
इंडिया टीवी के एनालॉग एवं एसोसिएट-इन-चीफ रजत शर्मा।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को कहा कि 4 जून को जनता का फैसला क्या होगा, ये साफा सामने आया है। या किसी भी विरोधी दल को इतनी ऊंचाई पर भी नहीं कहा जा सकता कि किसी विरोधी दल के नेता के लिए आवश्यक कांग्रेस के प्रमुख (55) मिल की विशिष्टता। मोदी ने कहा कि ये बात विरोधी विचारधारा के नेताओं की समझ में आ गई है, इसलिए अब छोटे-छोटे विचारधारा के लोगों का कांग्रेस में विलय करने की सलाह दी गई है ताकि कम से कम विचारधारा की सहमति मिल सके। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि 4 जून को बीजेपी की विदाई तय है, सरकार इंडिया अलायंस की होगी, वो शर्त लगा सकती है कि बीजेपी 400 तो दूर, 200 की बढ़त भी नहीं ले पाएगी। अखिलेश यादव ने कहा कि 200 तो बड़ी बात है, बीजेपी 140 का आंकड़ा पार करने को भी तरसेगी। ममता बनर्जी ने भी यही बात कही। उन्होंने तो यह भी बताया कि किस तरह से बीजेपी की उत्पत्ति स्थल- जहां कम हो रही हैं, किन-किन राज्यों में बीजेपी की हरियाली वाली है। विन्द कृष्णा ने भी ऐलान कर दिया कि अब मोदी प्रधानमंत्री नहीं, बीजेपी हारेगी। राहुल गांधी ने तो 4 जून को सरकार बनने के बाद सबसे पहला फैसला लिया कि कौन सा इसे लॉन्च भी कर देगा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधीवादी हैं। 4 जून तो क्या, भविष्य में भी कभी कांग्रेस की सरकार नहीं बनेगी। मोदी के नाम की लहर नहीं, सुनामी है। अमित शाह ने दावा किया कि पहले 4 चरणों में सरकार ने पैदल यात्री (272 से अधिक) बनाए थे, तो मिल ही दिए हैं, बचे हुए तीन चरणों में हम 400 पार जाएंगे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ये भी कहा कि एनडीए को चार सौ सीटें क्यों मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब 300 से अधिक पूजा के बाद अयोध्या में राम मंदिर बने, तो 400 से अधिक पूजा के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की ईदगाह मस्जिद में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर बने।
विपक्ष के सारे नेता ज़ोर-ज़ोर से कह रहे हैं कि इस बार मोदी हार जाएंगे और जब वो ये सामान बेचेंगे तो कभी-कभी लगता है कि इन शैतानों में कुछ तो दम होगा। लेकिन अगर हम पांच साल पहले दोनों पक्षों की तुलना करें तो समझ आ जाएगा कि विरोधी नेताओं के दावे कितने बचकाने हैं। ये मैं आपको प्रमाणित करता हूं। पांच साल पहले 2019 के चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी जी डरे हुए हैं, बीजेपी बुरी तरह हारने वाली है। हुआ। कांग्रेस को बहुत बुरा नुकसान हुआ। मैं आपको एक डेट गिनवा बता सकता हूं। 12 मई 2019 को वोट देने के बाद राहुल गांधी ने कहा था- ‘ये चुनाव प्रचार, किसानों की समस्या, गब्बर सिंह टैक्स और राफेल में कमी जैसे मुद्दे चल रहे हैं, चुनावी प्रचार के दौरान बीजेपी ने विपक्ष का इस्तेमाल किया और हमने प्यार का इस्तेमाल किया गया और 23 मई को प्यार जीतेगा। बीजेपी हारेगी।’ हुआ। राहुल हार गए। जहर की सीट भी हाथ से कट गई।
17 मई 2019 को खरगौन की रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा कि अबकी बार 300 पार और फिर एनडीए सरकार ही बनेगी। जो हुआ। अमित शाह के तो कई बयान हैं। 15 मई 2019 को अमित शाह ने कहा कि बीजेपी बंगाल 23वें में जीतेगी। ममता बनर्जी ने 13 मार्च 2019 को दावा किया था कि बीजेपी को बंगाल में एक भी सीट नहीं मिलेगी, ओपीडी कांग्रेस बंगाल में क्लीन डिविजन में रहेगी। नैमित्तिक गलत साबित हुआ। बीजेपी 18 लॉन्च और ममता की पार्टी 38 से 22 पर। अमित शाह सही साबित हुए। इसी तरह ममता ने ये भी कहा था कि देश में बीजेपी को 100 सीटें भी नहीं मिलेंगी। उनके जवाब में 17 मई 2019 को अमित शाह ने कहा कि बीजेपी फिर से 300 से ज्यादा बार सबसे ज्यादा वोट हासिल करेगी, नरेंद्र मोदी एक बार देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। अमित शाह फिर एक बार सही साबित हुए।
अब मैं आपको समाजवादी यादव के दावे के बारे में बताता हूं। 20 मार्च 2019 को समाजवादी पार्टी ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी यूपी की सभी 80 सीटें जीतेगी लेकिन जब नतीजे आएंगे तो एनडीए को कुल 80 में से 64 सीटें मिलेंगी और समाजवादी पार्टी को सिर्फ पांच सीटें मिलेंगी, कांग्रेस को एक. इसलिए अगर सिर्फ संतों की बात की जाए तो विरोधी संप्रदाय के दावे बिल्कुल गलत साबित होते हैं। लेकिन मोदी इस बात की ज्यादा परवाह नहीं करते कि उनकी पार्टी अपनी तरफ से बढ़त बना रही है। वो हर हालत में मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ते और हर रोज विरोधी आश्रम को मुश्किल में डालने वाला एक नया सामान उठाते हैं। रविवार की शाम को मोदी ने मुंबई में एक रोड शो निकाला जिसमें हजारों मुंबईकरों ने उनका स्वागत किया। (रजत शर्मा)
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