इंदौर में मध्य लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के सामने आदिवासियों ने एक बार शनिवार देर रात से आंदोलन शुरू किया है। कोर्ट की अंतिम बैठक के बाद नेशनल एजुक समर्पित यूथ यूनियन (एनईवाईयू) के नेतृत्व में आयोग कार्यालय के बाहर धरना दिया जा रहा है। 10 सूत्री
ठंड के दिनों में ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में उद्यमों में महिलाएं भी शामिल होती हैं। अभ्यारण्य ने आयोग परिसर के बाहरी ऊँची एड़ी के जूते के लिए हैं। दीपावली की रात अन्यत्र छुट्टियां मनाई जा रही हैं। इस आंदोलन को एस्टर ने ‘न्याय यात्रा 2.0’ नाम दिया है।
असल में, ठीक 13 महीने पहले दिसंबर 2024 में भी सैकड़ा पीएससी ईसाइयों ने इसी तरह का आंदोलन किया था, जो करीब एक हफ्ते तक चला था, तब जिला प्रशासन ने कई मांगों को लेकर पदमुक्ति की हड़ताल खत्म कर दी थी, लेकिन ईसा मसीह का आरोप है कि उन वादों में से ज्यादातर आज तक पूरे नहीं हुए।

उच्च न्यायालय से मंजूरी के बाद हड़ताल एनवाईयू के संयोजक राधे जाट ने कहा कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के टूरिस्टों को लेकर एनवाईयू की न्याय यात्रा 2.0 को सुप्रीम कोर्ट इंदौर से मंजूरी मिल गई है। यह स्वीकृत WP-3025-2026 में अनुच्छेद 19 के अंतर्गत दिया गया है। यात्रा 10 सूत्रीय प्रकृति के लिए निकाली जा रही है।
कोचिंग इंस्टिट्यूट, लाइब्रेरी और अन्य संस्थान शांति कंक आंदोलन में शामिल होंगे। हमें कोर्ट से प्लास्टिक तरीके से आंदोलन करने की अनुमति मिली है, इसलिए हम पूर्ण शांति से यहां हड़ताल करेंगे।
पिछली माँगें अधूरी, अंतिम माँगें पिछले आंदोलन के दौरान जिन 6-7 में अलगावों की बात कही गई थी, उनमें से केवल दो ही लागू हो गए थे। अधिक रिक्वेस्ट पर भर्ती का वादा पूरा नहीं हो सका। भगवान का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत मांगे आज भी हैं।
- राज्य सेवा में कुछ पर्यटक अंकन लागू होते हैं।
- साक्षात्कार में पहचान न हो, इसके लिए सरनेम हटाने का निर्णय लिया गया।

सबसे बड़ी मांग: रेखाएं में टुकड़े वृषभ की सबसे बड़ी मांग राज्य सेवा परीक्षा के साक्षात्कार बिंदु को लेकर है। उनका कहना है कि 185 प्वाइंट का सबसे बड़ा महत्व है, इसके चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है। इसे 100 अंक मिले।


