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केंद्रीय बजट 2026 में 20 नए जलमार्गों की घोषणा के साथ भारत एक बार फिर अपनी प्राचीन नदी-आधारित यात्रा और व्यापार परंपरा की ओर लौटता दिख रहा है. हजारों साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता के समय लोथल, सुतकांगेडोर और सोतका कोह जैसे बंदरगाह नदियों और समुद्र के जरिए देश को दुनिया से जोड़ते थे. अब सरकार की इस नई पहल से वही ऐतिहासिक जल-मार्ग आधुनिक रूप में दोबारा जीवित होने की उम्मीद की जा रही है. आइए जानते हैं डिटेल…
केंद्रीय बजट 2026 में 20 नए जलमार्गों की घोषणा ने भारत के उस भूले-बिसरे इतिहास को फिर से चर्चा में ला दिया है, जब नदियां और समुद्र ही देश की सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्था हुआ करती थीं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह ऐलान केवल आधुनिक लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने की योजना नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन जल-यात्रा और व्यापार परंपरा को दोबारा जीवित करने की कोशिश भी मानी जा रही है.

सदियों पहले सिंधु घाटी सभ्यता के समय भारत के कई शहर और बंदरगाह नदियों और समुद्री रास्तों से जुड़े हुए थे, जिनके जरिए देश न केवल आंतरिक व्यापार करता था, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों से भी जुड़ा हुआ था.

सिंधु घाटी सभ्यता में लोथल सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह माना जाता था. यह आज के गुजरात में स्थित था और यहां एक विकसित डॉकयार्ड मौजूद था, जिसे दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात गोदी स्थल माना जाता है. लोथल से जहाज अरब सागर के रास्ते मेसोपोटामिया, फारस और अफ्रीका तक जाते थे.
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यहां से मोतियों, मनकों, सूती कपड़ों, तांबे के औजारों और मिट्टी के बर्तनों का निर्यात होता था. सुतकांगेडोर और सोतका कोह जैसे बंदरगाह मकरान तट पर स्थित थे, जो समुद्री व्यापार के अहम केंद्र थे. इन बंदरगाहों के जरिए सिंधु सभ्यता का संपर्क पश्चिम एशिया से बना हुआ था.

प्राचीन भारत में नदियां केवल जल स्रोत नहीं थीं, बल्कि यही प्राकृतिक राजमार्ग थीं. सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जरिए आंतरिक इलाकों से सामान बंदरगाहों तक पहुंचाया जाता था. नावों और छोटे जहाजों के माध्यम से अनाज, कपास, मसाले, धातुएं और हस्तशिल्प की वस्तुएं एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती थीं. व्यापारी महीनों की यात्रा नावों में ही पूरी करते थे. नदियों के किनारे बसे शहर व्यापारिक केंद्र बनते चले गए, जिससे सभ्यताओं का विकास तेजी से हुआ.

गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा और गोदावरी जैसी नदियां भी प्राचीन काल में बड़े जलमार्गों के रूप में इस्तेमाल होती थीं. गंगा के जरिए उत्तर भारत के कई बड़े शहर आपस में जुड़े हुए थे और बंगाल के बंदरगाहों से समुद्री व्यापार होता था. दक्षिण भारत में कावेरी और कृष्णा नदियों के रास्ते मंदिर नगरों और व्यापारिक कस्बों के बीच आवाजाही होती थी.

केरल के बैकवॉटर सिस्टम के जरिए आज भी उस परंपरा की झलक देखने को मिलती है.

बजट 2026 में घोषित 20 नए जलमार्ग उसी ऐतिहासिक सोच को आधुनिक रूप देने की कोशिश हैं. सरकार का लक्ष्य है कि नदियों के जरिए सस्ता, पर्यावरण के अनुकूल और प्रभावी परिवहन विकसित किया जाए. इससे न केवल माल ढुलाई आसान होगी, बल्कि तटीय और नदी किनारे बसे क्षेत्रों का आर्थिक विकास भी तेज होगा.

यह पहल भारत को एक बार फिर जलमार्ग आधारित व्यापार की ओर ले जाने का संकेत देती है, जहां कभी लोथल और सिंधु सभ्यता के बंदरगाहों से दुनिया का व्यापार संचालित हुआ करता था. कुल मिलाकर, नए जलमार्ग भारत के अतीत और भविष्य के बीच एक मजबूत सेतु बनने जा रहे हैं.





