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एआई इंपैक्ट समिट में PM Modi ने दिया ‘MANAV’ विजन, 5 सूत्रों वाले इस लक्ष्य की डिटेल्स जानें

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एआई इम्पैक्ट समिट- इंडिया टीवी हिंदी
छवि स्रोत: पीटीआई
मोदी के घर में फिल्म का इम्पैक्ट

पीएम मोदी मानव विजन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भारत की भूमिका पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देश “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत पर आधारित एक उदाहरण है। इस पर उन्होंने कलात्मक वैज्ञानिक वैज्ञानिकों के क्षेत्र में भारत के मानव विजन को प्रस्तुत किया है, जिसमें डेटा अधिकार की रक्षा के लिए सिद्धांतों और मंच के डेमोक्रेसी की बात कही गई है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिल्म इम्पैक्ट समित का उद्घाटन करते हुए अपनी किताब में कई प्रमुख बातें बताई हैं।

मोदी ने मस्जिद समिति में पेश किया ‘मानव’ दर्शन

इस इंपैक्ट समिति में मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भारत अब धार्मिक क्रांति में हिस्सा लेने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि वह नेतृत्व करने वाले देश के तौर पर स्पष्ट रूप से सामने आया है। वहीं उन्होंने आर्टिफिशियल साइंटिफिक जेंस के लिए सेंट सेंट्रिक की मैरी मैरीन्रिक एप्रोच को जोर-शोर से विरोध करते हुए अपने MANAV विज़न को प्रस्तुत किया है।

आप भी जानते हैं मोदी के इस मानव दर्शन का संदर्भ और अर्थ क्या है-

एम – नैतिक और नैतिक प्रणाली: कलात्मक वैज्ञानिक प्रणाली का नैतिक सिद्धांत और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।

A-लेखांकित: शासन व्यवस्था को ध्येय और पर्यवेक्षण के माध्यम से सुनिश्चित करना चाहिए।

एन – नेशनल सॉवरनिटी: किसी देश के उत्पन्न डेटा में एक ही देश का होना चाहिए और एक ही देश का अधिकार क्षेत्र में होना चाहिए।

ए – एक्सिस मॉड्यूल और इसमें शामिल है: होटल सिस्टम के लिए सभी सामग्री आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए और यह एकाधिकार प्राप्त नहीं है बल्कि मल्टीप्लेयर के लिए स्पष्ट रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।

वी – वैध और वैधीकरण: आर्टिफिशियल एसोसिएट्स को कानून के शासन के तहत वैध, विश्वसनीय और व्यवहार्य होना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि एआई को मशीन सेंट्रिक से मॉरन सेंट्रिक कैसे, नेता और समर्थक कैसे बने। यही इस ग्लोबल फिल्म इंपैक्ट समित का मूल उद्देश्य है। आज मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज भी है और गहरा भी है, व्यापक भी है। इसलिए हमारा विज़न भी बड़ा रखना है और ज़िम्मेदारी भी बहुत बड़ी निभानी है। वर्तमान पीढ़ी के साथ ही हमें इस बात की भी चिंता है कि आने वाली बात है कि अवशेष के हाथों में हम एआई का क्या आकार बदलते हुए जाएंगे।

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