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- नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नर्गेस मोहम्मदी ईरान में गिरफ्तार, पूरी प्रोफ़ाइल देखें
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ईरान के ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट और नोबल पीस पुरस्कार विजेता नर्गिस मोहम्मदी को ईरानी इब्राहिम ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है। 53 साल की नरगिस, ईरान के मशहद शहर में एक मानवाधिकार वकील खोसरो अलीकार्डी की शोक सभा में शामिल हुई थीं।
नरगिस के पेरिस स्थित ‘नरगिस फाउंडेशन’ ने बताया कि उनके और उनके साथी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, नॉर्वे की नोबल कमेटी ने अपराधियों की निंदा करते हुए ईरान के अधिकारियों से नरगिस को बिना शर्त शर्त लगाने की मांग की है।
नरगिस मोहम्मदी 2021 से तेहरान की गुलाम एविन जेल में थी, लेकिन दिसंबर 2024 से मेडिकल समस्या के मछली पकड़ने की जगह बहार आई हुई थी।

मामा और भाई को फाँसी दी गई तो क्रांतिकारियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई गई
नरगिस मोहम्मदी के मामा एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे। साल 1978 में ईरानी क्रांति के दौरान मामा को जेल में डाल दिया गया था। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक- उस वक्त नरगिस यंग और उनकी मां लोकल न्यूज के बारे में रुकी हुई थीं ताकि उनकी जांच की जा सके।
1981 में मोहम्मदी ने अपनी मां को जमीन पर डूबते हुए देखा था। उस समय उनकी मां के प्रेमी यानी नरगिस के चचेरे भाई को फांसी दे दी गई थी। कुछ समय बाद उनके मामा को भी फाँसी दे दी गई। इसके बाद ही नरगिस ने ईरान में राजनीतिक और महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाना शुरू कर दी थी।
जेल में ही अनोखा पुरस्कार
नरगिस मोहम्मदी को साल 2023 में नोबल पीस प्राइज के लिए चुना गया था। ये पुरस्कार पाने वाली ये ईरान की दूसरी महिला हैं। ईरान में आतंकवादियों और राजनीतिक बंदियों के खिलाफ हो रही महिलाओं को समर्थन के लिए लड़ाई लड़ने के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने ईरान में मौत की सजा के खिलाफ भी आवाज उठाई थी।

जेल में बंद ईरानी ईरानी एक्टिविस्ट नरगिस मोहम्मदी के बच्चे अली और रहमानी ने 2023 में नोबेल पुरस्कार जीता।
नोबेल समिति के प्रमुखों ने उन्हें ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहा था। जब उन्हें यह पुरस्कार मिला तब वो तेहरान की एविन जेल के अंदर थे। यह पुरस्कार उनके बच्चों ने लिया जो कि पेरिस में रहते हैं। नरगिस ने अपनी किताब ‘व्हाइट स्काटर: इंटरव्यूज विद ईरानी वुमन प्रिजनर्स’ में अपने और 12 कैदियों के जेल के अनुभवों को लिखा है।
नरगिस को 31 साल की सजा, 154 कोडो की सजा
नर्गिस मोहम्मदी पिछले 30 वर्षों से ईरान में मानवाधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं। इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। वो अभी तक 13 बार गिरफ्तार हो चुके हैं।
पहली बार उन्हें 2011 में राजपत्र में लिया गया था। इसके बाद 2015 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ दुष्प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार कर जंजन की सेंट्रल जेल में रखा गया था। इसके बाद 2020 में नरगिस को सजा कम होने पर रिहा कर दिया गया था।
उनके ‘नरगिस फाउंडेशन’ के मुताबिक नरगिस को 31 साल और 154 कोडो की सजा सुनाई गई है। हालाँकि उन्हें कोडोज़ की सज़ा अभी तक नहीं दी गई है।
महसा आंदोलन में जेल से लिखती रही नर्गिस
सितंबर 2022 में ईरान में हिजाब के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन में 22 साल की महसा अमीनी को ईरान की पुलिस ने ड्रेस कोड का पालन नहीं करने के आरोप में हिरासत में लिया था। इसके बाद पुलिस कस्टडी में ही अमीनी की मौत हो गई।
अमीनी की मृत्यु ईरान में प्रदर्शन और बुरा हुआ था। इस दौरान नरगिस ने जेल से कहा था कि -‘ईरानी महिलाओं के खिलाफ धर्मतांत्रिक सत्तावादी शासन के आंदोलन’ का प्रतीक बन गया है।’
उसी समय न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए फ़ोल्डेड नर्गिस ने कहा था कि – “सरकार को शायद यह समझ नहीं आ रहा है कि वे हममें से अधिक लोगों को जेल में डालेंगे, हम एकजुट ही मजबूत होंगे।”
पति और बच्चों को देश छोड़ना पड़ा था
नरगिस मोहम्मदी ने 1999 में कॉलेज की दोस्त ताघी रहमानी से शादी की थी। रहमानी ईरान में राजनीतिक कार्यकर्ता थे। साल 2006 में नरगिस और रहमानी के दो जुड़वां बच्चे हुए, एक बेटा और एक बेटी।

अपने जुड़वां बच्चों के साथ नरगिस मोहम्मदी
2009 में नरगिस के दस्तावेज़ पर उनके पासपोर्ट पर कब्ज़ा कर लिया गया था। इसके बाद उनकी पत्नी रहमानी और बच्चे ईरान चले गए और फ्रांस में रह गए। नरगिस अपने पति और बच्चों से मिल भी नहीं रिश्तेदार हैं।
माँ मोरी – माँ कुमारी
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