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- जी एडवांस्ड अडेप्टिव लर्निंग के पैटर्न में हो सकता है बदलाव का सुझाव
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी आईआईटी एंट्रेंस सोसायटी का पैटर्न बदला जा सकता है। भरतपुर, आईआईटी काउंसिल ने जेईई एडवांस्ड के पैटर्न में बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। आईआईटी काउंसिल, आईआईटी के संचालन की सर्वोच्च विशेषता वाली संस्थाएं हैं, जिसमें सभी 23 आईआईटी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री शामिल हैं।
अब जेईई एडवांस्ड को ‘एडेप्टिव टेस्टिंग (अनुकूली परीक्षण)’ के पैटर्न पर आयोजित करने का निर्णय लिया जा सकता है।
एडेप्टिव टेस्टिंग एक इलेक्ट्रानिक और एडवांस्ड एग्जामिनेशन सिस्टम है। इसमें छात्रों से मिलने के लिए उनकी क्षमता के अनुसार प्रश्न हल करने होंगे। जैसे-जैसे छात्र प्रश्नों के उत्तर देते हैं, वैसे-वैसे अगला प्रश्न आसान या कठिन होता है।

गुणवत्ता और क्षमता वाले अभ्यर्थी के सिलेक्शन के लिए एडेप्टिव परीक्षण को एक प्रभावशाली पद माना जाता है। इससे विद्यार्थी की प्रश्न हल करने की क्षमता (प्रश्न समाधान कौशल) का सही आकलन हो जाता है।
एडेप्टिव टेस्ट में विद्यार्थियों को उनकी क्षमताओं के आधार पर कैलिब्रेट किया जाता है। प्रश्न नीचे दिए गए हैं। इसके आधार पर दो तरह का सारांश होता है-
- एक्यूरे: छात्र कितना सही उत्तर दे रहा है।
- क्षमता: वह सबसे निचले स्तर तक प्रश्न हल कर सकता है।
जब दोनों पैमानों में चयन किया जाता है, तो बेहतर और बेहतर फिल्मांकन प्रक्रिया सुनिश्चित होती है। इससे केवल सब्जेक्ट नॉलेज ही नहीं, बल्कि स्पेशल स्पेशल एबिलिटी और नमकीन सॉल्विंग शोरूम वाले छात्र ही परीक्षा में सफल हो जाते हैं।
जेईई एडवांस्ड में एडेप्टिव परीक्षण के 5 उद्देश्य
- छात्रों पर परीक्षा का मानसिक दबाव कम करना।
- रत्ने (मेमोरी-बेस्ड) के बजाय समझ आधारित चयन सुनिश्चित करना।
- क्रिटिकल थिंकिंग, लॉजिकल रिजनिंग और वैज्ञानिक क्षमताओं के आधार सिल परफेक्शन।
- कोचिंग-केंद्रित तैयारी के प्रभाव को सीमित करना।
- पेपर लीक और परीक्षा एसोसिएटेड साइंटिस्टों पर नियंत्रण।
स्ट्रेस का कनेक्शन पैटर्न से नहीं
शिक्षाविद् का मानना है कि छात्रों का स्ट्रेस सीधे तौर पर पर्यटकों की यात्रा पर नहीं जाता है। स्ट्रेस एक अलग मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो मुख्य रूप से उच्च प्रतिस्पर्धा, सीमित सीटें और सामाजिक अपेक्षाओं यानी सामाजिक क्षमताओं से पैदा होती है, इसलिए केवल परीक्षा को एडेप्टिव बनाने से यह मन लेता है कि छात्रों का तनाव आपके लिए कम हो जाएगा, व्यावहारिक रूप से सही नहीं लगता।
कोचिंग पर कोचिंग नहीं होगी कम
इसी तरह, कोचिंग पर कोचिंग कम होने के दावे को भी थोड़ी सावधानी से देखा जाता है। क्योंकि एडेप्टिव टेस्टिंग सिस्टम वाले इंटरनेशनल एग्जामिनेशन जैसे- जीआरई, जीमैट, टीओईएफएल और आईईएलटीएस- के लिए भी बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग लेते हैं। फ़ेट बस इतना है कि वहां कोचिंग का रास्ता और फोकस बदल जाता है, लेकिन कोचिंग की भूमिका पूरी तरह ख़त्म नहीं होती।
कोचिंग, एडेप्टिव परीक्षण से यह निश्चित रूप से हो सकता है कि कोचिंग का स्वरूप परिवर्तन-रतने की बजाय रणनीति, लॉजिक और समय संतुलन पर जोर दिया जाए। लेकिन यह मान लिया गया कि इससे कोचिंग पर पोर्टफोलियो खत्म हो जाएगा, स्क्विडेंस पर इसका ठोस संकेत नजर नहीं आएगा।
कुल मिलाकर, एडेप्टिव परीक्षण को परीक्षा में सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है, लेकिन तनाव और कोचिंग जैसे संबंधित प्रभावों को लेकर अतिशयोक्ति पूर्ण दावा करने से बचना चाहिए।
अभी बाकी तय करते हैं सेक्शन-वार टाइम
अभी तक जेईई एडवांस्ड का 3 घंटे का पेपर होता है, जिसमें छात्रों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (पीसीएम) – तीन विषयों के प्रश्न हल होते हैं। इस सिस्टम में समय का बँटावारा छात्र स्वयं करता है। यानी किसी स्टूडेंट को 45 मिनट दे, फिजिक्स को 45 मिनट दे, केमिस्ट्री को 30 मिनट दे और मैथ्स को 30 मिनट दे- इस पर कोई रोक नहीं है।
लेकिन अगर एडेप्टिव टेस्टिंग सिस्टम लागू होता है, तो परीक्षण का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा।

एडेप्टिव टेस्ट में सवाल पहले से तय नहीं होंगे, और छात्र किसी एक सेक्शन पर हास्य समय नहीं लगा पाए।
एडेप्टिव सिस्टम में कंप्यूटर छात्रों के हर उत्तर के आधार पर अगला प्रश्न पूछा जाएगा। इसका मतलब यह है कि दोनों के मामले में परीक्षा समय और प्रश्न अधिक मात्रा में कंट्रोल्ड और लार्ड होंगे। ऐसे में एडेप्टिव मॉडल, एस्टीमल जेईई एडवांस्ड पैटर्न से काफी अलग और नए एक्सपीरियंस होंगे।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एकल एडेप्टिव मॉक टेस्ट होगा
आईआईटी काउंसिल ने सुझाव दिया है कि जेईई एडवांस्ड के परीक्षा पैटर्न में कोई भी बदलाव करने से पहले छात्रों का डेटा एकत्र किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बिना डेटा के सीधे बदलाव करना सही नहीं होगा। इसी उद्देश्य से यह तर्क दिया गया है कि जेईई एडवांस्ड से पहले एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक कोचिंग एडेप्टिव मॉक टेस्ट आयोजित किया जाए।
- यह मॉक टेस्ट पूरी तरह से तैयार किया जाएगा।
- इसका उद्देश्य छात्रों को अडाना और सिस्टम को परखना होगा, न कि चयन करना।
यह एडेप्टिव मॉक टेस्ट जेईई एडवांस परीक्षा करीब दो महीने पहले आयोजित की गई थी, ताकि,
- विद्यार्थियों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया।
- एडेप्टिव सिस्टम की इन्वॉल्व समझ जा सके।
- साथ ही यह तय किया जा सकता है कि भविष्य में पैटर्न जैसा कोई नहीं होगा।
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