नई दिल्ली2 मिनट पहले
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देश में कई ऐसी दवाइयां बिक रही हैं, जो जान तक ले सकते हैं। सात महीनों में 10 औषधियों की जांच में जन्मतिथि केमिकल डाई-इथाइलीन ग्लॉकोल (डीजी) और इथाइलीन ग्लॉकोल (ईजी) का मिलान होता है। ये है 10 दवाइयों में 6 बच्चों के कफ सिरप की प्रमुखता।
ये 6 कैफ़ सिरप हैं- कॉफ़वॉन एलएस, ग्वाइफ़ेनेसिन सिरप-100, ग्वाइफ़ेनेसिन, सिलप्रो खुराक और कोल्ड आउट के दो बैच। सेंट्रल फैक्ट्री स्टैंडर्ड रेस्तरां सुपरमार्केट (सीडीएससीओ) ने अगस्त 2023 से फरवरी 2024 के बीच की जांच में ये नतीजे निकाले हैं।
ये घातक रसायन हैं, जिनसे 1-2 साल पहले गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून समेत कई देशों में 140 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। इस केस में भारतीय दवा कंपनी के बनाए कफ सिरप को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
जून 2023 से सीडीएससीओ ने कंपार्टमेंट वाले सभी कफ सिरप की लैब टेस्टिंग अनिवार्य कर दी थी। जून से अक्टूबर 2023 तक 5 महीने में 54 दवा कंपनियों के जंगल फेल हो गए। भास्कर ने फैक्ट्री कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया राजीव रघुवंशी से पूछा तो जवाब नहीं दिया।
वो सब कुछ, जो आपके लिए जानना जरूरी है…
- किस दवा में खतरनाक केमिकल की कितनी मात्रा मिली? और कितना होना चाहिए था? कफ सिरप स्टूडियो एक्सपेक्टोरेंट में 0.118% ईजी था। कोल्ड आउट में 1.9% ईजी और 0.14% डीईजी था। दिल के रोग में काम आने वाले डिजिवर इंजेक्शन में ईजी और डिजी दोनों की मात्रा अधिक मिली। एलर्जिक दवा सिलप्रो कैप्सूल सिरप में 0.171% ईजी और 0.243% डीजेआई दिया गया। ईजी या डीजी की मात्रा 0.10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- इसका साइड इफेक्ट कितने दिन में दिखता है? और किन दस्तावेज़ों से इसकी आवश्यकता हो सकती है? दवा लेने से 3-4 दिन में असर दिखने लगता है। बच्चों में डायरिया जैसे सामान्य लक्षण होते हैं, इसलिए इन्हें पहचानना मुश्किल होता है।
- देश में ऐसे कोई मामले सामने आए हैं क्या? ताजा मामला फरवरी 2024 का है। हिमाचल के सिरमौर जिले की दवा कंपनी सिक्कोर के एंटी कोल्ड सिरप कॉफवॉन एलएस में कोल्ड केमिकल ईजी की प्रचुर मात्रा मिली थी। दिसंबर 2023 में हिमाचल के ही सोलन जिले की वीवी दवा कंपनी के सिरप जेलकोरिल एलएस सिरप में डीजी प्रमुखता मिली थी। इससे पहले जनवरी 2020 में हिमाचल की दवा कंपनी डिजिटल विजन दवा के कफ सिरप कोल्ड बेस्ट से सेना जम्मू के 12 बच्चों की मौत हो गई थी। रीजनल प्रयोगशाला प्रयोगशाला चंडीगढ़ ने अपनी जांच में पाया कि कोल्ड बेस्ट सिरप में डीजे की मात्रा 35.87% थी।
जब हर स्तर पर ही जांच हो रही तो दवा बाजार में कैसे गिरावट?
सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश खजुरिया कहते हैं, रॉ-मटेरियल और फाइनल प्रोडक्ट्स दोनों की जांच होती है। इसके बिना कोई प्रमुख बाजार में प्रवेश नहीं कर सकता। ना सिर्फ कंपनी, क्रीएटरी प्लांट की भी कंपनियां। दवा में खामी पर रिकाॅल की प्रक्रिया लंबी है, तब तक कई लोग दवा खा चुके होते हैं।
भारतीय दवा कंपनियों पर क्या हुआ एक्शन?
22 अक्टूबर से 23 अगस्त तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डीजे और ईजी की भारी मात्रा पाए जाने के कारण पांच भारतीय कफ सिरप के खतरे जारी किए थे। अमेरिकी फर्म और फर्मों ने भारत के कई उद्यमियों की अपनी डायरेक्टर लिस्ट हटा ली है।
