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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चाबहार पोर्ट से कंट्रोल ट्रांसफर का आरोप लगाया है। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव की वजह से हुआ। इसे लेकर पार्टी ने कांग्रेस पार्टी एक्सएक्स अकाउंट से डाउनलोड कर पोस्ट किया। इसमें कहा गया है कि मोदी सरकार ने चाबहार प्रोजेक्ट में देश की जनता को 120 मिलियन डॉलर (करीब 1100 करोड़ रुपए) दिए थे। अब ये बर्बाद हो गए हैं। कांग्रेस के इस आरोप पर विदेश मंत्रालय का भी जवाब आया है। प्रवक्ता रणधीर मार्शल ने कहा कि भारत, ईरान के चाबहार बंदरगाह से जुड़ी अपनी मंजूरी को जारी रखने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत की जा रही है। इस बातचीत में छूट पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, जो अमेरिका ने भारत को दे दिया है और जो 26 अप्रैल को खत्म होने वाली है। कैसल ने बताया कि 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में भारत को बिना शर्त छूट की जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह रोक छूट 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। भारत इस तय डिजिटल के तहत अमेरिका के साथ चर्चा कर रहा है, ताकि चाबहार पोर्ट से जुड़े काम आगे बढ़ते रहें। भारत को अक्टूबर में 6 महीने की छूट दी गई थी अमेरिकी सरकार ने पिछले साल 29 सितंबर 2018 में चाबहार बंदरगाह के लिए छूट वापस ले ली थी। इससे पहले यह छूट ईरान के खिलाफ भूमिगत देशों को चाबहार बंदरगाह पर काम करने की मंजूरी दी गई थी। हालांकि बाद में भारत को 27 अक्टूबर 2025 तक छूट दी गई थी। बाद में इसे अक्टूबर 2025 से 6 महीने के लिए बढ़ाया गया, छूट इसे 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है अमेरिका अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि वह ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है। अमेरिका का दावा है कि ईरान के बंदरगाहों, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल अपने परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और पश्चिम एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए करता है। इसी वजह से अमेरिका ईरान की आय के सभी बड़े पैमाने पर डेटा सीमित करना चाहता है, ताकि उस पर अपने निवेश पर दबाव बनाया जा सके। इसके अलावा, अमेरिका में 2018 में ईरान के परमाणु बम से बाहर के दौरे के बाद ‘मैक्सिमम डीला’ की गारंटी अपनाई जा रही है। भारत चाबहार से अफगानिस्तान को जरूरी सामान भेजने से पहले भारत को अफगानिस्तान से पाकिस्तान से एशिया के लिए रवाना किया गया था, लेकिन सीमा विवाद के कारण यह मुश्किल था। चाबहार ने यह रास्ता बनाया आसान। भारत इस बंदरगाह से अफगानिस्तान को भेजा जा सकता है और मध्य एशिया से गैस-टेल ला सकते हैं। 2018 में भारत और ईरान ने चाबहार के विकास पर सहमति जताई थी। अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारत को कुछ बांस में छूट दी थी। यह बंदरगाह पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट है, जिसे चीन बना रहा है, के लिए कोल इंडिया के लिए प्रतिष्ठा के रूप में महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस का आरोप- भारत ने चाबहार पोर्ट से कंट्रोल छोड़ा:ट्रम्प के दबाव में आए मोदी, विदेश मंत्रालय बोला- अभी भी छूट मिल रही
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