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गलगोटिया यूनिवर्सिटी के आविष्कारक प्रोफेसर नियो सिंह अब नई नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने लिंक्डइन प्रोफाइल पर ‘ऑपन टू वर्कशॉप’ का स्टेटस अपडेट किया है। इस मामले के बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी को एआई समिति से बाहर कर दिया था। वहीं यूनिवर्सिटी ने इस पूरे मामले में प्रोफेसर को जिम्मेदार ठहराते हुए छूट दी है। यूनिवर्सिटी ने कहा, “हमारे एक प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी। वे कैमरों पर आने वाले उत्साह के बारे में गलत तथ्य दे गए। उन्हें प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया गया था।” आईटी सचिव बोले- गलत जानकारी पर विवाद नहीं आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “हम चाहते हैं कि लोग एक्सपो में जो भी चित्रित करें, उसमें उनके वास्तविक काम शामिल हों। हम नहीं चाहते कि ऐसे कार्यक्रमों का इस्तेमाल किसी और तरीके से किया जाए। गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।” जब उनसे पूछा गया कि क्या मंत्रालय ने पहले मॉडलों की जांच नहीं की थी, तो उन्होंने कहा, “ये कपड़े बिक्री के लिए नहीं थे, जहां हमें सर्ट एक साथ काम करने की जरूरत है। जब कोई उत्पाद का डेमो देता है, तो हम सोचते हैं कि उन्हें पता है कि वे क्या कह रहे हैं। अगर हम किसी भी चीज की प्रदर्शनी इनोवेशन करने के लिए करते हैं, तो लोग मानते हैं कि हम नवाचार को रोक रहे हैं।” वीडियो वायरल होने से शुरू हुआ विवाद वीडियो में यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर नियोज सिंह कह रहे हैं कि इस रोबोटिक कुत्ते का नाम ‘ओरियन’ है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सिलेंस’ ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी एआई क्षेत्र में 350 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं ने दावा किया कि असल में यह चीनी कंपनी ‘यूनिट्री’ का ‘गो2’ मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपये में उपलब्ध है। वहीं एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस सूरज को ‘शुरुआत से’ तैयार करने का दावा कर रही है, उसमें उपभोक्ता ने ₹40 हजार वाला रेडीमेड ‘स्ट्राइकर वी3 एआरएफ’ मॉडल बताया है। यूनिवर्सिटी ने माना, हमने नहीं बनाया ये डॉग वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा है- हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने ये रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है और न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है। लेकिन हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे, उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें बढ़ा देंगे। नॉलेज बॉक्स: क्या है यूट्री गो2 रोबोटिक डॉग यूट्री गो2 चीन की यूनट्री रोबोटिक्स कंपनी द्वारा बनाई गई एक कैसल-पावर्ड रोबोटिक डॉग है, जो अपनी फर्टी और एडवांस सेंसर के लिए दुनिया में मशहूर है। इसमें 4D LiDAR तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से ये सीढियां, थ्रीडी-खाबड़ रोलर पर फ्लोइंग और अपने रास्ते में आने वाली सवारियों को पहचाना जा सकता है। लगभग 2 से 3 लाख रुपये की कीमत वाला यह रोबोट वॉयस कमांड भी काम करता है और मुख्य रूप से तकनीकी अध्ययन और शिक्षा के क्षेत्र में उपयोग किया जाता है। कैसे काम करती है यह तकनीक रोबोटिक डॉग बनाने में इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर का गहरा मिश्रण होता है: आर्टिफिशियल मांसपेशियां: बाकी हिस्सों में सर्वो मोटर्स या एक्चुएटर्स लगे होते हैं, जो एसास्टिक की तरह काम करते हैं। इससे रोबोट सीढ़ियाँ और कूदने में असमर्थ होता है। लिडार (LiDAR) तकनीक: लेजर पल्स के जरिए ये रोबोट अपने आसपास का 3डी एक्सचेंज लेते हैं। इसी तरह पता चलता है कि सामने की दीवार या कोई और धार्मिक स्थल है। खुद का दिमाग: मशीन लांचर की मदद से ये बिना किसी इंसान की पहचान के खुद का फैसला ले सकते हैं कि किस रास्ते से सुरक्षित जाना होगा। 2011 में हुई थी शुरुआत गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर स्थित 2011 में शुरू हुई थी गलगोटिया यूनिवर्सिटी। ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग तरह के स्कलों के खिलाड़ियों से लेकर झील तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती हैं। सुनील गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर और ध्रुव गलगोटिया सीईओ हैं। अब दिल्ली में चल रही एआई समिति के बारे में जानें…
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चीनी रोबोट विवाद के बाद प्रोफेसर को नौकरी की तलाश:लिंक्डइन पर लिखा ओपन टू वर्क; गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट से बाहर
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