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- अंशू द्वारा 3,000 ईंट भट्ठा बच्चों को शिक्षित किया गया; फ़रमान मुफ़्त कंप्यूटर कौशल प्रदान करता है
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हर साल 24 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 दिसंबर, 2018 को एक प्रस्ताव पारित कर इसकी घोषणा की थी। शांति और विकास में शिक्षा की भूमिका के सम्मान में इस दिन को मुक्ति दिलाने की शुरुआत हुई थी।
हर साल अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘शिक्षा के सह-निर्माण में युवाओं की शक्ति यानी सह-निर्माण शिक्षा में युवाओं की शक्ति’ है।
इसी थीम पर हम आज बात करने जा रहे हैं 2 ऐसे युवाओं की चाहत जिन्होंने अपनी योग्यता और सामर्थ्य के आधार पर समाज को शिक्षित करने का प्रयास किया है।
- झारखंड के अशेष उपकरण
- उत्तर प्रदेश के मासूम हसन खान
1. ‘नींव की संस्था’ संस्थाएं स्थापित हैं
कोविड 19 के दौर की बाद की बात। राज्य के निजी इतिहासकारों की बड़ी आमद से पढ़ाई चल रही थी। इस दौरान जर्नलिस्ट अनिल कुमार एथलीट बोल्टों पर गए और देखा कि अलग-अलग राज्यों से आए मजदूर इकट्ठा बोल्टों को काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
वहां उन्होंने परिवार के सदस्यों की जिंदगी को करीब से जानने की कोशिश की। बच्चों की कहानियाँ बार-बार पलायन, तनाव और बचपन को त्यागकर परिवार की मदद करने की मजबूरी से भरी जगह। संभावना से असं ने एक एनजीओ के माध्यम से इन बच्चों को उनके बचपन में वापस लाने का निर्णय लिया।

इसके अलावा, एंटी-स्लेवरी इंटरनेशनल (एंटी-स्लेवरी इंटरनेशनल) की रिपोर्ट ने भी उन्हें बहुत प्रभावित किया। रिपोर्ट के मुताबिक, बोल्ट्स में 14 साल से कम उम्र के 65% से 80% बच्चे रोजाना औसत 9 घंटे काम करते हैं। 77% गणित के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा तक कोई दस्तावेज़ नहीं। ईस्टर्न में करीब 1 लाख रॉकेट्स और 2.3 करोड़ क्रिएटर्स की इस स्टोरी ने अंस को झकझोर दिया।
फिर अशं कुमार मास्टर ने 19 जून, 2023 को बेबी क्वीन के साथ मिलकर मॉस्क के पाटन में ‘नीव की ग्रुप फाउंडेशन (नीव की ईंट फाउंडेशन)’ को एनजीओ के रूप में रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म बनाया। इस संस्था का उद्देश्य समाज के सबसे उपेक्षित वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है।
हालाँकि जब उन्होंने बटाला और ईसाइयों के बच्चों को बोल्टा-लिखाने की दवा दी तो उनका कहना था-
‘अगर ये चिल्ड्रन रीडर्स यूनिवर्सिटें तो कौन बनाएगा? क्या आप चाहते हैं कि हमारे बच्चों के लिए काम न करें?’
बच्चों को शिक्षित करने के लिए एनजीओ बनाया
अशं ने इस फाउंडेशन की शुरुआत ब्लॉक ईंटों (ईंट भट्टियों) पर काम करने वाले अर्थशास्त्री के बच्चों को शिक्षित करने के लिए की थी। इन बच्चों की बचपन की पढ़ाई के स्थान पर ईंट-पत्थर ढोने और श्रम करने की प्रक्रिया चलती रहती है।
अशक्त का मानना है कि ये बाल समाज की ‘नींव की टोली’ हैं और अगर सही शिक्षा मिले, तो भविष्य मजबूत होगा।
‘अक्षर शिक्षण केंद्र’ लोकप्रिय हैं अंस
इंस्टिट्यूट की असेंबली फाउंडेशन के तहत अशंल म्युचुअल फंड बिहार और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में अक्षर शिक्षण केंद्र शुरू कर रहे हैं। ये केंद्र उन बच्चों के लिए ‘ब्रिज स्कूल’ की तरह काम करते हैं, जो कभी स्कूल नहीं गए या बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी।
वे सीधे उस स्थान पर स्कूल की दुकान पर जाते हैं जहां बच्चे रहते हैं (एंट बाउट्स के पास), ताकि वे पढ़ाई की ओर आकर्षित होकर काम कर सकें। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य और खान-पान पर भी ध्यान दिया जाता है।
इन सेंटर्स पर हिंदी और गणित की शिक्षा दी जाती है, ताकि बच्चे मेनस्ट्रीम स्कूल में वापस जा सकें।
‘टीच फॉर इंडिया’ का समर्थन मिला
अपने मॉडल को बढ़ाने के लिए उन्हें TFIx (टीच फॉर इंडिया) जैसे इनक्यूबेशन प्रोग्राम के साथ मिलाएँ। 2024-25 के कोहोर्ट का हिस्सा बनें। TFIx का समर्थन मिला, ताकि वो इस मॉडल और विस्तार को देख सकें।
‘नींव की संस्था’ संस्था से अब तक 3,000 से अधिक बच्चों को दी गई शिक्षा। वहीं, पिछले साल 400 से ज्यादा बच्चों ने अक्षरा लर्निंग सेंटर्स में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। इसके अलावा 250 से अधिक परिवारों को पहचान पत्र और सरकारी मान्यता से जोड़ा गया है।
