई।
कोर्ट ने कहा कि कक्षा 8 के छात्रों पर कम उम्र के ऐसे प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए यह समझ में आता है कि ऐसे लोगों को करिकुलम बनाया जाता है या अगली पीढ़ी की किट्स तैयार करने में उन्हें शामिल किया जाता है।
एनसीईआरटी ने बिना शर्त कोर्ट से छूट की शर्त रखी
इससे पहले मंगलवार, 10 मार्च को एनसीईआरटी ने किताब के ‘कर्पशन इन ज्यूडिशियरी’ चैप्टर को लेकर बिना शर्त स्वतंत्रता दी थी। इस अध्याय को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। मुक़दमा सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा था। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि दोषियों को बदनाम नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के नामांकन के बाद किताब की बिक्री पर रोक
25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की याचिका के बाद ‘कर्पशन इन ज्यूडिशियरी’ चैप्टर वाली एनसीईआरटी किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। एनसीईआरटी के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की थी। मानक के अनुसार, एनसीईआरटी ने अध्याय की सिफारिश करने वाले निर्देश दिए हैं और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों के लिए सहायक उपकरण प्रयोगशालाएं दी हैं। किताब को वेबसाइट से भी हटा लिया गया है।
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