-40°C तापमान, 4 KM नीचे तक बर्फ, फिर भी यहां बसती है दुनिया, जानें उस शहर का सच जहां जमीन उगलती है सोना


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Coldest City on the Earth : क्या आपको पता है दुनिया में सबसे ठंडा शहर कौन सा है. जाहिर तौर पर यह रूस में ही होगा लेकिन कहां. यह शहर रूस के साइबेरिया में स्थित है. इसका नाम याकुत्स्क. यहां -40 से -50 डिग्री तापमान समान है. बाहर निकलने पर सांसें थम सकती है और खून जम जाता है. यहां जमीन के 4 किलोमीटर नीचे तक बर्फ ही बर्फ है. लेकिन इस कठिन हालात में भी यहां एक दुनिया बसती है और जमीन के नीचे सोना और हीरा भरे पड़े हैं.

याकुत्स्क आर्कटिक महासागर से महज 350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बड़े शहरों में यह दुनिया का सबसे ठंडा शहर माना जाता है. कड़ाके की ठंड में तापमान -70 डिग्री तक चला जाता है. सर्दियों में रोशनी कम हो जाती है. बर्फीली धुंध अक्सर लगा रहता है. दृश्यता भी 5 मीटर से कम हो जाती है, जिससे पूरा शहर धुंध, बर्फ और छाया के एक ही रंग में ढका हुआ दिखाई देता है. हमलोगों के लिए तो यह शहर नरक की ठंड ही साबित हो सकती है. लेकिन हाड़ कंपा देने वाली सर्दी के बावजूद, यहां करीब 3.5 लाख लोग रहते हैं. इतना ही नहीं यह शहर दुनिया के सबसे अमीर इलाकों में से एक माना जाता है. इसका कारण है यहां मिलने वाली सोने की खानें. Photo :

GK: ప్రపంచంలోనే అత్యంత చల్లని నగరం ఇదే. ఇక్కడ శ్వాస తీసుకోవడం ప్రాణ సంకటం. భూమికి 4 కిలోమీటర్ల లోతు వరకు మంచే ఉంటుంది. ఇంతకీ ఆ నగరం ఎక్కడ ఉందంటే?

दुनिया का सबसे ठंडा शहर याकुत्स्क है. यह रूस के साइबेरिया इलाके में, सखा (याकुतिया) रिपब्लिक की राजधानी है. यहाँ की आबादी करीब 3.5 लाख है. सर्दियों में यहाँ औसत तापमान -40°C से -50°C तक रहता है. 1891 में रिकॉर्ड किया गया सबसे कम तापमान -64.4°C था. जनवरी में रोजाना न्यूनतम तापमान -42°C होता है. सूरज सिर्फ 3-4 घंटे ही दिखता है. यह दुनिया के सबसे बड़े शहरों में सबसे ठंडा शहर है. साइंस फोकस की दिसंबर 2024-26 की रिपोर्ट में यह खबर प्रकाशित हुई है.

GK: ప్రపంచంలోనే అత్యంత చల్లని నగరం ఇదే. ఇక్కడ శ్వాస తీసుకోవడం ప్రాణ సంకటం. భూమికి 4 కిలోమీటర్ల లోతు వరకు మంచే ఉంటుంది. ఇంతకీ ఆ నగరం ఎక్కడ ఉందంటే?

याकुत्स्क की कहानी 1632 में शुरू हुई थी. रूस के कोसैक्स ने लेना नदी के किनारे एक छोटा किला बनाया था. 19वीं सदी में यह जगह सोने की खान, हीरे और फर व्यापार के लिए मशहूर हो गई. लेकिन असली पहचान इसकी कड़ाके की ठंड के कारण है. यहाँ की जमीन हमेशा बर्फ से ढकी रहती है. घर, सड़कें और पाइपलाइन सबको खास तरीके से बनाना पड़ता है. जमीन के नीचे 4 किलोमीटर तक बर्फ ही रहती है.

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GK: ప్రపంచంలోనే అత్యంత చల్లని నగరం ఇదే. ఇక్కడ శ్వాస తీసుకోవడం ప్రాణ సంకటం. భూమికి 4 కిలోమీటర్ల లోతు వరకు మంచే ఉంటుంది. ఇంతకీ ఆ నగరం ఎక్కడ ఉందంటే?

जीवन कैसा होता है?: यहाँ -50°C में लोग सामान्य जिंदगी जीते हैं. कारों का इंजन रात भर चालू रखते हैं ताकि वो फ्रीज न हो जाए. बैटरी और फोन भी फ्रीज हो जाते हैं. बाहर जाते वक्त 4-5 लेयर के कपड़े, फर कोट, मास्क और बूट पहनना जरूरी है. अगर हाथ 15 मिनट तक बाहर रहें तो फ्रॉस्टबाइट हो जाता है. खुले बाजार में मछली और मांस ऐसे ही खड़े रहते हैं – वो फ्रीज नहीं होते! स्कूल तब बंद कर दिए जाते हैं जब ठंड -50°C से ज्यादा हो जाती है. घर में हीटिंग सिस्टम 24 घंटे चालू रहता है.

GK: ప్రపంచంలోనే అత్యంత చల్లని నగరం ఇదే. ఇక్కడ శ్వాస తీసుకోవడం ప్రాణ సంకటం. భూమికి 4 కిలోమీటర్ల లోతు వరకు మంచే ఉంటుంది. ఇంతకీ ఆ నగరం ఎక్కడ ఉందంటే?

याकुत्स्क के लोग (याकुत जनजाति) ठंड को अपना दोस्त मानते हैं. उनका खाना – घोड़े का मांस, सैल्मन मछली, रेनडियर – शरीर की गर्मी बनाए रखता है. हीरे की खानें, गैस और तेल यहां की अर्थव्यवस्था चलाते हैं. टूरिज्म भी बढ़ रहा है – इसे पोल ऑफ कोल्ड कहते हैं. सर्दियों के त्योहार, आइस स्कल्प्चर और डॉग स्लेजिंग यहां की खासियत हैं.

GK: ప్రపంచంలోనే అత్యంత చల్లని నగరం ఇదే. ఇక్కడ శ్వాస తీసుకోవడం ప్రాణ సంకటం. భూమికి 4 కిలోమీటర్ల లోతు వరకు మంచే ఉంటుంది. ఇంతకీ ఆ నగరం ఎక్కడ ఉందంటే?

रिकॉर्ड्स: जनवरी 2026 में भी यहाँ -71°C तक तापमान दर्ज हुआ है. यह ओयम्याकॉन गाँव (-67.7°C रिकॉर्ड) से भी बड़ा शहर है, इसलिए इसे सबसे ठंडा शहर माना जाता है. ओयम्याकॉन एक छोटा गांव है (500 लोग), इसलिए वह शहर नहीं है. याकुत्स्क की ठंड इंसान की सहनशक्ति को परखती है. लेकिन यहाँ के लोग शांति और खुशी से रहते हैं. ठंड ने उनकी जीवनशैली को बदल दिया है. यह दुनिया को एक संदेश देता है – हम किसी भी हालात में जी सकते हैं.



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