अंसुलम मूल रूप से एक पत्रकार रह रहे हैं। उनके काम की चर्चा शुरुआत सिर्फ झारखंड में थी। हालाँकि, उनका ये बिहार अभियान के कई समर्थक भी सक्रिय रूप से चल रहे हैं।
2. फोर्ब्स की 30 अंडर 30 लिस्ट में शामिल हुई प्रतियोगिता
सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता हसन खान नन्हें मियां को अमेरिकन रिसर्चर्स फोर्ब्स इंडिया (फोर्ब्स इंडिया) की प्रतिष्ठित 30 अंडर 30 2026 की सूची में शामिल किया गया है। वो पहले ऐसे मुस्लिम युवा हैं, जिनमें इस सूची को शामिल किया गया है।
उन्हें यह सम्मान ‘सोशल इम्पैक्ट’ श्रेणी में मिला। इन श्रेणी के लोगों की पहचान है कि जो नीतिगत स्तर पर या साइकिल चालकों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लेकर काम कर रहे हैं।

पाँच मियाँ समाज सेवा के लिए प्रतिष्ठित हैं। वे आर्थिक रूप से आदर्श वर्ग के बच्चों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान करते हैं। साथ ही बीमारों के इलाज की सुविधा के लिए आवेदन करें।
फोर्ब्स 30 अंडर 30 सूची हर साल जारी की जाती है। इसमें भारत के ऐसे युवा नेताओं को शामिल किया गया है, जिनकी उम्र 30 से कम है और उनके अपने-अपने पसंदीदा काम हो गए हैं।
छोटे मियाँ का जन्म 8 अगस्त, 1995 को उत्तर प्रदेश के जंगली इलाके में हुआ। वो इस्लामिक स्कॉलर अलायमा स्कॉलर अलायशाहिया चर्च से आते हैं और अलायमा स्कोलर ताजुश्शरिया एकेडमी सोसाइटी के संस्थापक भी हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
1,000 से अधिक बच्चों को मुफ़्त कंप्यूटर शिक्षा की लत
वो अपने आला शौक़ीन ताजुश्शरिया होटल सोसाइटी के माध्यम से नि:शुल्क चिकित्सा सेवा, शिक्षा सहायता और महिला संरक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। उन्होंने अब तक 1,000 से अधिक बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई, एनईईटी, यूपीएससी और यूपी बोर्ड की कोचिंग में मुफ्त में प्रवेश दिया है। कोचिंग डेल्टा क्लासेस से 33 छात्र NEET में सिलेक्टेड डॉक्टर बने हैं, जिनमें हिंदू-मुस्लिम दोनों समाज के छात्र शामिल हैं।
1,700 लॉटरी का नि:शुल्क ऑपरेशन ऑपरेशन
बच्चों के संग्रहालय सोसायटी द्वारा बार-बार मेडिकल कैंप आयोजित किया जाता है और गरीबों को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाता है। उनके एट्रिब्यूशन से 1,700 से अधिक डिस्कों का भुगतान किया जा रहा है। इनमें कैंसर, बायपास सर्जरी, कूल्हे का ऑपरेशन, डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज शामिल है।
हर सप्ताह महिला स्वास्थ्य और उत्सव शिविर आयोजित किए जाते हैं, जहां गंभीर गरीबों का इलाज किया जाता है। कोरोना काल में भी बच्चे मियां और उनकी टीम ने कई विकलांग पीड़ितों की मदद की, ऑक्सीजन से लेकर प्लाज्मा तक की व्यवस्था की।
इसके अलावा उन्होंने लड़कियों के लिए मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल कार्यक्रम शुरू किया।
सामाजिक सेवा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2023 में चुनौती मियां को भारत सरकार के कार्यकारी मंत्रालय द्वारा ‘भारत गौरव रत्न’ सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा, उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय समकक्षों द्वारा भी सम्मानित किया गया है। कर्नाटक की भारत यूनिवर्सिटी ने सामाजिक सेवा क्षेत्र में अपने स्मारकीय कार्यों के लिए उन्हें मैड डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की है।
जमाअत रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय सिपाही हैं
नन्हें हसन खान जमात रजा-ए-मुस्तफा से जुड़े हुए हैं, जो एक सुन्नी बरेलवी संगठन है। इस संगठन की स्थापना वर्ष 1920 में पिरामिड अलास्ट में हुई थी। यह भारत और कार्टूनिस्ट बरेलवी के लिए एक केंद्रीय संस्था के रूप में काम करती है।
छोटे हसन खान ने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत बरेलवी समुदाय के एक युवा नेता के रूप में की थी, जो कि सामाजिक आंदोलन और धार्मिक शिक्षा पर केंद्रित थे। वक्त के साथ वो जमाअत रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय जनरल बने।
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नेशनल ऑफ बोर्ड एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज यानी एनबीईएमएस ने नीट पीजी 2025 के लिए क्वालीफाइंग परसेंटाइल कम कर दिया है। अब जनरल क्लास का रिवाइवल विधान कटऑफ मार्क्स 7 परसेंटाइल और ओबीसी, एससी और एसटी का 0 परसेंटाइल हो गया है। पढ़ें पूरी खबर…
