
एनएसई साल 2016 से आईपीओ लाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन को-लोकेशन केस की योजना अटकी हुई थी। इस मामले में आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज सिस्टम तक प्राथमिक पहुंच दी गई।
लंबे कानूनी विवाद के बाद एनएसई ने 2025 में ₹1,388 करोड़ के भुगतान कर निपटान का प्रस्ताव रखा था, ताकि आईपीओ की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। अब सेबी की इन-प्रिंसिपल सहमति आईपीओ के लिए जरूरी एनओसी की दिशा में बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है।
सरकार की राहत के लिए बड़ा आईपीओ
सेबी ने यह भी बताया कि सरकार ने एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर आईपीओ में अब 2.5 प्रतिशत शेयर बाजार की हिस्सेदारी बढ़ गई है। पहले यह न्यूनतम सीमा 5 प्रतिशत थी। यह बदलाव कंपनी की ओर से 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है। इससे एनएसई जैसी बड़ी दुकान के लिए आईपीओ लाना आसान हो सकता है।
एनालिस्टेड मार्केट पर टिप्पणी से सहभागी
तुहिन कांता पैजेंड ने एनएसई के स्टॉक को लेकर NSE के स्टॉक को लेकर सूचीबद्ध बाजार पर टिप्पणी करते हुए बचते से कहा कि यह मामला मंत्रालय के मुद्दों में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेटलमेंट आवेदन अभी सेबी की अलग-अलग निवेशकों की प्रक्रिया में है, लेकिन सिद्धांत नियामक के रूप में इसकी सहमति जत्थे ने चुका दी है।
एनएसई स्थिरीकरण की प्रतिक्रिया
एनएसई के सहायक निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि सेटलमेंट प्ली पर इन-प्रिंसिपल मंजूरी ‘अच्छी खबर’ है। हालाँकि, अभी तक उन्हें इस पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि जैसे ही सेबी से एनओसी मिलेगी, कंपनी डीआरएचपी (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस) को मंजूरी देने की तैयारी शुरू कर देगी।
आईपीओ की अंतिम समयरेखा
चौहान के मुताबिक, सेबी से एनओसी मीटिंग के बाद डीआरएचपी नियुक्ति में करीब चार महीने लग सकते हैं। इसके बाद रेगुलेटर की मंजूरी के साथ आईपीओ को बाजार में आने में कुल 7 से 8 महीने का समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर संभव हुआ तो इस प्रक्रिया को तेजी से करने की कोशिश की जाएगी।
सेबी के निवेश बैंकों को बंधक बनाया गया
सेबी ने निवेश बैंकों को चेताया कि रेगुलेटर को अब भी डिस्क्लोजर से जुड़ी ‘बार-बार डबलाई जा रही खामियां’ दिख रही हैं। इससे संबद्ध और संबद्धता की समझ प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में ड्यू डिलिजेंस पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं हैं और ईशू अर के अनुमोदन पर अनुमोदित हैं। सेबी कुछ स्पष्ट चीजें चाहता है।
- वर्किंग कैपिटल और कैपेक्स के अनुमान स्वतंत्र रूप से जांच।
- कैपिटल लेक में बैटरी फंडिंग, प्रीफरेंसियल अलाउमेंट और कंट्रोल में बदलाव स्पष्ट रूप से साफा पर नामांकन में।
- बिजनेस मॉडल में रेवेन्यू और कॉस्ट के ड्राइवर्स स्पष्ट हैं।
- इंजीनियरिंग डिस्कशन एंड एना सब (एमडी एंड ए) का केवल विवरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग के आंतरिक और बाहरी विशेषज्ञों को भी समझाएं।
सेबी के मुताबिक, इन कंपनियों के रेगुलेटरी सवाल बढ़ रहे हैं और कंपनियों की फंडरेजिंग टाइमलाइन लंबी हो गई है।
कुल मिलाकर, एनएसई के सेटलमेंट पर सेबी की इन-प्रिंसिपल सहमति और आईपीओ में न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश परिमाण को बढ़त की सरकारी मंजूरी- दोनों संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े रिव्यू के आईपीओ को नई रेटिंग दे सकते हैं। अब बाजार की नजर सेबी की प्रभावी एनओसी और उसके बाद आईपीओ की टाइमलाइन पर टिकी है।
(एजेंसी से एंटरप्राइज़ के साथ)
