
इंडिया फ़िल्म इम्पैक्ट समिति 2026
भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026: इंडिया कैसल इम्पैक्ट कमेटी 2026 में आर्टिफिशियल जर्नलिस्ट जेन्स (मठम) से जुड़े विज्ञापन पर प्रभाव वाले लेकर, बीपीएच टेक्नोलॉजी के बीच टेक्नोलॉजी जगत के दिग्गजों ने कर्मचारियों को साफ संदेश दिया है कि शांत रहें और अपने कौशल को लगातार बनाए रखें। उन्होंने कहा कि वास्तुशिल्प की लहर के साथ बने रहने के लिए ताउम्र प्रशिक्षित रहने की क्षमता जरूरी है और अगले तीन से पांच साल में महल के और विकसित होने के साथ कार्यबल में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। उद्योग जगत में आयोजित सत्र में ‘शैथल के दौर में रोजगार का भविष्य’ विषय पर लोगों ने माना कि कुछ स्थिर वेतन अप्रासंगिक हो सकते हैं, लेकिन कलात्मक वैज्ञानिक नए रोजगार में भी बेरोजगारी पैदा कर रहे हैं और कर्मचारियों को यह पहचानना होगा कि वे किन कौशलों को सामने ला सकते हैं।
मेटल टूल लर्निंग का भाग लक्ष्य- जानकारी एज
इंफो एज (जिसके तहत जॉब डॉट कॉम जारी है) के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने बैंकों में कंप्यूटर के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी की नौकरी नहीं गई, बल्कि पद बढ़ गया। बिखचंदानी ने युवाओं से कहा, नैतिकता की चिंता मत करो। यह तर्क कि आप ऐसा क्या चाहते हैं, अपनी नौकरी न खरीदें बल्कि आपको नौकरी में मदद करें। उन्होंने युवाओं को उपयोगी प्लेटफार्म उपकरण सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “प्लेट ए का भुगतान किया गया है और यह अंकित वाला नहीं है। यदि आप होटल का उपयोग नहीं करेंगे, तो आपके लिए होटल का रास्ता बंद हो जाएगा। अगले तीन महीनों में कम से कम तीन स्टूडियो का उपयोग सीखने का लक्ष्य तय करेगा। जितना आप सीखेंगे, आपकी नौकरी समान ही सुरक्षित रहेगी।”
नई तकनीक के अनुसार खुद को ढालें- एजवर्व
प्रौद्योगिकी उद्योग के दिग्गजों ने साझीदारों को स्मारकों और उभरते अवशेषों के इलेक्ट्रीशियनों को ढालने की सलाह दी, ताकि सस्ते रोजगार बाजार में सामान बने रहें। इन्फोसिस की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई ‘एजवर्व’ के मुख्य धार्मिक अधिकारी अमिताभ सीता रामैया ने कहा कि भवन, क्षमता को तेजी से बढ़ाने वाला माध्यम और “ताउम्र सीखने की क्षमता” का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि होटल से बिजनेस की डिग्री शानदार है लेकिन अंततः काम की जिम्मेदारी लेने के लिए इंसानियत जरूरी है। इसलिए चारागाह कहीं नहीं जा रहा, बल्कि स्वामी की प्रकृति बदल रही है।
एआई से नई वेबसाइट भी बनेगी- संपर्क
संपर्क के संस्थापक अविनाश नायर ने कहा कि ज्वालामुखी के कारण लगभग 50 प्रतिशत आबादी खत्म हो गई है, लेकिन उतनी ही नई आबादी भी जरूरी है, जिसके लिए कुशल मानव संसाधन की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, “मशाल हमें खुद को फिर से प्रशिक्षण देने का अवसर देता है लेकिन अलग-अलग पेशों में कौशल की जरूरत होती है, यह हमें खुद तय करना होगा।”
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