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मशीनों को इंसानो जैसी आंखें:एक फिल्म ने चीनी इंजीनियर की बदल दी जिंदगी, ऑर्बेक के 3D सेंसर्स ने बदली रोबोटिक्स की किस्मत, अब टार्गेट पर $7.5 ट्रिलियन का मार्केट

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चीनी इंजीनियर हॉवर्ड हुआंग की कहानी किसी साइंस फिक्शन फिल्म के स्थिरांक में शामिल है। बीजिंग में हाल ही में आयोजित विश्व के एकोमोरोन रोबोट गेम्स में जब चीनी रोबोट ‘टिन कून अल्ट्रा’ ने 100 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता, तो पूरी दुनिया दंग रह गई। लेकिन इस जीत के पीछे वह खास तकनीक थी, जिसने 3-डी विजन सेंसर के जरिए इंसानी नजरें बनाईं। इसे हुआंग की कंपनी ओरबेका ने बनाया है। उन्होंने 2013 में इस कंपनी की रिकार्डिंग की थी। बीजिंग यूनिवर्सिटी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर से इंजीनियरिंग कर चुका हुआंग ने कभी सिर्फ रिसर्च पेपर तैयार किया था। 2004 में आई फिल्म ‘आई रोबोट’ में उनका नजरिया बदला गया। उन्होंने फैक्ट्रियों को ठीक करने के लिए एकेडमिक करियर शुरू किया। उनके इस काम ने उन्हें रोबोट की दुनिया का हीरो बना दिया है। अपने इनोवेशन पर हुआंग कहते हैं, ‘हम रोबोट को ऐसी नजर देना चाहते हैं, जो इंसानों से भी बेहतर हो।’ वे कहते हैं कि हमारी कंपनी में ऐसे कैमरे हैं जो केवल रंग नहीं बल्कि गहराई को भी पहचानते हैं। इससे रोबोट कॉम्प्लेक्स समुद्र में इंसानों की तरह जहर उगलते हैं। ऑर्बेक की सफलता का यही अनुमान लगाया जा सकता है कि चीन और दक्षिण कोरिया की मोबाइल सेवा रोबोटिक्स बाजार में 3डी विजन सेंसर्स की 70% हिस्सेदारी ऐसी ही कंपनी की है। कंपनी के प्रमुख विज्ञापनों में फिनटेक दिग्गज और जैक मा के नेतृत्व वाले ‘एंट ग्रुप’ भी शामिल हैं। ये टूरिस्ट ऑर्बेक के उत्पादों का इस्तेमाज फेसियल रिकग्निशन यानी चेहरे के माध्यम से होने वाले भुगतान के लिए किया जाता है। सब्जी, हुआंग का पूरा ध्यान इंसान जैसे रोबोट बनाना पर है। उनकी कंपनी न केवल सेंसर्स बना रही है, बल्कि एक लाख ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोट असेंबल करने की क्षमता भी विकसित कर चुकी है। वे अब वियतनाम में अपनी दूसरी माला बना रहे हैं ताकि अमेरिकी बाजार की मांग पूरी हो सके। 2025 की शुरुआत में नौ महीने में कंपनी को 90 करोड़ का फायदा हुआ, जो एक साल पहले 140 करोड़ रु. शेयर में थी। आय 938 करोड़ रही, पिछले साल का कलेक्शन दोगुना है। कंपनी के स्टॉक में आया उछाल ने हुआंग को अरबपति बना दिया। जनवरी से मध्य तक उनकी कुल संपत्ति करीब 15 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। फिल्म और 3डी सेंसर्स के मिलन से आने वाली है बड़ी क्रांति – यह तकनीक रोबोट को इंसानों की तरह की गहराई को गहराई की शक्ति देती है, जिससे वे जटिल और नाटकीय वातावरण में आसानी से शुरुआत कर सकते हैं और आस-पास की जगहों के साथ गहराई को स्थापित कर सकते हैं। – एडवांस्ड सेंसर के कारण फ़्लोरिडा-पावर्ड मार्मोन राइड का बाज़ार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जो 2050 से 7.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। -इन सेंसर्स का इस्तेमाल फैक्ट्री के चिकने, साफ-सफाई करने वाले सर्विस रोबोट्स और बुजुर्गों की देखभाल करने वाले ‘ह्यूमन-केयर’ बॉट्स में बड़े स्तर पर हो रहा है। -लिडार और 3डी विज़न सेंसर्स के मेल सेल्फ-ड्राइविंग कारों और यात्रियों के लिए लंबी दूरी की नेविगेशन और पहचान की राह खुल रही है। – चीन में पुर्जों के स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन से मैरोन रोबोटिक रोबोट बनाने की लागत अगले 5-10 वर्षों में लगभग इसके बराबर हो सकती है, जिससे यह तकनीक आम उपयोग के लिए बेहद आसान हो जाएगी। – इन विजन सेंसर्स का एकीकरण रोबोटिक्स को अपने पर्यावरण के प्रति अधिक उपदेश और विचार बनाना है।



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