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- एनसीईआरटी न्यायिक भ्रष्टाचार अध्याय विवाद; सीजेआई सूर्यकांत | आठवीं सामाजिक विज्ञान पुस्तक
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सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की नई पुस्तक “न्यायपालिका में क्रीड़ा” का अध्याय शामिल किया है, जिसमें जानेंगे कि प्रमुख पात्र हैं। रविवार को एक केस की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा- किसी को भी दोषी ठहराने की इजाजत नहीं दी जाएगी. कानून अपना काम चाहता है। कोर्ट इस मामले पर खुद एक्शन लेने के लिए विचार कर रहा है।
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने 8वीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में ज्यूडिशरी में एक अनुभाग शुरू किया है। इस अध्याय में सर्वोच्च न्यायालय के 81 हजार, उच्च न्यायालय के 62 लाख 40 हजार, सोमनाथ और सबऑर्डिनेट न्यायालय के 4 करोड़ 70 लाख लंबित मामलों की संख्या भी बताई गई है।
पुस्तक के अध्याय का एक भाग जिसमें लंबित केस का ज़िक्र है…

नए खंड में ज्यूडीशियरी से जुड़े बिंदु
- कोर्ट की हैरार्की और जस्टिस तक पहुंच को फिल्मों से लेकर ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली कहानी जैसे कि करप्शन और केस बैकलॉग को दिखाया गया है।
- करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ डॉक्टर होते हैं जो सिर्फ कोर्ट में नहीं बल्कि कोर्ट के बाहर भी अपने व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
- ज्यूडिशियरी की बेहतर दक्षता प्रणाली का भी अवलोकन किया गया है। सेंट्रल डिजिटल जर्नलिस्ट्स रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से बैंकिंग लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं।
- किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 से ज्यादा की कमाई हुई।
- पुस्तक में गंभीर मामलों में जजों के संवैधानिक नियमों को हटाने के बारे में यह भी बताया गया है कि संसद भवन के पास मौजूद संवैधानिक नियमों को जजों द्वारा हटाया जा सकता है।
- पढ़ें कि ऐसे प्रस्ताव पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
- अध्याय में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग स्तर पर कार्पशन का सामना करते हैं। गरीबों और धार्मिकों की न्याय तक पहुँच की समस्या और समस्याएँ हो सकती हैं।
- इसमें यह भी बताया गया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है और करप्शन के मामलों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाती है।
किताब में पूर्व सीजेआई बी आर गवई का भी ज़िक्र
भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की किताब में जुलाई 2025 में कहा गया था कि न्यायपालिका के भीतर करप्शन और गलत कर्मचारियों के मामलों का सार्वजनिक मित्रों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा था, “विश्वास, इस विश्वास को फिर से बनाया गया है, इन रेंस को ब्लॉकचेन के लिए तेज़, स्थैतिक और पारदर्शी एक्शन में बदल दिया गया है… ट्रांसपेडी और इथेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।”

