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वेनेजुएला की लीडर ऑफ अपोजीशन और नोबेल पीस प्राइज विनर मारिया कोरिना मचाडो को रविवार, 10 दिसंबर को 11 महीने बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से देखा गया। वो नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में एक होटल की सलामी से अपने पिता को हाथ में लेकर शेयर करते हैं।

होटल के बाहर मचाडो के समर्थक ‘फ्रीडम-फ्रीडम’ के नारे लगा रहे थे।
इससे पहले मचाडो की बेटी एना को ओस्लो में आयोजित समारोह में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। मचाडो सुरक्षा जोखिम और यात्रा बैंड के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकतां। ऐसे में उनकी जगह उनकी बेटी एना कोरिना सोसा मचाडो ने रिकवर किया।
समारोह के दौरान मचाडो की कुर्सी को ऐतिहासिक रूप से खाली कर दिया गया, जो वेनेजुएला के लोकतंत्र की लड़ाई में उनकी मजबूरी और दोस्ती दोनों को अलग कर देता है।
एना ने इवेंट में अपनी मां का लिखा भाषण भी पढ़ा। मचाडो ने अपने लिखित भाषण में कहा, लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष आवश्यक है। यह पुरस्कार वेनेजुएला ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।

1992 में एटेनिया फाउंडेशन की स्थापना
फाइनेंस में मास्टर डिग्री के बाद मचाडो ने वेलेंसिया में ऑटो इंडस्ट्री में काम किया। उनके पिता वेनेजुएला में स्टील बिजनेस करने वाले बड़े बिजनेसमैन थे। उन्होंने 1992 में एटेनिया फाउंडेशन बनाया। यह संस्था कराकास शहर में बच्चों की शिक्षा और कल्याण के लिए प्रशिक्षण और प्रशिक्षण का काम करती है। इस फाउंडेशन के माध्यम से मचाडो ने सामाजिक सुधार की दिशा में अपनी पहचान बनाई।

सुमेट ऑर्गनाइज़ेशन की उत्पत्ति
साल 2001 में एक होटल की लॉबी में मारिया कोरिना मचाडो और इंजीनियर से नेता बने एलेजांद्रो प्लाजा की अचानक झलक दिखी। दोनों अपने देश वेनेजुएला के चमत्कारी हालात को लेकर बहुत चिंतित थे। इसी सोच के साथ दोनों ने मिलकर मिलकर सुमाते (सुमाते) ऑर्गेनजाम बनाया। ये इंडिपेंडेंट और स्टॉल पोस्ट के लिए काम करता है। मारिया इस ऑर्गनाइज़ेशन की को-फाउंडर बनीं।
2010 में नेशनल असेंबली की सदस्य बनीं
वर्ष 2004 में वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली और राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ को हटाने के लिए एक कम्युनिस्ट पार्टी की शुरुआत हुई। इस कॉम्पैक्ट सुमेट ऑर्गनाइजेशन के बैनर की शुरुआत हुई। फिर उन्होंने रेफ़रेंडम अर्थात जनमत संग्रह पुस्तकालय को याद किया।
इसके लिए सरकार ने सुमाते के कई सदस्यों में मारिया कोरीना मचाडो को भी शामिल किया है, जो कि कथानक और कथानक का मामला है।
2010 में वो वेनेजुएला की नेशनल असेंबली मेंबर बनी। लेकिन 2014 में लोकतंत्र और स्वतंत्रता की आवाज उठाने के कारण सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया। इस कदम से मचादो देश और दुनिया भर में लोकतंत्र की बड़ी आवाज बनें।

मारिया कोरिना विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल यंग लीडर्स प्रोग्राम (2005) के लिए सिलेक्ट वाली पहली वेनेजुएलावासी हैं।
राष्ट्रपति पद के उद्घाटन के बाद रिपब्लिकन में आये
मचाडो पहली बार टैब में तब आया जब उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति का भाषण बंद कर दिया था। यह घटना 14 जनवरी 2012 की है। राष्ट्रपति शावेज़ संसद में भाषण दे रहे थे। उसी मचाडो ने चिल्लाते हुए उन्हें चोर कहा और लोगों की संपत्ति को जब्त कर वापस लाने को कहा। इस घटना में यूनेस्को की चर्चा का विषय बन गया और अपोजीशन का मंचो लीडर बन गया।
2013 में वेंते वेनेजुएला पार्टी बनी
मारिया ने साल 2013 में ‘वेंटे वेनेजुएला’ (वेंटे वेनेजुएला) नाम से एक उदारवादी पॉलिटिकल पार्टी बनाई और अपनी नेशनल कन्वीनर बनीं। अपने पूरे करियर में मचाडो ह्यूगो शावेज़ और निकोलस मादुरो दोनों की खोज की अगली कड़ी। वे हमेशा लोकतांत्रिक, लोकतंत्रवादी और कानून के शासक की तरह बने रहते हैं।
वेनेजुएला सरकार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की
वर्ष 2023 में मचाडो ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए कैथोलिक नामांकन बनाया। इसके तुरंत बाद वेनेजुएला सरकार ने उन्हें चुनावी मैदान में उतार दिया। फिर एडमंडो गोंजालेज ने अपनी जगह बनाई।
विश्लेषकों ने गणित के आंकड़े जारी किए और दावा किया कि गोंजालेज ने भारी जीत हासिल की, जबकि सरकारी नियंत्रण वाले नेशनल इलेक्टोरल काउंसिल ने बिना किसी सबूत के मादुरो की जीत की घोषणा कर दी। इसके बाद मचाडो मादुरो सरकार से अपनी जान और आजादी छीन ली गई पर मजबूर हो गए।
अक्टूबर 2025 में मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें ‘वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार के लिए उनके निरंतर प्रयास और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर से लोकतंत्र और न्यायपूर्ण बदलाव की लड़ाई’ के लिए ये सम्मान मिला।
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