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Statue of Unity sculptor Ram Sutar passes away | ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के शिल्पकार राम सुतार का निधन: बढ़ई परिवार में जन्मे, पिता से छेनी-हथौड़ी चलाना सीखा; 1,150 से ज्यादा मूर्तियां बनाईं

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3 मिनट पहले

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‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसी गणपति आभूषण के रचयिता राम वनजी सुतार का गुरुवार, 18 दिसंबर को निधन हो गया। वो 100 साल के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

सुतार ने संसद भवन परिसर में ध्यान मुद्रा में बैठे महात्मा गांधी की मूर्ति और दिल्ली में घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी की प्रतिष्ठित प्रतिमा भी बनवाई थी। सुतार का मतलब बढ़ई होता है.

पिता से चेनी-हथौड़ी ट्रेन

महाराष्ट्र के एक बढ़ते परिवार में साउदी राम सुतार के पिता बढ़ई का काम करते थे। साथ ही खेती के उपकरण, तालाब और बैल खोदे गए। बचपन में राम सुतार अपने पिता के साथ काम करते थे। जापानी से चेनी-हथौड़ी गाइड।

गाँव से ही प्रारंभिक पढ़ाई हुई

चौथी तक गांव में पढ़ाई। इसके बाद 5वीं और छठी की पढ़ाई की। फिर कूड़ा-कचरा चला गया। कूड़ा-करकट से उन्होंने प्लास्टरबोर्डिंग की। इसके विपरीत, उनके सहयोगी ड्रूइंग टीचर श्री रामकृष्ण जोशी से हुई। जोशी से जब राम सुतार ने कला के प्रति रुझान देखा तो उन्हें बहुत नापसंद किया गया।

ड्रिंग टीचर ने जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स भेजा

जोशी की ही वसीयत से शेयरधारकों के बाद राम सुतार मुंबई आ गए और जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स में कब्जा कर लिया गया। यहां से उन्होंने कला की कलाकृतियां सीखीं। जोशी जी ने मुंबई में अपनी जीवनशैली का पालन-पोषण यहीं कर लिया।

राम सुतार ने जेजे स्कूल में 5 साल का कोर्स किया और 4 साल में कंप्लेंट किया। यहां वो गोल्ड मेडलिस्ट रह रहे हैं।

4 साल अजंता और एलोरा की गुफाओं पर काम किया

कॉलेज से प्रस्थान के बाद उन्होंने कर्मकार नाम से एक कल्पचर के यहां काम किया। यहां एक मार्बल की कुर्सी पर एक महिला की मूर्ति बनाई गई है। इसके बाद उन्हें अजंता और एलोरा की गुफाओं में सुधार और संरक्षण के लिए शहर में नौकरी मिल गई। वो यहां 4 साल रहे। यहां पर साजिद पुरानी और पुरातत्वविदों को सही ठहराया गया है।

सुतार राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमा बनाने के लिए प्रसिद्ध थे। (फ़ॉलो फोटो)

सुतार राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमा बनाने के लिए प्रसिद्ध थे। (फ़ॉलो फोटो)

सरकारी नौकरी ऑनलाइन खरीदें

आगे वो दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने डीएवीपी यानी डायरेक्टरेट ऑफ एडवर्टाइजिंग एंड विजुअल पब्लिसिटी को ज्वाइन किया। उन्होंने डीएवीपी में काम किया।

इसी दौरान उन्हें दिल्ली के प्रगतिशील मैदान में एक मूर्ति बनाने का काम पता चला। वहाँ गए और 13-13 फ़ुट के फार्मर्स की 2 मूर्तियाँ बनाईं-कोपल एक घोड़ा और स्टैंडिंग फार्मर की।

राम सुतार की सरकारी नौकरी होने से उन्हें इस तरह का काम नहीं मिला था। ऐसे में उन्होंने अपने पैड से रिजाइन कर दिया। फिर कुछ ही दिनों बाद उनकी संसद में अशोक स्तंभ का निर्माण कार्य मिला। इसके बाद ये रेस्तरां चल रहा है।

बड़ी मूर्तियां बनाने की चाहत है

सुतार ने 1942 में पहली मूर्ति बनवाई थी। उन्होंने जीवनभर में 1,150 से अधिक मूर्तियां बनाईं। भारत के बाहर भी कई देश राम सुतार की बनी हुई दुकानें से बने हुए हैं। संसदीय क्षेत्र में मौजूद ध्यान मुद्रा में बैठे महात्मा गांधी की प्रतिमा को बहुत सराहा गया।

सुतार ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्हें बड़ी गुड़िया बनाने की इच्छा हेरिडीटी यानी स्थापित की गई थी। पिता जी गणेश भगवान की बड़ी मूर्तियां बनीं। जीन से बड़ी मूर्ति बनाने की इच्छा सुतार के जीन में आई।

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