धर्मनगरी डोंगरगढ़ में एक ऐतिहासिक दिन! 12 जनवरी 2026, सोमवार को 108 पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी ससंघ (25 मुनिराज) का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। साधर्मी बंधुओं ने जोर-शोर से ‘भगवान की जय! गुरुदेव की जय!’ के नारों से मुनिसंघ का हार्दिक स्वागत किया।
[शोभा यात्रा की क्लिप्स]
जैसे-जैसे मुनिसंघ आगे बढ़ा, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी ने घरों के सामने रंग-बिरंगी रंगोलियां सजाईं, आरती उतारी, पाद प्रक्षालन किया और हर्षोल्लास से अभिनंदन किया। शोभा यात्रा पंडित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय से कचहरी चौक, भगत सिंह चौक होते हुए श्री दिगंबर जैन मंदिर पहुंची।

[मंदिर और जैन भवन की क्लिप्स]
मुनिसंघ ने भगवान के दर्शन किए। जैन भवन में श्री दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष श्री अनिल जैन, कोषाध्यक्ष श्री जय कुमार जैन, सचिव श्री सुरेश चंद जैन ने श्रीफल, तिलक और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मंगलाचरण से कार्यक्रम शुरू हुआ।

[प्रवचन हाइलाइट्स]
108 पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी का मार्गदर्शक प्रवचन: “जीव दया सर्वोपरि है! एक चींटी की जान बचाना भी दया धर्म और अहिंसा का मार्ग है। जीव की कभी मृत्यु नहीं होती—वह कर्मानुसार मनुष्य, तिर्यंच, देव या नारकी पर्याय में भ्रमण करता रहता है। जैसे जल शीतल और अग्नि उष्ण है, वैसे हर कार्य का कारण होता है, लेकिन धर्म तो धर्म ही है!”

मुनिसंघ की आहार चर्या डोंगरगढ़ में हुई। श्री अनिल जैन परिवार को महाराज जी को नवधा भक्ति से आहार कराने का सौभाग्य मिला—समस्त जैन समाज ने उनका पुण्य अनुमोदित किया।
[चंद्रगिरि दर्शन की क्लिप्स]
दोपहर में मुनिसंघ चंद्रगिरि तीर्थ पहुंचे—108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की समाधि स्थली के दर्शनार्थ। यहां 105 आर्यिका श्री सिद्धांतमति माता जी ससंघ, प्रतिभास्थली की छात्राओं और ब्रह्मचारिणी दीदियों ने रंगोलियां, आरती और पाद प्रक्षालन से स्वागत किया।

[क्लोजिंग शॉट: धन्यवाद]
कार्यक्रम सफल बनाने पर श्री अनिल जैन और सेठ सिंघई किशोर जैन ने सभी को धन्यवाद दिया। जय जिनेंद्र! जय विशुद्धसागर महाराज जी!
