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न्यूयॉर्क के नेवार्क में स्थित ‘वॉशिंगटन पार्क हाई स्कूल’ की एक कक्षा में दिनों इन अजीब सा पाठ और फिर गहन चर्चा का शोर बताया गया है। यहां विषय गणित या इतिहास नहीं, बल्कि कुछ ऐसा है जो आने वाले कल की दिशा तय करेगा, स्मारक साहित्य। टीचर माइक टोबमैन और स्कॉट कर्न ने 12वीं के छात्रों के लिए ग्रुप हॉल में ही यूनिक कोर्स शुरू किया है। उनका मानना है कि होटल एक कार की तरह है। वे चाहते हैं कि उनके छात्र इस तकनीक के साथ सिर्फ ‘पैसेंजर’ पीछे आएं न बैठें, बल्कि कुशल ‘ड्राइवर’ इसे सही दिशा में ले जाएं। टोबमैन इस क्लास की तुलना ड्राइविंग टेस्ट की तैयारी से करते हैं। क्लास में वाइटबोर्ड पर एक सवाल चमकता है- ‘क्या आप तकनीक चला रहे हैं या तकनीक आपको चला रही है?’ छात्र एड्रियन फैरेल (18) ने अपने गणित के होमवर्क की जांच के लिए यह लिखा है। वहीं, ब्रायना पेरेज़ स्वीकार करती हैं कि जब वे स्पॉटिफ़ाई की ‘मैट डीजे’ सुनती हैं, तो ‘पैसेंजर मॉड’ में होती हैं क्योंकि टेक्नोलॉजी उनकी पसंद तय कर रही होती है। स्कूल के टीचर्स ने इस नए कोर्स में कुछ दिलचस्प तरीके अपनाए हैं। इतिहास की कक्षा में खास चैटबॉट बनाया गया है जो छात्रों के तर्कों को चुनौती देता है। जब 17 साल की एलिसन ने दंगों के आरोप तर्क-वितर्क पर रखे, तो चैटबॉट ने उनसे कहा- ‘मैं इस पर छोटे और दर्शकों को देखता हूं।’ एलिसन का कहना है, इस बहस से सोच और बेहतर हुई। एक अन्य वर्ग में बच्चों की फिल्म का उपयोग ‘करियर रेस्तरां’ के लिए किया जा रहा है। नर्स बनने की तैयारी कर रही 17 साल की अनिया ने फिल्म की मदद से अपने प्रोजेक्ट को काफी स्पष्ट बनाया। केर्न कहते हैं, ‘बच्चे में बात करें या मूल सोच का इस्तेमाल करें, तो मैं चाहता हूं कि कभी भी अनुमति न दे। कोर्स में डीपफेक, कॉपीराइट और विरासत संपदा जैसे गंभीर विषयों पर भी चर्चा होती है। ब्रायना का कहना है, ‘अगर ऐसा कोर्स नहीं है, तो हमें पता ही नहीं चलेगा कि भविष्य में हमारे सामने क्या आने वाला है।’ स्कूल अब 12वीं के छात्रों के लिए इस स्कूल ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ कोर्स के लिए अनिवार्य रूप से योजना बनाना जरूरी है। मार्ट लिटरेसी- यह ड्राइविंग टेस्ट के लिए मार्ट लिटरेसी चैटबॉट्स को समझना उपयोग करने की कला है। तीन बातें अहम हैं- पहली- स्मार्ट प्रॉम्प्टिंग, यानी चैटबॉट से सही प्रश्न, इसमें सही काम बताना। दूसरा- रिस्क पहचानना, यानि देखना कि कैसल कब गलत जानकारी दे रहा है या कबाडी है और तीसरा- रिस्क पहचानना, यानि कि मकान की मदद से कुछ नया बनाना, जैसे अब कुछ चाइल्ड ऐप खुद बना रहे हैं। टीज़र इसे टीनएज को ड्राइविंग टेस्ट के लिए तैयार करने के लिए कहते हैं जैसा कि माना जाता है- इसलिए इसे ‘मशाल का ड्राइविंग लाइसेंस’ कहा जा रहा है|
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स्कूल में ‘एआई का ड्राइविंग लाइसेंस’:शिक्षक चैट्बॉट्स का सही इस्तेमाल करना सिखा रहे ताकि कमान छात्रों के हाथ में रहे, वॉशिंगटन पार्क स्कूल ने शुरू किया अनूठा कोर्स
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