सेवांग रिग्जलेह-लद्दाख से3 मिनट पहले
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4 फरवरी को विपक्ष के लोगों ने प्रर्दशन कर मांग की थी कि विपक्ष को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, संविधान की सैद्धांतिक व्यवस्था लागू की जाए और लेह और कारगिल को संसद में अलग-अलग जगह दी जाए।
समाजवादी संसदीय सीट की लड़ाई में बेहद दिलचस्प बदलाव आया है और प्रचार-प्रसार के साथ-साथ विकास के नतीजे भी साफ नजर आ रहे हैं। यहां भाजपा या कांग्रेस पार्टी के एकजुटता मजबूत स्थिति में है।
कारगिल से आने वाले इस विचारधारा को भारत के खेमे के दल के राष्ट्रीय सम्मेलन का समर्थन हासिल है और कारगिल की कांग्रेस इकाई के बजाय इसी विचारधारा के साथ मिलकर काम करना है। कुल मिलाकर, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सोते हैं, शांत जल में मछलियाँ पकड़ रहे हैं।

यहां 2014 से बीजेपी स्वीकृत है, लेकिन इस बार उसका नंबर पहले जैसा नहीं है। दो महीने से युवाओं में हो रहे प्रदर्शनों ने बीजेपी को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है।
बीजेपी ने अपने मुस्लिमों के टिकटें अनब्लॉक कर दीं
अविश्वास में 2014 से भाजपा स्वीकृत है, लेकिन इस बार उसके लिए गुणांक पहले जैसा नहीं है। पार्टी ने अपनी पार्टी के स्थायी उम्मीदवार जामयांग त्सेरिंग नामग्याल का टिकट काट दिया है। 370 के खतमे के दिन नामग्याल का संसद में दिया गया भाषण पूरे देश में ख़त्म हो गया था।
अब पार्टी ने अपनी जगह ताशी ग्यालसन को बनाया है। इससे पार्टी के अंदर दरार और अविश्वास स्पष्ट दिखता है। टिकट कटने पर नामग्याल की तस्वीर सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शोक व्यक्त किया।
इसके बाद जामयांग, ग्यालसन ने प्रचार के लिए तस्वीरें खींचीं, लेकिन दो महीने से जारी असंतोष में चल रहे प्रदर्शनों ने बीजेपी को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। ये प्रदर्शन जागरूकता को राज्य का सिद्धांत और विचारधारा को संविधान की छठी अनुसूची के तहत लाने के लिए आ रहे हैं। इसके समर्थन में लोगके की तलाश में 66 दिन तक भूख हड़ताल पर भी रह रहे हैं।

पूर्ण राज्य के अभिलेखों की मांग को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया।
असमंजस को लेकर अब तक नहीं निकला ठोस नतीजा
भाजपा ने पिछले दो घोषणापत्रों में विचारधारा को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने का वादा किया था। एक बार 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान और फिर 2020 में स्वामिन पर्वतीय विकास परिषद (इलाज़िया एचडीसी) लेह चुनाव के दौरान। हालाँकि, कुछ साल बाद पार्टी और केंद्र के नेता नाखुश होकर जनता से अलग हो गए।
अविश्वास के नेताओं और गृह मंत्रालय के बीच कई दौर की बैठकों में ठोस नतीजे नहीं निकले। इस साल 4 मार्च को आखिरी बैठक में सरकार ने मासूमियत को खारिज कर दिया। इसकी 6 मार्च को भूख हड़ताल शुरू हुई और 10 मई को राष्ट्रपति पद के लिए निलंबित कर दिया गया।
भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार एक ही परिषद के सदस्य
भाजपा के उम्मीदवार ताशी ग्यालसन वर्तमान में अल्पना द्वीप विकास परिषद लेह के अध्यक्ष हैं, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार त्सेरिंग नामग्याल इसी परिषद में नामांकन का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों अभ्यर्थी लेह जिले में रहने वाले हैं। कारगिल जिले में पूर्व इलिनोइस एचडीएफसी के अध्यक्ष हाजी हनीफा जान को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नियुक्त किया गया है।
करगिल में 95,928 मगरमच्छ हैं, जबकि लेह में दो आदिवासियों के साथ केवल 88,845 मगरमच्छ हैं। लेह के लिए करगिल से महत्वपूर्ण वोट हासिल करना असंभावित लग रहा है। ऐसे में हाजी हनीफा के लिए ये लड़ाई आसान हो गई।
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